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Shamli: 15-20 साल तक फर्जी कागजों पर की सरकारी नौकरी, पांच शिक्षक बर्खास्त, एक ही विवि के लगा दिए कागज
अमर उजाला नेटवर्क, शामली
Published by: Mohd Mustakim
Updated Fri, 10 Apr 2026 04:55 PM IST
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सार
जिले में पढ़ाने वाले पांच शिक्षकों ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी की डिग्रियां नौकरी पाने में लगाईं। शक के आधार पर जब जांच शुरू हुई तो ये डिग्री फर्जी पाई गईं। बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करे हुए अग्रिम जांच बैठा दी है।
बर्खास्त।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
जिले के बेसिक शिक्षा विभाग ने फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे पांच शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी है। यह कार्रवाई तब की गई जब विभाग ने इन शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के माध्यम से जांच कराई, जिसमें उनका शैक्षिक रिकॉर्ड फर्जी पाया गया।
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बीएसए लता राठौर ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय बधेव में तैनात शिक्षक किरण, भूरा के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक अरविंद कुमार, ऊन ब्लॉक में तैनात शिक्षक कपिल, शामली ब्लाक में चांदवीर व थानाभवन ब्लॉक में तैनात शशि प्रभा के शैक्षिक प्रमाण पत्र जांच के लिए सत्यापन को भेजे गए थे। इन सभी के शैक्षिक प्रमाण पत्रों पर संदेह का कारण यह रहा कि उक्त पांचों ने हाईस्कूल से लेकर इंटरमीडिएट एवं स्नातक स्तर के शैक्षिक प्रमाण पत्र एक ही संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के लगाए थे।
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इसमें किरण ने 2010 में संपूर्णानंद विश्व विद्यालय वाराणसी की उत्तर मध्यमा एवं शास्त्री की डिग्री के आधार पर नौकरी प्राप्त की है। शशि प्रभा ने पूर्वमाध्यमा, उत्तर माध्यमा शास्त्री विषय से सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की डिग्री के आधार पर 21 दिसंबर 2005 को नियुक्ति पाई थी।
कपिल कुमार ने इसी विश्वविद्यालय की डिग्रियों के आधार पर 10 फरवरी 2009 व चांदवीर ने 12 मार्च 2010 में व अरविंद कुमार ने 10 फरवरी 2009 में शिक्षा विभाग में नियुक्ति प्राप्त की थी। संबंधित विश्वविद्यालय ने इन सभी के अभिलेख जांच में फर्जी पाए गए। बीएसए ने बताया कि इस मामले में पहले शिक्षकों को नोटिस भेजा गया, लेकिन जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई।
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