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Siddharthnagar News: गायब पिलरों के बीच सीमा पर हलचल तेज, 16 जून को द्विपक्षीय बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 14 Jun 2026 01:24 AM IST
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गायब पिलरों के बीच सीमा प्रबंधन पर मंथन, 16 जून को अहम बैठक
तराई में बदलते भूगोल और क्षतिग्रस्त पिलर बने सीमांकन की बड़ी चुनौती
सीमा स्तंभों की पहचान, मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए नेपाल-भारत संयुक्त फील्ड सर्वे टीमें सक्रिय
वीरेंद्र पांडेय
सिद्धार्थनगर। इंडो-नेपाल सरहद को लेकर उठे विमर्श के बीच दोनों देशों ने समन्वय बनाकर टूटे पिलर और पोस्ट की मरम्मत करके सीमारेखा तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस संयुक्त सर्वे की रूपरेखा तय करने के लिए सिद्धार्थनगर में 16 जून को दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें सीमा निर्धारण और सीमांकन की रूपरेखा तय करके के साथ ही जिले से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के भूगोल, सीमा स्तंभों की स्थिति और संयुक्त सर्वे की कार्ययोजना पर भी सहमति बनाने की कोशिश होगी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार संयुक्त सर्वे का उद्देश्य सीमा स्तंभों की स्थिति का सत्यापन, क्षतिग्रस्त या गायब पिलरों की पहचान और सीमा क्षेत्र से जुड़े भूगोल की वर्तमान स्थिति का आकलन करना है। सर्वे के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और सीमांकन संबंधी प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने बैठक के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को नामित किया है। भारतीय पक्ष की ओर से राजस्व, सर्वे और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में नेपाल के कपिलवस्तु जिले के अधिकारियों और सीमा से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। बैठक में संयुक्त सर्वे की कार्यप्रणाली, सर्वे टीमों की भूमिका और फील्ड स्तर पर किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा होगी। कपिलवस्तु, रूपन्देही, नवलपरासी, बांके और बर्दिया से सटी उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच सीमा के लिए भी सर्वे होना है।
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नेपाल में हाल के दिनों में सीमा प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक सक्रियता दोनों बढ़ी हैं। संसद/संविधानसभा में प्रधानमंत्री के बयान से सीमा को लेकर नई बहस शुरू हुई थी, जिसके बाद विदेश मंत्री की ओर से जानकारी दी गई कि नेपाल-भारत बॉर्डर मैनेजमेंट पर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्लूजी) की बैठक अगस्त 2026 में प्रस्तावित है। साथ ही सीमा स्तंभों की पहचान, मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए चार संयुक्त फील्ड सर्वे टीमें विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
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कुल सीमा स्तंभ : 8,553
वर्ष 2016 में जीएनएसएस आधारित मैपिंग का निर्णय
गायब बताए गए पिलर : 1,325
क्षतिग्रस्त पिलर : 1,956
जिम्मेदार एजेंसी : नेपाल-भारत बाउंड्री वर्किंग ग्रुप
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दशगजा में लगे 65 चाय के पौधे हटाए गए, बॉर्डर पिलरों पर नेपाल-भारत की बैठक
कपिलवस्तु। नेपाल-भारत सीमा पर क्षतिग्रस्त और कमजोर पड़े बॉर्डर पिलरों के रखरखाव तथा सीमा प्रबंधन को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच झापा जिले के बिरतामोड़ में शनिवार को फील्ड सर्वे बैठक संपन्न हुई। पूर्वी नेपाल में नदी के कटाव और बहाव से कई सीमा स्तंभ प्रभावित हुए हैं, जिनकी मरम्मत और संरक्षण पर चर्चा की गई। इसके बाद नेपाल और भारत के सुरक्षाकर्मियों ने संयुक्त सीमा गश्त के दौरान झापा के कचनकवल-5 स्थित पाठामारी क्षेत्र में दशगजा के भीतर लगाए गए करीब 60 से 65 चाय के पौधे उखाड़ दिए। अधिकारियों के अनुसार सीमा क्षेत्र की यथास्थिति बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई।
बैठक में सीमा क्षेत्र की सुरक्षा, शांति, समन्वय और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने पर सहमति बनी। सर्वे विभाग की ओर से आयोजित बैठक में झापा, इलाम, पांचथर और ताप्लेजुंग के प्रशासनिक, पुलिस, सर्वे और वन विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान दशगजा क्षेत्र में अतिक्रमण का मुद्दा भी उठा।
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16 जून को होने वाली बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच सीमा स्तंभों की स्थिति, उनके पुनर्स्थापन और संयुक्त सर्वे की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके लिए संबंधित विभागों को नामित कर दिया गया है और प्रक्रिया को समन्वित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
