{"_id":"6a665f12e91e33719b094ddc","slug":"dont-waste-time-on-faith-healing-in-the-event-of-a-snakebite-only-the-hospital-can-save-your-life-shamli-news-c-26-1-sal1002-170508-2026-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shamli News: झाड़-फूंक में न गंवाएं वक्त, सर्पदंश पर अस्पताल ही बनेगा जीवनरक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shamli News: झाड़-फूंक में न गंवाएं वक्त, सर्पदंश पर अस्पताल ही बनेगा जीवनरक्षक
Mon, 27 Jul 2026 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 27 Jul 2026 12:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। बारिश के मौसम में सर्पदंश के मामले बढ़ रहे हैं। सर्पदंश के खतरे से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी है। जिले में इस वर्ष अब तक सर्पदंश के 67 मरीज अस्पताल में पहुंचे हैं। समय पर उपचार मिलने से सभी मरीजों की जान बची है। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर सीधे अस्पताल पहुंचकर इलाज कराना चाहिए।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही सर्पदंश के मामले बढ़ने लगते हैं। बारिश के मौसम में सर्पदंश का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। जून माह में सर्पदंश के जहां 17 मामले जिला अस्पताल पहुंचे, वहीं जुलाई में 20 दिन में 27 मरीज पहुंचे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज खेत में काम करने के दौरान पैर में सांप के काटने से पीड़ित आए हैं।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार अखौरी ने बताया कि सर्पदंश पीड़ित को इधर-उधर झाड़-फूंक में समय नहीं गंवाना चाहिए। जितना जल्दी हो, उतनी जल्दी अस्पताल लेकर पहुंचना चाहिए। जिला अस्पताल सर्पदंश के उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम निशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के बचाव के लिए सतर्कता व जागरूकता जरूरी है।
विज्ञापन
इस तरह करें बचाव
बरसात के मौसम में बाहर निकलते समय जूते, मोटे कपड़े का पैंट आदि पहनें।
सांप दिखने पर पास न जाए और न ही उसे मारने की कोशिश करें, उसे बचकर जाने दें।
हलचल एवं कंपन आदि से सांप स्वयं ही दूर भागते हैं।
सर्पदंश पर घबराएं नहीं, आराम से लेट जाए और कपड़े ढीले करें
घाव के साथ छेड़छाड़ न करें। दौड़ने-भागने से जहर तेजी से शरीर में फैलता है।
सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को मदिरा, नशे की कोई चीज और कैफीनयुक्त पेय न दें।
झाड़-फूंक के बजाए पीड़ित को जल्द अस्पताल ले जाएं और चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार कराएं।
लक्षण:
सांप के जहर के असर से व्यक्ति के काटे वाले भाग के पूरे अंग में तेज दर्द होना, कम रक्तचाप, कमजोर नाड़ी, धड़कन बढ़ना, उल्टी, दस्त, खांसी, सांस लेने में दिक्कत होना, देखने में परेशानी होना, हाथ-पैर ठंडा होना, सुन्न पड़ना, पसीना आना आदि।
इस वर्ष सर्पदंश के मामले की स्थिति
माह - मामले की संख्या
जनवरी - 01
फरवरी - 02
मार्च - 08
अप्रैल - 07
मई - 05
जून - 17
जुलाई - 27
इस तरह से आए मामले
मामला एक : जिला अस्पताल में 16 जुलाई की रात करीब साढ़े आठ बजे गढ़ीपुख्ता निवासी सात वर्षीय अब्दुल हमीद को सांप ने पैर में काट लिया। उसके पिता कासिम ने बताया कि वे अपने बेटे को बिना किसी देरी के सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। समय रहते उपचार मिलने पर बच्चे की जान बच गई।
मामला दो :
17 जुलाई को गांव जसोई निवासी राशिदा को घर में ही सांप ने काट लिया था। परिजन बिना झाड़-फूंक कराए ही महिला को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सक ने एंटी स्नेक वेनम दिया गया। उपचार के बाद महिला की हालत ठीक है।
मामला तीन :
गांव इस्सोपुर टील निवासी जयपाल को 17 जुलाई को सांप ने काट लिया। परिजनों ने समय गंवाए बिना सीधे जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। इलाज के बाद वे ठीक हो गए।
विज्ञापन
गर्मी का मौसम शुरू होते ही सर्पदंश के मामले बढ़ने लगते हैं। बारिश के मौसम में सर्पदंश का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। जून माह में सर्पदंश के जहां 17 मामले जिला अस्पताल पहुंचे, वहीं जुलाई में 20 दिन में 27 मरीज पहुंचे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज खेत में काम करने के दौरान पैर में सांप के काटने से पीड़ित आए हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार अखौरी ने बताया कि सर्पदंश पीड़ित को इधर-उधर झाड़-फूंक में समय नहीं गंवाना चाहिए। जितना जल्दी हो, उतनी जल्दी अस्पताल लेकर पहुंचना चाहिए। जिला अस्पताल सर्पदंश के उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम निशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के बचाव के लिए सतर्कता व जागरूकता जरूरी है।
विज्ञापन
इस तरह करें बचाव
बरसात के मौसम में बाहर निकलते समय जूते, मोटे कपड़े का पैंट आदि पहनें।
सांप दिखने पर पास न जाए और न ही उसे मारने की कोशिश करें, उसे बचकर जाने दें।
हलचल एवं कंपन आदि से सांप स्वयं ही दूर भागते हैं।
सर्पदंश पर घबराएं नहीं, आराम से लेट जाए और कपड़े ढीले करें
घाव के साथ छेड़छाड़ न करें। दौड़ने-भागने से जहर तेजी से शरीर में फैलता है।
सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को मदिरा, नशे की कोई चीज और कैफीनयुक्त पेय न दें।
झाड़-फूंक के बजाए पीड़ित को जल्द अस्पताल ले जाएं और चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार कराएं।
लक्षण:
सांप के जहर के असर से व्यक्ति के काटे वाले भाग के पूरे अंग में तेज दर्द होना, कम रक्तचाप, कमजोर नाड़ी, धड़कन बढ़ना, उल्टी, दस्त, खांसी, सांस लेने में दिक्कत होना, देखने में परेशानी होना, हाथ-पैर ठंडा होना, सुन्न पड़ना, पसीना आना आदि।
इस वर्ष सर्पदंश के मामले की स्थिति
माह - मामले की संख्या
जनवरी - 01
फरवरी - 02
मार्च - 08
अप्रैल - 07
मई - 05
जून - 17
जुलाई - 27
इस तरह से आए मामले
मामला एक : जिला अस्पताल में 16 जुलाई की रात करीब साढ़े आठ बजे गढ़ीपुख्ता निवासी सात वर्षीय अब्दुल हमीद को सांप ने पैर में काट लिया। उसके पिता कासिम ने बताया कि वे अपने बेटे को बिना किसी देरी के सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। समय रहते उपचार मिलने पर बच्चे की जान बच गई।
मामला दो :
17 जुलाई को गांव जसोई निवासी राशिदा को घर में ही सांप ने काट लिया था। परिजन बिना झाड़-फूंक कराए ही महिला को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सक ने एंटी स्नेक वेनम दिया गया। उपचार के बाद महिला की हालत ठीक है।
मामला तीन :
गांव इस्सोपुर टील निवासी जयपाल को 17 जुलाई को सांप ने काट लिया। परिजनों ने समय गंवाए बिना सीधे जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। इलाज के बाद वे ठीक हो गए।