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Sant Kabir Nagar News: दो सगे भाई समेत चार दोषियों को सात साल की सजा
Thu, 30 Jul 2026 11:39 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 30 Jul 2026 11:39 PM IST
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संतकबीरनगर। करीब 22 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय)/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट डॉ. दिव्यानंद द्विवेदी की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। न्यायालय ने दो सगे भाइयों समेत चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। जुर्माना जमा न करने की स्थिति में दोषियों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
मामला कोतवाली खलीलाबाद में दर्ज उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। न्यायालय ने बारी गांव निवासी रामशिव चौधरी, उनके सगे भाई मुन्ना उर्फ जितेंद्र, भोदू उर्फ सत्यप्रकाश तथा बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के डड़इया उर्फ चकदोलम निवासी दिलीप चौधरी को दोषी ठहराया। अदालत ने चारों को सात-सात वर्ष के कारावास और 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस प्रकार सभी दोषियों पर कुल 1.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अदालती अभिलेखों के अनुसार, इस मामले में एक अक्तूबर 2004 को प्राथमिकी दर्ज किया गया था। आठ नवंबर 2005 को न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया। दो फरवरी 2009 को आरोप तय किए गए। इसके बाद वर्षों तक साक्ष्य और गवाहों की प्रक्रिया चली। अभियोजन साक्ष्य वर्ष 2018 तक दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2024 में आरोपियों के बयान और बचाव पक्ष के साक्ष्य पूरे हुए। अंतिम बहस 22 जुलाई 2026 को संपन्न हुई और 30 जुलाई 2026 को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में सशक्त पैरवी की जिसके आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोष सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई।
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मामला कोतवाली खलीलाबाद में दर्ज उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। न्यायालय ने बारी गांव निवासी रामशिव चौधरी, उनके सगे भाई मुन्ना उर्फ जितेंद्र, भोदू उर्फ सत्यप्रकाश तथा बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के डड़इया उर्फ चकदोलम निवासी दिलीप चौधरी को दोषी ठहराया। अदालत ने चारों को सात-सात वर्ष के कारावास और 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस प्रकार सभी दोषियों पर कुल 1.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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अदालती अभिलेखों के अनुसार, इस मामले में एक अक्तूबर 2004 को प्राथमिकी दर्ज किया गया था। आठ नवंबर 2005 को न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया। दो फरवरी 2009 को आरोप तय किए गए। इसके बाद वर्षों तक साक्ष्य और गवाहों की प्रक्रिया चली। अभियोजन साक्ष्य वर्ष 2018 तक दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2024 में आरोपियों के बयान और बचाव पक्ष के साक्ष्य पूरे हुए। अंतिम बहस 22 जुलाई 2026 को संपन्न हुई और 30 जुलाई 2026 को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में सशक्त पैरवी की जिसके आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोष सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई।
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