- शिवशरणप्पा जीएन, जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर
तराई में बदलते भूगोल और क्षतिग्रस्त पिलर बने सीमांकन की बड़ी चुनौती
सीमा स्तंभों की पहचान, मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए नेपाल-भारत संयुक्त फील्ड सर्वे टीमें सक्रिय
वीरेंद्र पांडेय
सिद्धार्थनगर। इंडो-नेपाल सरहद को लेकर उठे विमर्श के बीच दोनों देशों ने समन्वय बनाकर टूटे पिलर और पोस्ट की मरम्मत करके सीमारेखा तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस संयुक्त सर्वे की रूपरेखा तय करने के लिए सिद्धार्थनगर में 16 जून को दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें सीमा निर्धारण और सीमांकन की रूपरेखा तय करके के साथ ही जिले से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के भूगोल, सीमा स्तंभों की स्थिति और संयुक्त सर्वे की कार्ययोजना पर भी सहमति बनाने की कोशिश होगी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार संयुक्त सर्वे का उद्देश्य सीमा स्तंभों की स्थिति का सत्यापन, क्षतिग्रस्त या गायब पिलरों की पहचान और सीमा क्षेत्र से जुड़े भूगोल की वर्तमान स्थिति का आकलन करना है। सर्वे के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और सीमांकन संबंधी प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
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डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने बैठक के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को नामित किया है। भारतीय पक्ष की ओर से राजस्व, सर्वे और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में नेपाल के कपिलवस्तु जिले के अधिकारियों और सीमा से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। बैठक में संयुक्त सर्वे की कार्यप्रणाली, सर्वे टीमों की भूमिका और फील्ड स्तर पर किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा होगी। कपिलवस्तु, रूपन्देही, नवलपरासी, बांके और बर्दिया से सटी उत्तर प्रदेश की सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच सीमा के लिए भी सर्वे होना है।
नेपाल में हाल के दिनों में सीमा प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक सक्रियता दोनों बढ़ी हैं। संसद/संविधानसभा में प्रधानमंत्री के बयान से सीमा को लेकर नई बहस शुरू हुई थी, जिसके बाद विदेश मंत्री की ओर से जानकारी दी गई कि नेपाल-भारत बॉर्डर मैनेजमेंट पर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्लूजी) की बैठक अगस्त 2026 में प्रस्तावित है। साथ ही सीमा स्तंभों की पहचान, मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए चार संयुक्त फील्ड सर्वे टीमें विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
कुल सीमा स्तंभ : 8,553
वर्ष 2016 में जीएनएसएस आधारित मैपिंग का निर्णय
गायब बताए गए पिलर : 1,325
क्षतिग्रस्त पिलर : 1,956
जिम्मेदार एजेंसी : नेपाल-भारत बाउंड्री वर्किंग ग्रुप
दशगजा में लगे 65 चाय के पौधे हटाए गए, बॉर्डर पिलरों पर नेपाल-भारत की बैठक
कपिलवस्तु। नेपाल-भारत सीमा पर क्षतिग्रस्त और कमजोर पड़े बॉर्डर पिलरों के रखरखाव तथा सीमा प्रबंधन को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच झापा जिले के बिरतामोड़ में शनिवार को फील्ड सर्वे बैठक संपन्न हुई। पूर्वी नेपाल में नदी के कटाव और बहाव से कई सीमा स्तंभ प्रभावित हुए हैं, जिनकी मरम्मत और संरक्षण पर चर्चा की गई। इसके बाद नेपाल और भारत के सुरक्षाकर्मियों ने संयुक्त सीमा गश्त के दौरान झापा के कचनकवल-5 स्थित पाठामारी क्षेत्र में दशगजा के भीतर लगाए गए करीब 60 से 65 चाय के पौधे उखाड़ दिए। अधिकारियों के अनुसार सीमा क्षेत्र की यथास्थिति बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई।
बैठक में सीमा क्षेत्र की सुरक्षा, शांति, समन्वय और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने पर सहमति बनी। सर्वे विभाग की ओर से आयोजित बैठक में झापा, इलाम, पांचथर और ताप्लेजुंग के प्रशासनिक, पुलिस, सर्वे और वन विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान दशगजा क्षेत्र में अतिक्रमण का मुद्दा भी उठा।
16 जून को होने वाली बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच सीमा स्तंभों की स्थिति, उनके पुनर्स्थापन और संयुक्त सर्वे की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके लिए संबंधित विभागों को नामित कर दिया गया है और प्रक्रिया को समन्वित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
- शिवशरणप्पा जीएन, जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर