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Sant Kabir Nagar News: विकास प्राधिकरण के गठन की तैयारी तेज, जल्द चिह्नित होगी जमीन
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कलक्ट्रेट संतकबीरनगर का भवन।
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संतकबीरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले में विकास प्राधिकरण के गठन की घोषणा के बाद प्रशासन अब इसकी तैयारियों में जुट गया है। जल्द जमीन चिह्नित करने का काम पूरा कर लिया जाएगा। लैंड बैंक के बाद प्रस्ताव तैयार होगा और पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। विकास प्राधिकरण के गठन से न सिर्फ जिले का नियोजित विकास होगा, बल्कि बुनियादी सुविधाएं भी बढ़ेंगी।
मंगलवार को कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जिले में विकास प्राधिकरण के गठन की घोषणा की थी। अब प्रशासन ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जल्द ही जमीन चिह्नित करने की तैयारी है। सीएम ने लैंड बैंक बनाने की बात कही थी। संभावना जताई जा रही है कि विनिमय क्षेत्र की भूमि इसके लिए फाइनल की जाएगी।
जानकारों का मानना है कि विकास प्राधिकरण की दिशा में की गई घोषणा को यदि व्यापक क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से लागू किया जाए तो यह केवल जनपद के शहरी विकास का विषय नहीं रहेगा, बल्कि गोरखपुर के भविष्य के विस्तार को व्यवस्थित रूप से आश्रय देने वाला एक नया आर्थिक एवं शहरी मॉडल बन सकता है।
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गोरखपुर पूर्वांचल के प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में बढ़ती आबादी, आवास, उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग और रोजगार की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आसपास के जनपदों का सुनियोजित विकास आवश्यक है।
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प्राधिकरण के लिए ये है आवश्यक
- वर्तमान औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार
- नया औद्योगिक लैंड बैंक
- होजरी एवं टेक्सटाइल क्लस्टर
- वेयरहाउस एवं लॉजिस्टिक हब
- आधुनिक बाजार
- आवासीय क्षेत्र
- बेहतर सड़क एवं ड्रेनेज व्यवस्था
- विकास के लिए मास्टर प्लान
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पूर्व में केबी-साडा के गठन की शुरू हुई थी प्रक्रिया
जिले में पारंपरिक उद्योगों, पर्यटन और शहरी नियोजन को गति देने के लिए प्रदेश सरकार ने कबिरा-बखिरा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (केबी-साडा) के गठन की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत बखिरा क्षेत्र को भी सुनियोजित विकास योजनाओं में शामिल किया गया है। केबी-साडा में लगभग 297 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल शामिल किया गया था। इसमें मगहर नगर पंचायत, खलीलाबाद व मेंहदावल क्षेत्र, बाघनगर उर्फ बखिरा और 218 राजस्व ग्राम शामिल किए गए थे। इसके पीछे मंशा थी कि इससे बखिरा पीतल उद्योग, हैंडलूम कारोबार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बखिरा पक्षी विहार में पर्यटकों की सुविधाओं का विस्तार होगा। इसके साथ ही अमृत योजना के तहत बखिरा नगर पंचायत क्षेत्र में जीआईएस आधारित महायोजना लागू करने की प्रक्रिया भी होनी थी। केबी-साडा के प्रस्ताव को अभी तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
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विकास प्राधिकरण के गठन की दिशा में काम शुरू किया गया है। इसके लिए जल्द ही भूमि चिह्नित की जाएगी और प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
-आलोक कुमार, डीएम
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विकास प्राधिकरण की घोषणा को यदि लैंड बैंक, औद्योगिक विस्तार, मगहर की विरासत और बखिरा की प्राकृतिक संपदा को एक साथ जोड़कर लागू किया जाए तो संतकबीरनगर आने वाले वर्षों में गोरखपुर सहित पूरे पूर्वांचल के संतुलित एवं सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
-अरविंद पाठक, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
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मंगलवार को कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जिले में विकास प्राधिकरण के गठन की घोषणा की थी। अब प्रशासन ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जल्द ही जमीन चिह्नित करने की तैयारी है। सीएम ने लैंड बैंक बनाने की बात कही थी। संभावना जताई जा रही है कि विनिमय क्षेत्र की भूमि इसके लिए फाइनल की जाएगी।
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जानकारों का मानना है कि विकास प्राधिकरण की दिशा में की गई घोषणा को यदि व्यापक क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से लागू किया जाए तो यह केवल जनपद के शहरी विकास का विषय नहीं रहेगा, बल्कि गोरखपुर के भविष्य के विस्तार को व्यवस्थित रूप से आश्रय देने वाला एक नया आर्थिक एवं शहरी मॉडल बन सकता है।
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गोरखपुर पूर्वांचल के प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में बढ़ती आबादी, आवास, उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग और रोजगार की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आसपास के जनपदों का सुनियोजित विकास आवश्यक है।
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प्राधिकरण के लिए ये है आवश्यक
- वर्तमान औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार
- नया औद्योगिक लैंड बैंक
- होजरी एवं टेक्सटाइल क्लस्टर
- वेयरहाउस एवं लॉजिस्टिक हब
- आधुनिक बाजार
- आवासीय क्षेत्र
- बेहतर सड़क एवं ड्रेनेज व्यवस्था
- विकास के लिए मास्टर प्लान
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पूर्व में केबी-साडा के गठन की शुरू हुई थी प्रक्रिया
जिले में पारंपरिक उद्योगों, पर्यटन और शहरी नियोजन को गति देने के लिए प्रदेश सरकार ने कबिरा-बखिरा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (केबी-साडा) के गठन की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत बखिरा क्षेत्र को भी सुनियोजित विकास योजनाओं में शामिल किया गया है। केबी-साडा में लगभग 297 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल शामिल किया गया था। इसमें मगहर नगर पंचायत, खलीलाबाद व मेंहदावल क्षेत्र, बाघनगर उर्फ बखिरा और 218 राजस्व ग्राम शामिल किए गए थे। इसके पीछे मंशा थी कि इससे बखिरा पीतल उद्योग, हैंडलूम कारोबार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बखिरा पक्षी विहार में पर्यटकों की सुविधाओं का विस्तार होगा। इसके साथ ही अमृत योजना के तहत बखिरा नगर पंचायत क्षेत्र में जीआईएस आधारित महायोजना लागू करने की प्रक्रिया भी होनी थी। केबी-साडा के प्रस्ताव को अभी तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
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विकास प्राधिकरण के गठन की दिशा में काम शुरू किया गया है। इसके लिए जल्द ही भूमि चिह्नित की जाएगी और प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
-आलोक कुमार, डीएम
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विकास प्राधिकरण की घोषणा को यदि लैंड बैंक, औद्योगिक विस्तार, मगहर की विरासत और बखिरा की प्राकृतिक संपदा को एक साथ जोड़कर लागू किया जाए तो संतकबीरनगर आने वाले वर्षों में गोरखपुर सहित पूरे पूर्वांचल के संतुलित एवं सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
-अरविंद पाठक, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रीज एसोसिएशन