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Shahjahanpur News: काजी सरफराज ने जगाई थी आजादी की अलख, मिली थी काला पानी की सजा
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सैयद मंजूर हसन।
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शाहजहांपुर। आजादी की लड़ाई में किसी ने हथियार उठाए तो किसी ने अपनी आवाज को ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हथियार बना लिया। ऐसे ही आजादी के मतवाले काजी सैयद सरफराज अली थे। अंग्रेजों के खिलाफ तकरीर करने और लोगों में आजादी की अलख जगाने के आरोप में उन्हें 14 वर्ष के काला पानी की सजा सुनाई गई थी।
काजी सरफराज के परिवार के लोग वर्तमान में मोहल्ला झंडा में रहते हैं। उनकी कब्र भी मोहल्ला चमकनी में स्थित कब्रिस्तान में है। शाहजहांपुर गजेटियर 1910 के अनुसार, जिले की जनता का मनोबल बढ़ाने के लिए काजी सैयद सरफराज अली ने बड़ी ईदगाह में जलसा कर तकरीर करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ आग उगली थी।
उन्होंने तिरंगा झंडा फहराकर देश को आजाद कराने के लिए जनता से मार्मिक अपील की थी। वे तीन दिन तक ईदगाह में रहे और अल्लाह से अंग्रेजी शासन खत्म होने की दुआ की। 1857 की क्रांति समाप्त होने के बाद अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अंग्रेजों ने देशद्रोह का मुकदमा चलाकर 14 साल की काला पानी की सजा सुनाकर अंडमान भेज दिया।
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अंग्रेज अफसर की संस्तुति पर माफ की थी 11 साल की सजा
काजी सरफराज के प्रपौत्र सेवानिवृत्त शिक्षक सैयद मंजूर हसन बताते हैं कि काजी एक अच्छे शायर के साथ ही उर्दू, फारसी और अरबी के विद्वान थे। उस समय अंडमान का हाकिम कर्नल ब्रूस उनसे उर्दू और फारसी सीखने लगा। 1861 ने कर्नल ब्रूस ने काजी सरफराज से प्रभावित होकर अंग्रेजी हुकूमत को रिपोर्ट भेजकर काजी की सजा माफ करा दी। काजी ने तीन वर्ष तक सजा काटी थी और 11 साल की सजा माफ हो गई थी। 10 जुलाई 1876 में 64 वर्ष की आयु में क्रांतिकारी का इंतकाल हो गया।
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काजी सरफराज के परिवार के लोग वर्तमान में मोहल्ला झंडा में रहते हैं। उनकी कब्र भी मोहल्ला चमकनी में स्थित कब्रिस्तान में है। शाहजहांपुर गजेटियर 1910 के अनुसार, जिले की जनता का मनोबल बढ़ाने के लिए काजी सैयद सरफराज अली ने बड़ी ईदगाह में जलसा कर तकरीर करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ आग उगली थी।
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उन्होंने तिरंगा झंडा फहराकर देश को आजाद कराने के लिए जनता से मार्मिक अपील की थी। वे तीन दिन तक ईदगाह में रहे और अल्लाह से अंग्रेजी शासन खत्म होने की दुआ की। 1857 की क्रांति समाप्त होने के बाद अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अंग्रेजों ने देशद्रोह का मुकदमा चलाकर 14 साल की काला पानी की सजा सुनाकर अंडमान भेज दिया।
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अंग्रेज अफसर की संस्तुति पर माफ की थी 11 साल की सजा
काजी सरफराज के प्रपौत्र सेवानिवृत्त शिक्षक सैयद मंजूर हसन बताते हैं कि काजी एक अच्छे शायर के साथ ही उर्दू, फारसी और अरबी के विद्वान थे। उस समय अंडमान का हाकिम कर्नल ब्रूस उनसे उर्दू और फारसी सीखने लगा। 1861 ने कर्नल ब्रूस ने काजी सरफराज से प्रभावित होकर अंग्रेजी हुकूमत को रिपोर्ट भेजकर काजी की सजा माफ करा दी। काजी ने तीन वर्ष तक सजा काटी थी और 11 साल की सजा माफ हो गई थी। 10 जुलाई 1876 में 64 वर्ष की आयु में क्रांतिकारी का इंतकाल हो गया।