{"_id":"69c4297f89ddcabdcf0251ad","slug":"kanungos-and-accountants-received-training-on-crop-cutting-experiments-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-155571-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: क्रॉप कटिंग प्रयोग पर कानूनगो और लेखपालों को मिला प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: क्रॉप कटिंग प्रयोग पर कानूनगो और लेखपालों को मिला प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 25 Mar 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
डुमरियागंज तहसील सभागार में उपस्थित कनूनगो व लेखपालों को फसलों की क्रॉप कटिंग की जानकारी देते न
- फोटो : सांकेतिक
विज्ञापन
शाहपुर। डुमरियागंज तहसील सभागार में बुधवार को कृषि सांख्यिकी एवं फसल उत्पादन के सटीक आंकलन को लेकर कानूनगो एवं लेखपालों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता नायब तहसीलदार विष्णु प्रसाद सिंह ने की।
प्रशिक्षण के दौरान नायब तहसीलदार ने क्रॉप कटिंग प्रयोग की प्रक्रिया, उद्देश्य और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह प्रयोग फसलों के वास्तविक उत्पादन का वैज्ञानिक आकलन करने का प्रमुख माध्यम है, जिससे किसानों से जुड़ी योजनाओं का सही लाभ सुनिश्चित किया जाता है। सहायक सांख्यिकी अधिकारी अजय चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि क्रॉप कटिंग प्रयोग के तहत खेत में खड़ी फसल के एक निर्धारित क्षेत्र को चिह्नित कर उसकी कटाई कराई जाती है। इसके बाद प्राप्त उपज के आधार पर प्रति हेक्टेयर उत्पादन का अनुमान लगाया जाता है। यही आंकड़े जिले और प्रदेश की औसत पैदावार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो कृषि नीतियों के निर्माण में सहायक होते हैं। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि प्रयोग के दौरान खेत का सही स्थान, फसल की स्थिति, कटाई की तिथि, संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर एवं फोटो आदि का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
इस दौरान अंजनी नंदन शरण, लालकृष्ण श्रीवास्तव, महेश चंद्र, राजेश श्रीवास्तव, मो. फारुक, हरिशंकर, इंद्रराज आदि मौजूद रहे।
Trending Videos
प्रशिक्षण के दौरान नायब तहसीलदार ने क्रॉप कटिंग प्रयोग की प्रक्रिया, उद्देश्य और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह प्रयोग फसलों के वास्तविक उत्पादन का वैज्ञानिक आकलन करने का प्रमुख माध्यम है, जिससे किसानों से जुड़ी योजनाओं का सही लाभ सुनिश्चित किया जाता है। सहायक सांख्यिकी अधिकारी अजय चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि क्रॉप कटिंग प्रयोग के तहत खेत में खड़ी फसल के एक निर्धारित क्षेत्र को चिह्नित कर उसकी कटाई कराई जाती है। इसके बाद प्राप्त उपज के आधार पर प्रति हेक्टेयर उत्पादन का अनुमान लगाया जाता है। यही आंकड़े जिले और प्रदेश की औसत पैदावार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो कृषि नीतियों के निर्माण में सहायक होते हैं। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि प्रयोग के दौरान खेत का सही स्थान, फसल की स्थिति, कटाई की तिथि, संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर एवं फोटो आदि का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस दौरान अंजनी नंदन शरण, लालकृष्ण श्रीवास्तव, महेश चंद्र, राजेश श्रीवास्तव, मो. फारुक, हरिशंकर, इंद्रराज आदि मौजूद रहे।