{"_id":"69b5b716f9933eef340725a7","slug":"prashasti-20-app-will-identify-the-disabilities-of-students-of-council-schools-khalilabad-news-c-209-1-kld1025-147455-2026-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: प्रशस्ति 2.0 एप से परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों की दिव्यांगता की होगी पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: प्रशस्ति 2.0 एप से परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों की दिव्यांगता की होगी पहचान
विज्ञापन
विज्ञापन
संतकबीरनगर। परिषदीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं की दिव्यांगता की समय रहते पहचान के लिए एनसीईआरटी की ओर से प्रशस्ति 2.0 एप विकसित किया गया है। इसकी मदद से अब स्कूल स्तर पर ही 21 प्रकार की दिव्यांगता की पहचान की जा सकेगी। इसका उद्देश्य दिव्यांग छात्रों के त्वरित प्रमाणन, समावेशन और बेहतर शैक्षिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
जिले में 1246 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में करीब एक लाख सात हजार बच्चे पंजीकृत हैं। अब इन सभी बच्चों की स्क्रीनिंग शिक्षकों की ओर से की जाएगी। यह एप दिव्यांगता से जुड़ी प्रारंभिक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करता है। संबंधित छात्र को समय पर जरूरी सहायता, संसाधन और योजनाओं का लाभ मिल सके। बच्चों की पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
स्कूल शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कक्षा अध्यापकों को यह एप अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करना अनिवार्य किया है। इसके अलावा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की वार्डन, कक्षा अध्यापक, स्पेशल एजुकेटर और फिजियोथेरेपिस्ट भी एप का उपयोग करेंगे। प्रशस्ति 2.0 एप के माध्यम से शिक्षक बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता, शारीरिक गतिविधियों और संज्ञानात्मक विकास से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे।
इसके आधार पर यह एप संभावित दिव्यांगता की पहचान कर रिपोर्ट तैयार करेगी। अधिकारियों का कहना है कि पहले दिव्यांगता की पहचान और प्रमाणन की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती थी। इससे कई बच्चे योजनाओं से वंचित रह जाते थे। जिला समन्वयक समेकित शिक्षा रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि प्रशस्ति 2.0 एप से प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी होगी। इससे न केवल दिव्यांग छात्रों को समय पर सहयोग मिलेगा, बल्कि समावेशी शिक्षा को भी मजबूती मिलेगी। शिक्षकों को एप के उपयोग को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे सही तरीके से स्क्रीनिंग कर सकें।
000000000000
प्रशस्ति 2.0 ऐप को लॉन्च किया है। इससे परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी बच्चों की स्क्रीनिंग कराई जाएगी। उससे दिव्यांगता के बारे में सही जानकारी हो सकेगी।
- अमित कुमार सिंह, बीएसए
Trending Videos
जिले में 1246 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में करीब एक लाख सात हजार बच्चे पंजीकृत हैं। अब इन सभी बच्चों की स्क्रीनिंग शिक्षकों की ओर से की जाएगी। यह एप दिव्यांगता से जुड़ी प्रारंभिक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करता है। संबंधित छात्र को समय पर जरूरी सहायता, संसाधन और योजनाओं का लाभ मिल सके। बच्चों की पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्कूल शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कक्षा अध्यापकों को यह एप अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करना अनिवार्य किया है। इसके अलावा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की वार्डन, कक्षा अध्यापक, स्पेशल एजुकेटर और फिजियोथेरेपिस्ट भी एप का उपयोग करेंगे। प्रशस्ति 2.0 एप के माध्यम से शिक्षक बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता, शारीरिक गतिविधियों और संज्ञानात्मक विकास से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे।
इसके आधार पर यह एप संभावित दिव्यांगता की पहचान कर रिपोर्ट तैयार करेगी। अधिकारियों का कहना है कि पहले दिव्यांगता की पहचान और प्रमाणन की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती थी। इससे कई बच्चे योजनाओं से वंचित रह जाते थे। जिला समन्वयक समेकित शिक्षा रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि प्रशस्ति 2.0 एप से प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी होगी। इससे न केवल दिव्यांग छात्रों को समय पर सहयोग मिलेगा, बल्कि समावेशी शिक्षा को भी मजबूती मिलेगी। शिक्षकों को एप के उपयोग को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे सही तरीके से स्क्रीनिंग कर सकें।
000000000000
प्रशस्ति 2.0 ऐप को लॉन्च किया है। इससे परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी बच्चों की स्क्रीनिंग कराई जाएगी। उससे दिव्यांगता के बारे में सही जानकारी हो सकेगी।
- अमित कुमार सिंह, बीएसए