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Shahjahanpur News: परिवार में चार मौतों से गम में डूबे परिजन, गांव में पसरा सन्नाटा
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खुदागंज (शाहजहांपुर)। हापुड़ के पास सोमवार सुबह हुए हादसे में हसनापुर गांव के अशोक और उनके तीन बच्चों की मौत की खबर आते ही गांव के लोग शोक में डूब गए। मंगलवार को वहां दिनभर मातमी सन्नाटा पसरा रहा। लोग सहज विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि हाल ही में गांव से दिल्ली लौटा हंसता-खेलता परिवार हादसे में इस तरह बिखर जाएगा। इस बीच, हादसे में घायल अशोक की पत्नी रिंकी को नोएडा से लेकर घरवाले गांव आ गए हैं।
अशोक के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। वह अपने परिवार में पांच भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनके छोटे भाई जंगपाल, रोशन लाल और दीपक गांव में रहकर खेती की थोड़ी जमीन के सहारे जीवन यापन करते हैं। उनके सबसे छोटे भाई दीपक की अभी शादी भी नहीं हुई है। अशोक अपने परिवार से अलग रहकर पहले गांव में ही मजदूरी करते थे। लगभग तीन साल पहले वह नोएडा राज मिस्त्री का काम करने गए थे।
बाद में वह अपने बच्चे भी साथ ले गए और देवला गांव में रहने लगे। वही के स्कूलों में उन्होंने बच्चों का दाखिला करा दिया। उनका बड़ा बेटा प्रशांत दसवीं कक्षा का छात्र है। छोटा बेटा अनुज कक्षा एक, बेटी राधिका नर्सरी और मीनाक्षी एलकेजी में पढ़ रही थी। गत पांच जुलाई को परिवार में बड़े भाई राम भजन के बेटे शिवम की शादी होने की वजह से अशोक पत्नी और बच्चों सहित नोएडा से गांव आए थे। कई दिन गांव में रहकर शादी की खुशियां सभी ने मिल-जुलकर मनाईं।
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सोमवार को गांव से बाइक पर परिवार के साथ नोएडा रवाना होते वक्त उन्होंने गांव के कई साथियों से जल्दी लौटने का वादा किया था। इसीलिए गांव के लोग हादसे में अशोक समेत उनके पुत्र अनुज, पुत्री राधिका और मीनाक्षी की मौत पर सहसा विश्वास नहीं कर पाए। संवाद
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बुधवार सुबह होगा शवों का अंतिम संस्कार
अशोक की घायल पत्नी रिंकी के घर पहुंचते ही सन्नाटे को उनकी चीख-पुकार तोड़ने लगी। हादसे में बेटे सहित पौत्र-पौत्रियों की मौत की जानकारी पाकर अशोक की वृद्ध मां रामवती का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और वह बार-बार बेहोश हो रही हैं। परिजनों के अनुसार, शव मंगलवार को देर रात तक गांव आएंगे। इसलिए शवों का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह होगा।
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बाइक से जाने से मना करके बाल-बाल बचा बड़ा बेटा प्रशांत
चचेरे भाई की शादी में पिता अशोक के साथ आया उनका बड़ा बेटा प्रशांत घरवालों के कहने पर कुछ दिन को गांव में ही रुक गया था। हालांकि, अशोक ने उससे साथ चलने को कहा, लेकिन उसने बाइक से यह कहकर जाने से मना कर दिया कि वह बाद में नोएडा आ जाएगा। अगर वह अपने मम्मी-पापा के साथ चला गया होता तो वह भी हादसे की चपेट में आ जाता। फिलहाल, पिता समेत भाई-बहनों की मौत से वह गुमसुम हो गया है। कुछ भी पूछने पर वह पथराई और डबडबाई आंखों से इधर-उधर देखने लगता है।
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हसनापुर में दो माह पहले भी बड़ा हादसा हो चुका है
