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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sheela Devi who had come back to life 17 hours after being declared dead has passed away

UP: माैत के बाद जिंदा हुईं शीला देवी, नाै दिन तक क्या-क्या हुआ; फिर दोबारा से हार गईं जिंदगी

Sun, 09 Aug 2026 02:40 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 09 Aug 2026 02:40 PM IST
सार

माैत के 17 घंटे बाद जीवित होने वाली शीला देवी एकबार जिंदगी से हार गईं। रविवार को उनकी अस्पताल में उपचार के दाैरान माैत हो गई। इसी के साथ मां के ठीक होने की आस लगाए बैठे की उम्मीद टूट गई। परिवार में कोहराम मच गया।

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Sheela Devi who had come back to life 17 hours after being declared dead has passed away
शीला देवी का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा में नौ दिन पहले जिस महिला को मृत समझकर परिवार अंतिम विदाई की तैयारी कर रहा था, उसकी सांसें आखिरकार रविवार सुबह थम गईं। बदायूं में 30 जुलाई को मृत घोषित की गईं शीला देवी के शरीर में अंतिम संस्कार से पहले हलचल हुई थी। दामाद ने पैर छुए तो उन्हें शरीर में हरकत महसूस हुई। इसके बाद परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए। हालत गंभीर होने पर बड़े बेटे सुनील मां को बेहतर उपचार की उम्मीद में आगरा ले आए। निजी अस्पताल में नौ दिन तक उपचार के बाद रविवार सुबह शीला देवी ने दम तोड़ दिया। मां के बचने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार में एक बार फिर मातम छा गया।
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आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र के श्री नगर कॉलोनी निवासी शीला देवी को को सांस संबंधित बीमारी थी। उनके पति हरिओम माहौर की मौत हो चुकी है। वह अपने बेटे सुनील माहौर के परिवार के साथ रहती हैं। उनका दूसरा बेटा संजीव बदांयू में एक निजी अस्पताल में कार्यरत है। शीला देवी की तबितय काफी दिन से खराब थी। उनके लीवर में दिक्कत थी। डेढ़ महीने पहले शीला देवी इलाज के लिए अपने बेटे के पास बदायूं गईं थीं। बेटे ने सोमवार को बरेली के निजी अस्पताल में शीला देवी को भर्ती कराया। मंगलवार को उन्हें वेंटीलेटर पर रख दिया गया। बुधवार, 30  जून को तड़के करीब तीन बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। 
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बेटा एंबुलेंस से शव लेकर शाम करीब 7 बजे घर पहुंचा। शव को घर के एक कमरे में जमीन पर रख दिया गया। शव को देखकर घरवाले रो रहे थे। घर में अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। फूल-माला आ गए। 17 घंटे बाद रात करीब 8 बजे 65 वर्षीय  महिला के शरीर में हलचल हुई। 
 

जब शीला देवी के दामाद ने उन्हें छुआ तो उन्होंने हाथ पकड़ लिया। शीला देवी ने कहा कि मुझे कहां ले जा रहे हो। तुम सब रो क्यों रहे हो? हम तो जिंदा हैं। मैं मरी नहीं हूं। इसके बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। बिना देर किए उन्हें तत्काल आगरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार शुरू  हुआ। परिजनों में खुशी थी। उन्हें आस थी कि शीला देवी फिर से ठीक हो जाएंगी। लेकिन रविवार को शीला की सांसें थम गईं। परिवार की आंखें फिर एकबार नम हो गईं।

 
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मां को आगरा लाकर इलाज कराने में जुटा रहा बेटा
शीला देवी के शरीर में हलचल की जानकारी मिलने के बाद बड़े बेटे सुनील ने उम्मीद नहीं छोड़ी। मां को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टर ने उपचार शुरू किया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार होगा और वह फिर से आंखें खोलेंगी। करीब नौ दिन तक उपचार चलने के बाद रविवार सुबह शीला देवी ने दम तोड़ दिया। मां की मौत की खबर से परिवार में फिर मातम पसर गया
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