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Shahjahanpur News: धीमी गति से हो रही कुत्तों की नसबंदी...इंतजाम नाकाफी
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अजीजगंज स्थित एबीसी सेंटर। संवाद
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शाहजहांपुर। अजीजगंज में बने एनिमल बर्थ कंट्राेल (एबीसी) सेंटर में स्टाफ की कमी के कारण कुत्तों की नसबंदी का काम धीमी गति से चल रहा है। इसका खमियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। शहर में रोजाना 30 से 35 लोग कुत्तों के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने अस्पताल पहुंच रहे हैं। रोजाना चार-पांच शिकायते नगर निगम में पहुंच रही हैं।
दिसंबर 2025 में अजीजगंज में कुत्तों की नसबंदी के लिए एक करोड़ 85 लाख की लागत से एबीसी सेंटर शुरू किया गया था। नगर निगम क्षेत्र में 10 हजार कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया। करीब पांच माह में 2800 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। एक कुत्ते की नसबंदी करने पर 979 रुपये खर्च आता है।
एबीसी सेंटर की टेंडर प्रक्रिया के समय तय हुआ था कि दो टीमों को लगाया जाएगा। वर्तमान में एबीसी सेंटर में दो डाॅक्टर, दो हेल्पर और चार लोगों की एक टीम है। कुत्तों को पकड़ने के लिए एक दिन में चार से पांच शिकायतें नगर निगम के पास आती है। यह तय किया गया था कि वार्डवार कुत्ताें को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।
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एनिमल बर्थ सेंटर में 50 कुत्तों को रखने की व्यवस्था
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में एक बार में 50 कुत्तों के रखने के लिए अलग-अलग कमरे बनाए गए हैं। जो कुत्ते खतरनाक श्रेणी में आते हैं, उनको अलग कमरों में रखा जाएगा। कुत्ते के काटने की शिकायत पर उसे बर्थ सेंटर में बंद किया जाता है। कुत्ते के व्यवहार को तीन से चार दिन तक देखा जाता है। इसके बाद एआरवी लगाकर छोड़ दिया जाता है।
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नसबंदी होने के बाद कुत्ते शांत हो जाते हैं। वे अमूमन लोगों पर हमला नहीं करते हैं। सेंटर पर स्टाफ की कमी है। इसके लिए संबंधित एजेंसी से बात की गई है।
- डॉ. मनोज कुमार मिश्र, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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दिसंबर 2025 में अजीजगंज में कुत्तों की नसबंदी के लिए एक करोड़ 85 लाख की लागत से एबीसी सेंटर शुरू किया गया था। नगर निगम क्षेत्र में 10 हजार कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया। करीब पांच माह में 2800 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। एक कुत्ते की नसबंदी करने पर 979 रुपये खर्च आता है।
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एबीसी सेंटर की टेंडर प्रक्रिया के समय तय हुआ था कि दो टीमों को लगाया जाएगा। वर्तमान में एबीसी सेंटर में दो डाॅक्टर, दो हेल्पर और चार लोगों की एक टीम है। कुत्तों को पकड़ने के लिए एक दिन में चार से पांच शिकायतें नगर निगम के पास आती है। यह तय किया गया था कि वार्डवार कुत्ताें को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।
एनिमल बर्थ सेंटर में 50 कुत्तों को रखने की व्यवस्था
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में एक बार में 50 कुत्तों के रखने के लिए अलग-अलग कमरे बनाए गए हैं। जो कुत्ते खतरनाक श्रेणी में आते हैं, उनको अलग कमरों में रखा जाएगा। कुत्ते के काटने की शिकायत पर उसे बर्थ सेंटर में बंद किया जाता है। कुत्ते के व्यवहार को तीन से चार दिन तक देखा जाता है। इसके बाद एआरवी लगाकर छोड़ दिया जाता है।
नसबंदी होने के बाद कुत्ते शांत हो जाते हैं। वे अमूमन लोगों पर हमला नहीं करते हैं। सेंटर पर स्टाफ की कमी है। इसके लिए संबंधित एजेंसी से बात की गई है।
- डॉ. मनोज कुमार मिश्र, नगर स्वास्थ्य अधिकारी