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Shravasti News: चूल्हे पर भोजन पकाने के लिए मजबूर महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sat, 02 May 2026 12:39 AM IST
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महदेईया गांव में चूल्हे पर भोजन बनाती महिला।
- फोटो : महदेईया गांव में चूल्हे पर भोजन बनाती महिला।
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श्रावस्ती। तराईवासी रोज गैस किल्लत झेलने को विवश हैं। गैस एजेंसियों से भीड़ हटाने के लिए सिलिंडर की होम डिलीवरी भी फेल होती दिख रही है। मांगलिक आयोजन भी बिना सिलिंडर के ही निपट रहे हैं।
गैस सिलिंडर लोगों के दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। कुछ माह पहले ही शासन व प्रशासन लोगों को चूल्हे के धुएं से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत करता नजर आ रहा था। वहीं, अब जब लोगों ने चूल्हा छोड़कर सिलिंडर अपना लिया है तो उन्हें उसके लिए भी लाइन में लगना पड़ रहा है। फिर भी सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में महिलाओं को भोजन बनाने के लिए लकड़ी के चूल्हे का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
खनपुरवा निवासी उदयराज ने बताया कि उनके घर में मुंडन संस्कार का कार्यक्रम है, इसके लिए मात्र दो सिलिंडर ही मिले हैं। इससे उन्हें लकड़ी खरीदकर चूल्हे पर ही भोजन बनवाना पड़ रहा है। भिनगा स्थित राज इंडेन गैस एजेंसी के मैनेजर आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि तीन दिन बाद शु्क्रवार को 504 सिलिंडर का लोड पहुंचा है। इस पर 21 व 22 अप्रैल को जिन लोगों ने बुकिंग कराई थी उन्हें सिलिंडर वितरित किए गए हैं। अब जब पुन: लोड आएगा तभी सिलिंडर का वितरण हो सकेगा।
वीरपुर प्रतिनिधि के अनुसार महदेईया निवासी अन्नी देवी ने बताया कि उनके घर में वैवाहिक समारोह है, लेकिन सिलिंडर न मिलने से उन्हें चूल्हे पर ही भोजन बनाना पड़ रहा है। गिरंट बाजार प्रतिनिधि के अनुसार अथर्व गैस एजेंसी गिरंट के मैनेजर योगेंद्र कुमार यादव ने बताया कि अब मात्र 90 सिलिंडर ही स्टॉक में हैं। यह भी शनिवार तक समाप्त हो जाएगा।
गिलाैला प्रतिनिधि के अनुसार गिलौला स्थित भारत गैस एजेंसी के मैनेजर विजय कुमार ने बताया कि केवाईसी व ऑनलाइन गैस परची के लिए लोगों की भीड़ लग रही है। गैस सिलिंडर पर्याप्त है, जिसका डीएसी नंबर आता है उसे सिलिंडर दिया जाता है।
गैस सिलिंडर की बुकिंग अधिक है और कंपनियों से लोड कम आ रहा है। इससे लोगों को समस्या उठानी पड़ रही है। समस्या शीघ्र ही दूर होने की उम्मीद है। अधिकारियों से बातचीत की जा रही है।
- दीपक कुमार वार्ष्णेय, जिला पूर्ति अधिकारी
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गैस सिलिंडर लोगों के दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। कुछ माह पहले ही शासन व प्रशासन लोगों को चूल्हे के धुएं से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत करता नजर आ रहा था। वहीं, अब जब लोगों ने चूल्हा छोड़कर सिलिंडर अपना लिया है तो उन्हें उसके लिए भी लाइन में लगना पड़ रहा है। फिर भी सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में महिलाओं को भोजन बनाने के लिए लकड़ी के चूल्हे का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
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खनपुरवा निवासी उदयराज ने बताया कि उनके घर में मुंडन संस्कार का कार्यक्रम है, इसके लिए मात्र दो सिलिंडर ही मिले हैं। इससे उन्हें लकड़ी खरीदकर चूल्हे पर ही भोजन बनवाना पड़ रहा है। भिनगा स्थित राज इंडेन गैस एजेंसी के मैनेजर आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि तीन दिन बाद शु्क्रवार को 504 सिलिंडर का लोड पहुंचा है। इस पर 21 व 22 अप्रैल को जिन लोगों ने बुकिंग कराई थी उन्हें सिलिंडर वितरित किए गए हैं। अब जब पुन: लोड आएगा तभी सिलिंडर का वितरण हो सकेगा।
वीरपुर प्रतिनिधि के अनुसार महदेईया निवासी अन्नी देवी ने बताया कि उनके घर में वैवाहिक समारोह है, लेकिन सिलिंडर न मिलने से उन्हें चूल्हे पर ही भोजन बनाना पड़ रहा है। गिरंट बाजार प्रतिनिधि के अनुसार अथर्व गैस एजेंसी गिरंट के मैनेजर योगेंद्र कुमार यादव ने बताया कि अब मात्र 90 सिलिंडर ही स्टॉक में हैं। यह भी शनिवार तक समाप्त हो जाएगा।
गिलाैला प्रतिनिधि के अनुसार गिलौला स्थित भारत गैस एजेंसी के मैनेजर विजय कुमार ने बताया कि केवाईसी व ऑनलाइन गैस परची के लिए लोगों की भीड़ लग रही है। गैस सिलिंडर पर्याप्त है, जिसका डीएसी नंबर आता है उसे सिलिंडर दिया जाता है।
गैस सिलिंडर की बुकिंग अधिक है और कंपनियों से लोड कम आ रहा है। इससे लोगों को समस्या उठानी पड़ रही है। समस्या शीघ्र ही दूर होने की उम्मीद है। अधिकारियों से बातचीत की जा रही है।
- दीपक कुमार वार्ष्णेय, जिला पूर्ति अधिकारी
