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Shamli News: हादसे ने पैर छीना, धुंधली हुई आंखें... शिवभक्ति फिर भी नहीं रुकी
Thu, 30 Jul 2026 01:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Thu, 30 Jul 2026 01:24 AM IST
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शामली में हरिद्वार से जल लेकर पहुंचे दिव्यांग विजेंद्र। संवाद
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लांक (शामली)। आस्था के आगे शारीरिक मजबूरियां भी बेबस नजर आती हैं। हरियाणा के भिवानी निवासी विजेंद्र इसकी मिसाल हैं। वर्ष 2023 में सड़क हादसे में एक पैर गंवाने और दोनों आंखों की रोशनी काफी कम हो जाने के बावजूद उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा को कमजोर नहीं होने दिया। इस बार भी वह व्हीलचेयर के सहारे हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।
विजेंद्र के अनुसार वह करीब 20 वर्षों से हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते आ रहे हैं। वर्ष 2023 में हुए सड़क हादसे में उनका एक पैर काटना पड़ा। लंबे इलाज के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और व्हीलचेयर को ही अपनी ताकत बनाकर दोबारा कांवड़ यात्रा शुरू की। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। पिछले दो वर्षों से दोनों आंखों में मोतियाबिंद होने के कारण उन्हें केवल करीब 20 प्रतिशत ही दिखाई देता है। इसके बावजूद हर साल की तरह इस बार भी वह पूरी श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। उनका कहना है कि जब तक भगवान भोलेनाथ की कृपा रहेगी, तब तक उनकी यह यात्रा नहीं रुकेगी।
विजेंद्र की आस्था से प्रेरित होकर उनकी पत्नी शारदा, पुत्र सूरज और रिश्तेदार मनजीत व अशोक भीष्म भी कांवड़ यात्रा से जुड़ गए हैं। अब पूरा परिवार अलग-अलग कांवड़ लेकर हर साल भगवान शिव का जलाभिषेक करने जाता है। बुधवार को विजेंद्र अपने परिजनों के साथ शामली स्थित हनुमान धाम पहुंचे, जहां विश्राम करने के बाद सभी श्रद्धालु अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।
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विजेंद्र के अनुसार वह करीब 20 वर्षों से हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते आ रहे हैं। वर्ष 2023 में हुए सड़क हादसे में उनका एक पैर काटना पड़ा। लंबे इलाज के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और व्हीलचेयर को ही अपनी ताकत बनाकर दोबारा कांवड़ यात्रा शुरू की। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। पिछले दो वर्षों से दोनों आंखों में मोतियाबिंद होने के कारण उन्हें केवल करीब 20 प्रतिशत ही दिखाई देता है। इसके बावजूद हर साल की तरह इस बार भी वह पूरी श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। उनका कहना है कि जब तक भगवान भोलेनाथ की कृपा रहेगी, तब तक उनकी यह यात्रा नहीं रुकेगी।
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विजेंद्र की आस्था से प्रेरित होकर उनकी पत्नी शारदा, पुत्र सूरज और रिश्तेदार मनजीत व अशोक भीष्म भी कांवड़ यात्रा से जुड़ गए हैं। अब पूरा परिवार अलग-अलग कांवड़ लेकर हर साल भगवान शिव का जलाभिषेक करने जाता है। बुधवार को विजेंद्र अपने परिजनों के साथ शामली स्थित हनुमान धाम पहुंचे, जहां विश्राम करने के बाद सभी श्रद्धालु अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।
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