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Shahjahanpur News: शरद पूर्णिमा पर ढाईघाट गंगा तट पर उमड़े श्रद्धालु
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लालाबाद में सेवादारों को सम्मानित करते बिपिन मैथिल। संवाद
मिर्जापुर। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर ढाईघाट गंगा तट पर स्नान और दान-पुण्य का सिलसिला शुरू हो गया। रविवार भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया, जो दिनभर जारी रहा। पंचांग के अनुसार, उदया तिथि के चलते सोमवार को भी श्रद्धालु गंगा में स्नान कर दान-पुण्य करेंगे।
ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के जयकारों के साथ गंगा में डुबकी लगाई और सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। स्नान के बाद गंगाभक्तों ने घाट पर अपने इष्ट देवी-देवताओं का पूजन किया। श्रद्धालुओं ने गरीबों और पंडा-पुजारियों को दान-दक्षिणा देकर पुण्य लाभ अर्जित किया। दिनभर घाट पर श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा।
आचार्य पंडित चंद्र मोहन शंखधार ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे दूध की खीर रखने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। अगले दिन खीर का भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि चंद्र दर्शन और खीर रखने का विधान रविवार रात को है, जबकि उदया तिथि के अनुसार सोमवार, 26 अक्तूबर को स्नान और दान-पुण्य किया जाएगा।
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सेवादारों को सम्मानित किया
जलालाबाद। शरद पूर्णिमा पर सुप्रसिद्ध सिद्धबली हनुमान श्री बालाजी धाम पर सुंदरकांड का पाठ व हवन पूजन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। धाम की व्यवस्थाओं में योगदान करने वाले सेवादारों को सम्मानित किया गया। हर साल की तरह आयोजित होने वाला हवन पूजन आचार्य चैतन्य महाराज की देखरेख में हुआ। इसमें बड़ी संख्या में भक्तजनों ने आहुतियां दी। बालाजी धाम के मुख्य सेवादार बिपिन मैथिल ने आचार्य राममोहन मिश्र, मनोज कटियार, अजय गुप्ता, सुनील मौर्य आदि को सम्मानित किया गया। धाम के पुजारी धर्मेंद्र नाथ मिश्रा, प्रदीप शर्मा, रामप्रकाश मिश्रा, सूरजमल गुप्ता का सहयोग रहा। संवाद
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ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के जयकारों के साथ गंगा में डुबकी लगाई और सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। स्नान के बाद गंगाभक्तों ने घाट पर अपने इष्ट देवी-देवताओं का पूजन किया। श्रद्धालुओं ने गरीबों और पंडा-पुजारियों को दान-दक्षिणा देकर पुण्य लाभ अर्जित किया। दिनभर घाट पर श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा।
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आचार्य पंडित चंद्र मोहन शंखधार ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे दूध की खीर रखने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। अगले दिन खीर का भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि चंद्र दर्शन और खीर रखने का विधान रविवार रात को है, जबकि उदया तिथि के अनुसार सोमवार, 26 अक्तूबर को स्नान और दान-पुण्य किया जाएगा।
सेवादारों को सम्मानित किया
जलालाबाद। शरद पूर्णिमा पर सुप्रसिद्ध सिद्धबली हनुमान श्री बालाजी धाम पर सुंदरकांड का पाठ व हवन पूजन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। धाम की व्यवस्थाओं में योगदान करने वाले सेवादारों को सम्मानित किया गया। हर साल की तरह आयोजित होने वाला हवन पूजन आचार्य चैतन्य महाराज की देखरेख में हुआ। इसमें बड़ी संख्या में भक्तजनों ने आहुतियां दी। बालाजी धाम के मुख्य सेवादार बिपिन मैथिल ने आचार्य राममोहन मिश्र, मनोज कटियार, अजय गुप्ता, सुनील मौर्य आदि को सम्मानित किया गया। धाम के पुजारी धर्मेंद्र नाथ मिश्रा, प्रदीप शर्मा, रामप्रकाश मिश्रा, सूरजमल गुप्ता का सहयोग रहा। संवाद