{"_id":"6a53e2f32a44e859f3021cd4","slug":"oh-motherland-this-is-how-we-have-loved-your-soil-shamli-news-c-26-1-sal1002-169480-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shamli News: ... ऐ वतन यूं तेरी मिट्टी से मोहब्बत की है हमने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shamli News: ... ऐ वतन यूं तेरी मिट्टी से मोहब्बत की है हमने
Mon, 13 Jul 2026 12:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 13 Jul 2026 12:24 AM IST
विज्ञापन
झिंझाना के उर्स मेले में मुशायरे में मौजूद लोग। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झिंझाना (शामली)। हजरत इमाम नसीरुद्दीन सब्जवारी शहीद के 860वें सालाना उर्स मुबारक के अवसर पर शनिवार देर रात ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन हुआ। जौहर कानपुरी के कलाम वतनपरस्ती का जज्बा पेश करते हुए कहा, ऐ वतन यूं तेरी मिट्टी से मोहब्बत की है हमने, गंगा में वजू करके इबादत की है पर जमकर दाद मिली।
मुशायरे की सदारत मोहम्मद अली ने की। नौशाद ठेकेदार और कोतवाली प्रभारी वीरेंद्र कसाना ने शायरों के साथ संयुक्त रूप से शमा रोशन की। कार्यक्रम का उद्घाटन कैराना सांसद इकरा हसन ने फीता काटकर किया। महफिल का आगाज शायर खुर्शीद हैदर ने नात-ए-पाक से किया। उन्होंने पढ़ा गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, अंबर पर तो वही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे।
मशहूर शायरा शबीना अदीब ने कहा वतन के किस्से तमाम लिखे हुए मिलेंगे, मेरे बुजुर्गों के नाम लिखे हुए मिलेंगे। कभी तिरंगे काे मन की आंखों से पढ़कर देखो, सभी शहीदों के नाम लिखे हुए मिलेंगे।
विज्ञापन
वसीम राजूपुरी ने रिश्तों की अहमियत पर कहा मुश्किल में काम आएंगे ये लोग देखना, रिश्ते न खत्म करना कभी भाइयों के साथ। मुशायरे का संचालन कर रहे रियाज सागर ने मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देते हुए पढ़ा नफरत का खेल तुझको मिटा देगा एक दिन, बेहतर है जहन से ये शरारत छोड़ दे। शायरा राधिका मित्तल ने पिता और बेटियों के रिश्ते पर भावपूर्ण कलाम सुनाते हुए कहा, मुस्कुराहट लबों पे सजाए हुए। गम छुपाता रहा बेटियों के लिए, वक्त की धूप जब भी सताने लगी। बाप साया बना बेटियों के लिए। उन्होंने आगे पढ़ा उनकी नजरों से जिस दिन उतर जाएंगे, मोतियों की तरह हम बिखर जाएंगे।
सांसद इकरा हसन ने सुनाया उनके नाम का सरमाया ही काफी था। सर पर बाप का साया ही काफी था। ये मेरी मां की दुआओं का असर है शायद, जब भी मैं डूबता हूं तो दरिया उछाल देता है। इसके अलावा नौशाद अनगढ़, इमरान, माजिद देवबंदी, बिलाल सहारनपुरी, सिकंदर हयात गड़बड़, जीशान अल्वी और वसीम कुरैशी ने भी अपने-अपने कलाम पेश कर वाहवाही लूटी।
इस अवसर पर श्रम मंत्रालय दक्षिणी दिल्ली के प्रभारी रवि कुमार खटकड़, मौलाना फरीद, हाजी वकील, साकिब फारुकी, व्यापार मंडल अध्यक्ष आशीष मित्तल, विनोद संगल, रियासत अली ताबिश, काजी शान मियां, पीरजी रईस गंगोह, मोहम्मद उमर, नासिर चौधरी मौजूद रहे। उर्स कमेटी के हाजी अमजद अली, बाबर हुसैन कुद्दूसी और सफदर अल्वी ने अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
मुशायरे की सदारत मोहम्मद अली ने की। नौशाद ठेकेदार और कोतवाली प्रभारी वीरेंद्र कसाना ने शायरों के साथ संयुक्त रूप से शमा रोशन की। कार्यक्रम का उद्घाटन कैराना सांसद इकरा हसन ने फीता काटकर किया। महफिल का आगाज शायर खुर्शीद हैदर ने नात-ए-पाक से किया। उन्होंने पढ़ा गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, अंबर पर तो वही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे।
विज्ञापन
मशहूर शायरा शबीना अदीब ने कहा वतन के किस्से तमाम लिखे हुए मिलेंगे, मेरे बुजुर्गों के नाम लिखे हुए मिलेंगे। कभी तिरंगे काे मन की आंखों से पढ़कर देखो, सभी शहीदों के नाम लिखे हुए मिलेंगे।
विज्ञापन
वसीम राजूपुरी ने रिश्तों की अहमियत पर कहा मुश्किल में काम आएंगे ये लोग देखना, रिश्ते न खत्म करना कभी भाइयों के साथ। मुशायरे का संचालन कर रहे रियाज सागर ने मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देते हुए पढ़ा नफरत का खेल तुझको मिटा देगा एक दिन, बेहतर है जहन से ये शरारत छोड़ दे। शायरा राधिका मित्तल ने पिता और बेटियों के रिश्ते पर भावपूर्ण कलाम सुनाते हुए कहा, मुस्कुराहट लबों पे सजाए हुए। गम छुपाता रहा बेटियों के लिए, वक्त की धूप जब भी सताने लगी। बाप साया बना बेटियों के लिए। उन्होंने आगे पढ़ा उनकी नजरों से जिस दिन उतर जाएंगे, मोतियों की तरह हम बिखर जाएंगे।
सांसद इकरा हसन ने सुनाया उनके नाम का सरमाया ही काफी था। सर पर बाप का साया ही काफी था। ये मेरी मां की दुआओं का असर है शायद, जब भी मैं डूबता हूं तो दरिया उछाल देता है। इसके अलावा नौशाद अनगढ़, इमरान, माजिद देवबंदी, बिलाल सहारनपुरी, सिकंदर हयात गड़बड़, जीशान अल्वी और वसीम कुरैशी ने भी अपने-अपने कलाम पेश कर वाहवाही लूटी।
इस अवसर पर श्रम मंत्रालय दक्षिणी दिल्ली के प्रभारी रवि कुमार खटकड़, मौलाना फरीद, हाजी वकील, साकिब फारुकी, व्यापार मंडल अध्यक्ष आशीष मित्तल, विनोद संगल, रियासत अली ताबिश, काजी शान मियां, पीरजी रईस गंगोह, मोहम्मद उमर, नासिर चौधरी मौजूद रहे। उर्स कमेटी के हाजी अमजद अली, बाबर हुसैन कुद्दूसी और सफदर अल्वी ने अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

झिंझाना के उर्स मेले में मुशायरे में मौजूद लोग। संवाद