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Sant Kabir Nagar News: लागत बढ़ी...घट गई आलू की उपज
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:30 PM IST
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-एक बीघे में 20 कुंतल हो रहा पैदावार, पहले 40 कुंतल का था आंकड़ा
हरिहरपुर। किसानों के लिए व्यवसायिक खेती में शुमार आलू के फसल की उपज भी घटकर अब आधी हो गई है। किसानों का कहना है कि पहले एक बीघे में 40 कुंतल आलू की पैदावार होती थी जो अब घटकर 20 कुंतल के आसपास रह गई है। आलू के उपज का वाजिब मूल्य न मिलने से भी आलू की फसल से किसानों का मोहभंग होता जा रहा है। एक बीघे में लागत के हिसाब से अब आमदनी भी काफी कम हो गई है।
आलू की खेतों में खाद, बीज, पानी और मजदूरी का खर्च एक बीघे में करीब 13 हजार लग जा रहा है। ऐसे में यदि किसान अपनी उपज खुद बेचें तब उसे एक बीघे में सात हजार रुपये की आमदनी होने की संभावना है।
आलू की पैदावार घटकर हुई आधी
पहले आलू की पैदावार प्रति बीघे करीब 40 कुंतल के आसपास होती थी जो अब घटकर 20 कुंतल प्रति बीघा रह गई है। लागत अधिक हो जाने और उपज घट जाने के चलते अब किसान आलू की खेती से मुंह मोड़ने को मजबूर हैं।
हनुमान पटेल, किसान
वाजिब मूल्य न मिलने से आमदनी घटी
रखरखाव के चलते किसान सड़क के किनारे रखकर आलू की उपज बेंचने को मजबूर हैं। इस समय दस रूपये प्रति किलो के भाव से आलू बिक रहा है। आलू किसानों को एक बीघे में करीब 13 हजार रूपये की लागत लगानी पड़ती है। खुद बेचने पर एक बीघे में सात हजार रूपये आमदनी होती है, जबकि व्यापारी औने-पौने दामों पर आलू खरीदते हैं। जिनके परिवार में कोई व्यक्ति खुद बेचने वाला न हो उसे काफी नुकसान होता है।
दीपेंद्र पटेल, किसान
मौसम की मार और खेतों की उर्वरा शक्ति भी जिम्मेदार
आलू की फसल में प्राय: पाला लग जाने का खतरा रहता है।समय के अनुसार खेत में दवा का छिड़काव न होने पर पाले की चपेट में आई फसल की उपज प्रभावित होती है। रासायनिक उर्वरकों के लगातार प्रयोग से खेत की उर्वरा शक्ति भी कम होती जा रही है। जिसका प्रभाव सीधे पैदावार पर पड़ रहा है।
रामदास चौधरी, किसान
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हरिहरपुर। किसानों के लिए व्यवसायिक खेती में शुमार आलू के फसल की उपज भी घटकर अब आधी हो गई है। किसानों का कहना है कि पहले एक बीघे में 40 कुंतल आलू की पैदावार होती थी जो अब घटकर 20 कुंतल के आसपास रह गई है। आलू के उपज का वाजिब मूल्य न मिलने से भी आलू की फसल से किसानों का मोहभंग होता जा रहा है। एक बीघे में लागत के हिसाब से अब आमदनी भी काफी कम हो गई है।
आलू की खेतों में खाद, बीज, पानी और मजदूरी का खर्च एक बीघे में करीब 13 हजार लग जा रहा है। ऐसे में यदि किसान अपनी उपज खुद बेचें तब उसे एक बीघे में सात हजार रुपये की आमदनी होने की संभावना है।
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आलू की पैदावार घटकर हुई आधी
पहले आलू की पैदावार प्रति बीघे करीब 40 कुंतल के आसपास होती थी जो अब घटकर 20 कुंतल प्रति बीघा रह गई है। लागत अधिक हो जाने और उपज घट जाने के चलते अब किसान आलू की खेती से मुंह मोड़ने को मजबूर हैं।
हनुमान पटेल, किसान
वाजिब मूल्य न मिलने से आमदनी घटी
रखरखाव के चलते किसान सड़क के किनारे रखकर आलू की उपज बेंचने को मजबूर हैं। इस समय दस रूपये प्रति किलो के भाव से आलू बिक रहा है। आलू किसानों को एक बीघे में करीब 13 हजार रूपये की लागत लगानी पड़ती है। खुद बेचने पर एक बीघे में सात हजार रूपये आमदनी होती है, जबकि व्यापारी औने-पौने दामों पर आलू खरीदते हैं। जिनके परिवार में कोई व्यक्ति खुद बेचने वाला न हो उसे काफी नुकसान होता है।
दीपेंद्र पटेल, किसान
मौसम की मार और खेतों की उर्वरा शक्ति भी जिम्मेदार
आलू की फसल में प्राय: पाला लग जाने का खतरा रहता है।समय के अनुसार खेत में दवा का छिड़काव न होने पर पाले की चपेट में आई फसल की उपज प्रभावित होती है। रासायनिक उर्वरकों के लगातार प्रयोग से खेत की उर्वरा शक्ति भी कम होती जा रही है। जिसका प्रभाव सीधे पैदावार पर पड़ रहा है।
रामदास चौधरी, किसान