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Shahjahanpur News: चौसेड़ा के प्रधान के अधिकार किए गए बहाल
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संयुक्त जांच में लगाया गया था गबन का आरोप, अंतिम जांच में मिली क्लीन चिट
संवाद न्यूज एजेंसी
पुवायां। गांवसभा चौसेड़ा के प्रधान सुखविंदर सिंह को अंतिम जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बहाल कर दिए गए हैं।
पुवायां निवासी चंद्रकला ने चौसेड़ा में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए शपथपत्र देकर शिकायत कर जांच की मांग की थी। डीएम ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट दुर्गेश यादव, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी की टीम बनाकर जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट मिलने पर परीक्षण जिला लेखा परीक्षा अधिकारी से कराया गया।
जांच में तीन मदों में एक लाख 870 रुपये का गबन पाए जाने पर प्रधान और सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस का जवाब न मिलने पर प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर अंतिम जांच के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी को जांच अधिकारी बनाया गया था।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने जांच में गबन नहीं मानते हुए रिपोर्ट दी थी कि सभी कार्य कराए गए हैं। इसके बाद डीएम ने एडीएम, जिला विकास अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधिशासी अभियंता की टीम बनाकर जांच कराई। टीम की जांच रिपोर्ट देने पर पाया गया कि गबन हुआ ही नहीं है। इसके बाद डीएम ने प्रधान के अधिकार बहाल कर दिए हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुवायां। गांवसभा चौसेड़ा के प्रधान सुखविंदर सिंह को अंतिम जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बहाल कर दिए गए हैं।
पुवायां निवासी चंद्रकला ने चौसेड़ा में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए शपथपत्र देकर शिकायत कर जांच की मांग की थी। डीएम ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट दुर्गेश यादव, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी की टीम बनाकर जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट मिलने पर परीक्षण जिला लेखा परीक्षा अधिकारी से कराया गया।
जांच में तीन मदों में एक लाख 870 रुपये का गबन पाए जाने पर प्रधान और सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस का जवाब न मिलने पर प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर अंतिम जांच के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी को जांच अधिकारी बनाया गया था।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी ने जांच में गबन नहीं मानते हुए रिपोर्ट दी थी कि सभी कार्य कराए गए हैं। इसके बाद डीएम ने एडीएम, जिला विकास अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधिशासी अभियंता की टीम बनाकर जांच कराई। टीम की जांच रिपोर्ट देने पर पाया गया कि गबन हुआ ही नहीं है। इसके बाद डीएम ने प्रधान के अधिकार बहाल कर दिए हैं।