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Shamli News: तहसील फूंक अंग्रेजों से लिया था लोहा, शहादत के बाद तीन दिन पेड़ पर लटकाया शव
Sat, 15 Aug 2026 01:05 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 15 Aug 2026 01:05 AM IST
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स्वतंत्रता सेनानी मोहर सिंह की सहारनपुर रोड पर लगी प्रतिमा
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शामली। देश की आजादी के लिए प्राणों का बलिदान देने में शामली के वीर सपूत भी पीछे नहीं रहे हैं। इन्हीं वीरों में चौधरी मोहर सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने क्रांतिकारियों के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और शामली तहसील व रेजीडेंसी में आग लगा दी थी। आजादी के लिए लड़ते हुए वह शहीद हो गए। अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों में भय पैदा करने के लिए उनके शव को झिंझाना-करनाल रोड पर एक पेड़ से तीन दिन तक लटकाकर रखा था। आज एकता पार्क में लगी उनकी प्रतिमा युवाओं को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा दे रही है।
जमीदार के घर में जन्मे मोहर सिंह
शामली-सहारनपुर तिराहे पर स्थित एकता पार्क में स्थापित मोहर सिंह की प्रतिमा के शिलापट पर उनकी वीरता की दास्तां दर्ज है। चौधरी मोहर सिंह का जन्म शामली के जमीदार चौधरी घासीराम के यहां हुआ था। उन्होंने आजादी के आंदोलन की रणनीति मथुरा में गुरु विरजानंद की कुटिया में तैयार की थी।
फतेहपुर के जंगल में हुआ था भीषण संघर्ष
फतेहपुर के जंगल में अंग्रेजों और क्रांतिकारियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ था। इसमें 225 पुरुष और 27 महिलाएं शहीद हुई थीं। अंग्रेजों ने तोपें लगाकर शामली को चारों ओर से घेर लिया था। इस संघर्ष में थानाभवन के अब्दुल रहीम खां, सैदपुर के चौधरी भगवान सिंह, थानाभवन के चौधरी हरज्ञान सिंह, भैंसवाल के भवानी सिंह, आशा देवी, हरड़ के गेंदा सिंह, इंद्राकौर देवी, पुरबालियान के चौधरी हरपाल सिंह, शोभा देवी, परासौली के खैराती खां, शामली की मामकौर, सोरम के चौधरी लक्ष्मण सिंह, शामली की राजकौर, ढ़िकौली के शोभा सिंह समेत चौधरी मोहर सिंह भी शहीद हुए थे।
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दादा के बलिदान पर पूरे परिवार को गर्व
शहीद चौधरी मोहर सिंह के प्रपौत्र और शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी पूर्व सभासद सुरेंद्र आर्य ने बताया कि उनके दादा शहीद मोहर सिंह ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनके बलिदान को परिवार हमेशा याद रखेगा। देश के लिए उनकी कुर्बानी पर पूरे परिवार को गर्व है।
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जमीदार के घर में जन्मे मोहर सिंह
शामली-सहारनपुर तिराहे पर स्थित एकता पार्क में स्थापित मोहर सिंह की प्रतिमा के शिलापट पर उनकी वीरता की दास्तां दर्ज है। चौधरी मोहर सिंह का जन्म शामली के जमीदार चौधरी घासीराम के यहां हुआ था। उन्होंने आजादी के आंदोलन की रणनीति मथुरा में गुरु विरजानंद की कुटिया में तैयार की थी।
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फतेहपुर के जंगल में हुआ था भीषण संघर्ष
फतेहपुर के जंगल में अंग्रेजों और क्रांतिकारियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ था। इसमें 225 पुरुष और 27 महिलाएं शहीद हुई थीं। अंग्रेजों ने तोपें लगाकर शामली को चारों ओर से घेर लिया था। इस संघर्ष में थानाभवन के अब्दुल रहीम खां, सैदपुर के चौधरी भगवान सिंह, थानाभवन के चौधरी हरज्ञान सिंह, भैंसवाल के भवानी सिंह, आशा देवी, हरड़ के गेंदा सिंह, इंद्राकौर देवी, पुरबालियान के चौधरी हरपाल सिंह, शोभा देवी, परासौली के खैराती खां, शामली की मामकौर, सोरम के चौधरी लक्ष्मण सिंह, शामली की राजकौर, ढ़िकौली के शोभा सिंह समेत चौधरी मोहर सिंह भी शहीद हुए थे।
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दादा के बलिदान पर पूरे परिवार को गर्व
शहीद चौधरी मोहर सिंह के प्रपौत्र और शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी पूर्व सभासद सुरेंद्र आर्य ने बताया कि उनके दादा शहीद मोहर सिंह ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनके बलिदान को परिवार हमेशा याद रखेगा। देश के लिए उनकी कुर्बानी पर पूरे परिवार को गर्व है।