गत 15 मई को हैंडपंप में आए करंट की चपेट में आकर गांव के युवक विवेक सिंह और उसे बचाने के प्रयास में करंट लगने से उसकी ताई रन्ना देवी की मौत हो गई थी। इस हादसे को लोग भुला भी नहीं पाए कि सोमवार को हुए हादसे ने गांव के एक ही परिवार के चार लोगों की जान ले ली। हसनापुर निवासी प्रवेश चौहान ने दोनों हादसों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि गांव को ग्रहण लग गया है।
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अशोक के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। वह अपने परिवार में पांच भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनके छोटे भाई जंगपाल, रोशन लाल और दीपक गांव में रहकर खेती की थोड़ी जमीन के सहारे जीवन यापन करते हैं। उनके सबसे छोटे भाई दीपक की अभी शादी भी नहीं हुई है। अशोक अपने परिवार से अलग रहकर पहले गांव में ही मजदूरी करते थे। लगभग तीन साल पहले वह नोएडा राज मिस्त्री का काम करने गए थे।
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बाद में वह अपने बच्चे भी साथ ले गए और देवला गांव में रहने लगे। वही के स्कूलों में उन्होंने बच्चों का दाखिला करा दिया। उनका बड़ा बेटा प्रशांत दसवीं कक्षा का छात्र है। छोटा बेटा अनुज कक्षा एक, बेटी राधिका नर्सरी और मीनाक्षी एलकेजी में पढ़ रही थी। गत पांच जुलाई को परिवार में बड़े भाई राम भजन के बेटे शिवम की शादी होने की वजह से अशोक पत्नी और बच्चों सहित नोएडा से गांव आए थे। कई दिन गांव में रहकर शादी की खुशियां सभी ने मिल-जुलकर मनाईं।
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सोमवार को गांव से बाइक पर परिवार के साथ नोएडा रवाना होते वक्त उन्होंने गांव के कई साथियों से जल्दी लौटने का वादा किया था। इसीलिए गांव के लोग हादसे में अशोक समेत उनके पुत्र अनुज, पुत्री राधिका और मीनाक्षी की मौत पर सहसा विश्वास नहीं कर पाए। संवाद
बुधवार सुबह होगा शवों का अंतिम संस्कार
अशोक की घायल पत्नी रिंकी के घर पहुंचते ही सन्नाटे को उनकी चीख-पुकार तोड़ने लगी। हादसे में बेटे सहित पौत्र-पौत्रियों की मौत की जानकारी पाकर अशोक की वृद्ध मां रामवती का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और वह बार-बार बेहोश हो रही हैं। परिजनों के अनुसार, शव मंगलवार को देर रात तक गांव आएंगे। इसलिए शवों का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह होगा।
बाइक से जाने से मना करके बाल-बाल बचा बड़ा बेटा प्रशांत
चचेरे भाई की शादी में पिता अशोक के साथ आया उनका बड़ा बेटा प्रशांत घरवालों के कहने पर कुछ दिन को गांव में ही रुक गया था। हालांकि, अशोक ने उससे साथ चलने को कहा, लेकिन उसने बाइक से यह कहकर जाने से मना कर दिया कि वह बाद में नोएडा आ जाएगा। अगर वह अपने मम्मी-पापा के साथ चला गया होता तो वह भी हादसे की चपेट में आ जाता। फिलहाल, पिता समेत भाई-बहनों की मौत से वह गुमसुम हो गया है। कुछ भी पूछने पर वह पथराई और डबडबाई आंखों से इधर-उधर देखने लगता है।
हसनापुर में दो माह पहले भी बड़ा हादसा हो चुका है
गत 15 मई को हैंडपंप में आए करंट की चपेट में आकर गांव के युवक विवेक सिंह और उसे बचाने के प्रयास में करंट लगने से उसकी ताई रन्ना देवी की मौत हो गई थी। इस हादसे को लोग भुला भी नहीं पाए कि सोमवार को हुए हादसे ने गांव के एक ही परिवार के चार लोगों की जान ले ली। हसनापुर निवासी प्रवेश चौहान ने दोनों हादसों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि गांव को ग्रहण लग गया है।