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Shamli News: गन्ना पौध तैयार कर आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं, सालाना कमा रहीं लाखों
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 01 Apr 2026 12:44 AM IST
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कैराना के ऊंचा गांव में गन्ने की पौध तैयारी करती समूह की महिलाएं। समूह
- फोटो : आरोपी मौलाना मोहम्मद सालिम।
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शामली। गन्ना पौध तैयार करने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। अपने प्रयासों से ये महिलाएं न केवल अपनी जीवनशैली सुधार रही हैं, बल्कि सालाना एक से दो लाख रुपये तक का मुनाफा भी कमा रही हैं।
ऊंचा गांव की रहने वाली सुमन स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गन्ने की पौध तैयार कर रही है। नौ अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया हुआ है। सुमन सैनी के अनुसार शुरुआत में महिलाओं ने जैविक गन्ने से तैयार नर्सरी खुद ही तैयार की थी तथा सफल होने पर अब हर साल दो लाख से अधिक पौध तैयार कर शामली के अलावा मुजफ्फरनगर के किसानों को उपलब्ध करा रही है। खास बात यह है कि ये महिलाएं विभिन्न गांवों में जाकर किसानों को जैविक खाद से तैयार की गई पौध के बारे में टिप्स दे रही हैं। कृषि विभाग के अधिकारी भी इन महिलाओं को सम्मानित कर चुके हैं।
-गन्ना विभाग के सुपरवाइजर की सीख से शुरू किया था बीज तैयार करना
सुमन सैनी ने बताया कि वैसे तो वह पिछले करीब आठ साल से करीब 10 बीघा जमीन पर खेती बाड़ी कर रही थी। मगर पांच साल पहले गन्ना विभाग के सुपरवाइजर पहुंचे तथा उन्हें जैविक खाद से गन्ने की खाद तैयार करने की सलाह दी। जिस पर सुमन एनआरएलएम से जुड़ी और ट्रेनिंग ली।
महिलाएं विभिन्न गांवों में जाकर करतीं हैं जागरूक
सुमन के अलावा रीता, आसमा, रश्मि, मनीषा, रीता रानी, मोनिका, मुनेशा, कविता, अफसाना, रविता, संतलेस, विद्या, बलदेवी, कौशल, गोमती आदि किसानों को ट्रेनिंग देकर बीज तैयार करा रही है। किसान खुद भी ट्रेंड होकर जैविक खाद से तैयार बीज तैयार कर बुवाई कर रहे हैं।
बड़चिप विधि से तैयार किया जा रहा बीज
बड़ चिप विधि में सबसे पहले बड़ चिप मशीन से गन्ने का बड़ यानी आंख निकालते हैं। इसके बाद उसे उपचारित कर प्लास्टिक ट्रे के बने खानों में रखते हैं। ट्रे के खानों को वर्मी कम्पोस्ट या कोकोपिट से भरते हैं। सुमन के अनुसार ट्रे से नर्सरी पौध को सावधानी पूर्वक निकाल कर मुख्य खेत में निश्चित दूरी पर पौध का रोपण किया जाता है। इस तकनीक में किसान गन्ने के बीच में दलहनी, तिलहनी, सब्जी और नगदी फसलें आसानी से उगाकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं।
रोगमुक्त होती है फसल
कृषि वैज्ञानिक डाॅ. संदीप चौधरी और कृषि उपनिदेशक का कहना है कि रसायनिक खादों से तैयार हो रहे बीज न सिर्फ लोगों को बीमार करते हैं बल्कि मानव शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इसी के चलते सरकार द्वारा जैविक खाद्य से निर्मित बीज को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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ऊंचा गांव की रहने वाली सुमन स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गन्ने की पौध तैयार कर रही है। नौ अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया हुआ है। सुमन सैनी के अनुसार शुरुआत में महिलाओं ने जैविक गन्ने से तैयार नर्सरी खुद ही तैयार की थी तथा सफल होने पर अब हर साल दो लाख से अधिक पौध तैयार कर शामली के अलावा मुजफ्फरनगर के किसानों को उपलब्ध करा रही है। खास बात यह है कि ये महिलाएं विभिन्न गांवों में जाकर किसानों को जैविक खाद से तैयार की गई पौध के बारे में टिप्स दे रही हैं। कृषि विभाग के अधिकारी भी इन महिलाओं को सम्मानित कर चुके हैं।
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-गन्ना विभाग के सुपरवाइजर की सीख से शुरू किया था बीज तैयार करना
सुमन सैनी ने बताया कि वैसे तो वह पिछले करीब आठ साल से करीब 10 बीघा जमीन पर खेती बाड़ी कर रही थी। मगर पांच साल पहले गन्ना विभाग के सुपरवाइजर पहुंचे तथा उन्हें जैविक खाद से गन्ने की खाद तैयार करने की सलाह दी। जिस पर सुमन एनआरएलएम से जुड़ी और ट्रेनिंग ली।
महिलाएं विभिन्न गांवों में जाकर करतीं हैं जागरूक
सुमन के अलावा रीता, आसमा, रश्मि, मनीषा, रीता रानी, मोनिका, मुनेशा, कविता, अफसाना, रविता, संतलेस, विद्या, बलदेवी, कौशल, गोमती आदि किसानों को ट्रेनिंग देकर बीज तैयार करा रही है। किसान खुद भी ट्रेंड होकर जैविक खाद से तैयार बीज तैयार कर बुवाई कर रहे हैं।
बड़चिप विधि से तैयार किया जा रहा बीज
बड़ चिप विधि में सबसे पहले बड़ चिप मशीन से गन्ने का बड़ यानी आंख निकालते हैं। इसके बाद उसे उपचारित कर प्लास्टिक ट्रे के बने खानों में रखते हैं। ट्रे के खानों को वर्मी कम्पोस्ट या कोकोपिट से भरते हैं। सुमन के अनुसार ट्रे से नर्सरी पौध को सावधानी पूर्वक निकाल कर मुख्य खेत में निश्चित दूरी पर पौध का रोपण किया जाता है। इस तकनीक में किसान गन्ने के बीच में दलहनी, तिलहनी, सब्जी और नगदी फसलें आसानी से उगाकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं।
रोगमुक्त होती है फसल
कृषि वैज्ञानिक डाॅ. संदीप चौधरी और कृषि उपनिदेशक का कहना है कि रसायनिक खादों से तैयार हो रहे बीज न सिर्फ लोगों को बीमार करते हैं बल्कि मानव शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इसी के चलते सरकार द्वारा जैविक खाद्य से निर्मित बीज को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कैराना के ऊंचा गांव में गन्ने की पौध तैयारी करती समूह की महिलाएं। समूह- फोटो : आरोपी मौलाना मोहम्मद सालिम।