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Shahjahanpur News: कूड़ा प्रबंधन की योजना बदहाल... कबाड़ हो रहे ई-रिक्शा, लाखों रुपये की बर्बादी
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रोजा के गांव चौढ़ेरा में लगा हुआ कूड़े का ढेर। संवाद
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शाहजहांपुर। गांवों में कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बनाए गए एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (आरआरसी) अब खुद बदहाली के शिकार हैं। अधिकतर केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं। कूड़ा उठाने के लिए दिए गए ई-रिक्शा भी देखरेख के अभाव में कबाड़ हो रहे हैं। केंद्र बंद होने से गांवों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं और स्वच्छ भारत मिशन के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिले की 1068 ग्राम पंचायतों के करीब एक हजार गांवों में केंद्र बनाए गए थे। प्रत्येक सेंटर पर करीब तीन लाख रुपये खर्च किए गए। कूड़ा एकत्र करने के लिए ग्राम पंचायतों को करीब 1.40 लाख रुपये कीमत के ई-रिक्शा भी उपलब्ध कराए गए। योजना के तहत घरों से कूड़ा उठाकर केंद्र पर लाना था।
यहां गीले और सूखे कूड़े को अलग कर जैविक कचरे से खाद तैयार करने की योजना थी। सेंटरों के संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई थी। सेंटरों के संचालन में लापरवाही के कारण गांवों में कूड़ा उठान व्यवस्था प्रभावित है। कई जगह कूड़ा खुले में डाला जा रहा है। इससे नालियां चोक हो रही हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। बारिश के मौसम में जलभराव और गंदगी से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं, लंबे समय से खड़े ई-रिक्शों की हालत भी खराब होती जा रही है।
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गांव में लगे कूड़े के ढेर
रोजा क्षेत्र के ब्लॉक भावलखेड़ा से महज 800 मीटर दूर ग्राम पंचायत चौढ़ेरा में लाखों से बना केंद्र कई सालों से बंद पड़ा है। पंचायत में परमाली, दनियापुर, रौसर कोठी और चौढ़ेरा गांव आते हैं। ई-रिक्शा वर्षों से खड़े धूल फांक रहे हैं। हर गली-मोहल्ले में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इसी तरह कुर्रियाकलां के गांव चाैहनापुर में दो वर्ष पहले बने केंद्र भी संचालित नहीं हुए। कूड़ा उठान के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा से सफाई कर्मी आधे गांव से कूड़ा उठाते है और इधर-उधर डाल देते हैं।
जैतीपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत गौहावर में केंद्र खुद ही गंदगी की चपेट में है। इसके आसपास झाड़ियां उग आई हैं। कूड़ा उठाने के लिए दिए गए ई-रिक्शों का इस्तेमाल भी नहीं होता है। निगोही की ग्राम पंचायत भुंडी के माजरा डेल खेड़ा में केंद्र बनने के बाद छह माह से ताला लगा हुआ है। ग्रामीण सड़क किनारे कूड़ा डालते हैं। इससे कूड़े के ढेर लग गए हैं। कूड़ा एकत्र करने के लिए दिए गए ई-रिक्शा का कोई अता-पता नहीं है।
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ग्राम पंचायतों में बने आरआरसी की प्रत्येक सप्ताह ब्लॉक स्तर पर समीक्षा की जाएगी। निष्क्रिय केंद्र की देखरेख करने वाले स्वयं सहायता समूह या सचिव पर कार्रवाई की जाएगी।
- नितेश भोडले, डीपीआरओ
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जिले की 1068 ग्राम पंचायतों के करीब एक हजार गांवों में केंद्र बनाए गए थे। प्रत्येक सेंटर पर करीब तीन लाख रुपये खर्च किए गए। कूड़ा एकत्र करने के लिए ग्राम पंचायतों को करीब 1.40 लाख रुपये कीमत के ई-रिक्शा भी उपलब्ध कराए गए। योजना के तहत घरों से कूड़ा उठाकर केंद्र पर लाना था।
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यहां गीले और सूखे कूड़े को अलग कर जैविक कचरे से खाद तैयार करने की योजना थी। सेंटरों के संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई थी। सेंटरों के संचालन में लापरवाही के कारण गांवों में कूड़ा उठान व्यवस्था प्रभावित है। कई जगह कूड़ा खुले में डाला जा रहा है। इससे नालियां चोक हो रही हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। बारिश के मौसम में जलभराव और गंदगी से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं, लंबे समय से खड़े ई-रिक्शों की हालत भी खराब होती जा रही है।
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गांव में लगे कूड़े के ढेर
रोजा क्षेत्र के ब्लॉक भावलखेड़ा से महज 800 मीटर दूर ग्राम पंचायत चौढ़ेरा में लाखों से बना केंद्र कई सालों से बंद पड़ा है। पंचायत में परमाली, दनियापुर, रौसर कोठी और चौढ़ेरा गांव आते हैं। ई-रिक्शा वर्षों से खड़े धूल फांक रहे हैं। हर गली-मोहल्ले में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इसी तरह कुर्रियाकलां के गांव चाैहनापुर में दो वर्ष पहले बने केंद्र भी संचालित नहीं हुए। कूड़ा उठान के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा से सफाई कर्मी आधे गांव से कूड़ा उठाते है और इधर-उधर डाल देते हैं।
जैतीपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत गौहावर में केंद्र खुद ही गंदगी की चपेट में है। इसके आसपास झाड़ियां उग आई हैं। कूड़ा उठाने के लिए दिए गए ई-रिक्शों का इस्तेमाल भी नहीं होता है। निगोही की ग्राम पंचायत भुंडी के माजरा डेल खेड़ा में केंद्र बनने के बाद छह माह से ताला लगा हुआ है। ग्रामीण सड़क किनारे कूड़ा डालते हैं। इससे कूड़े के ढेर लग गए हैं। कूड़ा एकत्र करने के लिए दिए गए ई-रिक्शा का कोई अता-पता नहीं है।
ग्राम पंचायतों में बने आरआरसी की प्रत्येक सप्ताह ब्लॉक स्तर पर समीक्षा की जाएगी। निष्क्रिय केंद्र की देखरेख करने वाले स्वयं सहायता समूह या सचिव पर कार्रवाई की जाएगी।
- नितेश भोडले, डीपीआरओ

रोजा के गांव चौढ़ेरा में लगा हुआ कूड़े का ढेर। संवाद

रोजा के गांव चौढ़ेरा में लगा हुआ कूड़े का ढेर। संवाद

रोजा के गांव चौढ़ेरा में लगा हुआ कूड़े का ढेर। संवाद

रोजा के गांव चौढ़ेरा में लगा हुआ कूड़े का ढेर। संवाद

रोजा के गांव चौढ़ेरा में लगा हुआ कूड़े का ढेर। संवाद