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Siddharthnagar News: सीटें तप रहीं, छत उगल रही आग, सफर में छूट रहा पसीना
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 22 Jun 2026 02:27 AM IST
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उमस और भीषण गर्मी से यात्रियों का हाल बेहाल, बसों और ऑटो में सफर बना चुनौती
सिद्धार्थनगर। भीषण गर्मी और बढ़ी उमस ने लोगों का सफर मुश्किल कर दिया है। सुबह से ही तेज धूप और चिपचिपी गर्मी के बीच बसों और ऑटो में यात्रा करना यात्रियों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है। बसों की सीटें और छतें गर्म होकर तपने लगी हैं जबकि ऑटो और ई-रिक्शा में चल रही गर्म हवाएं यात्रियों को झुलसा रही हैं। घर से गंतव्य तक पहुंचने के दौरान लोगों का पसीना थमने का नाम नहीं ले रहा है।
जिले के नौगढ़, डुमरियागंज, बांसी, इटवा और शोहरतगढ़ मार्गों पर चलने वाली रोडवेज और निजी बसों में दोपहर के समय सबसे अधिक परेशानी देखने को मिल रही है। बसों के अंदर उमस के कारण यात्रियों का बैठना मुश्किल हो रहा है। कई बसों में पंखे नाममात्र की राहत दे पा रहे हैं, जबकि खिड़कियों से आने वाली हवा भी गर्म थपेड़ों जैसी महसूस हो रही है।
डुमरियागंज बस स्टेशन पर गोरखपुर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे यात्री रमेश यादव ने बताया कि बस में बैठते ही शरीर पसीने से भीग जाता है। रास्ते भर न तो ठंडी हवा मिलती है और न ही उमस से राहत। वहीं बांसी की सीमा देवी ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए सफर और भी कठिन हो गया है। थोड़ी देर में ही बेचैनी बढ़ने लगती है।
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ऑटो और ई-रिक्शा में सफर कर रहे यात्रियों की हालत भी कुछ अलग नहीं है। सड़क की गर्म सतह से उठ रही तपिश और सामने से आ रही लू के थपेड़े सफर को और कठिन बना रहे हैं। नौगढ़ के ऑटो चालक मुन्ना ने बताया कि दोपहर में सवारी तो मिलती है लेकिन गर्मी के कारण लोग परेशान रहते हैं। कई यात्री बीच रास्ते में पानी पीने या छांव में रुकने को मजबूर हो जाते हैं।
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जैसे-तैसे पूरी कर रहे पानी की कमी
- उमस और गर्मी का असर बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। बस स्टैंडों और प्रमुख बाजारों में ठंडे पानी, शिकंजी, जूस, ग्लूकोज और ओआरएस की बिक्री बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ठंडे पेय पदार्थों की मांग में काफी इजाफा हुआ है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. गौरव दुबे का कहना है कि अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीना, सिर को ढककर रखना और आवश्यक होने पर ही दोपहर में बाहर निकलना चाहिए।
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ऐसे दिखा गर्मी का असर
- बसों की सीटें और छत दोपहर में तपने लगीं
- ऑटो और ई-रिक्शा में लू के थपेड़ों से बढ़ी परेशानी
- यात्रियों के हाथों में दिखीं पानी की बोतलें और गमछे
- बस स्टैंडों पर छांव और ठंडे पानी के स्थानों पर भीड़
- बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत
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गर्मी में सफर के दौरान बरतें सावधानी
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें
- ओआरएस या ग्लूकोज का सेवन करें
- सिर पर गमछा, टोपी या छाता रखें
- खाली पेट यात्रा करने से बचें
- चक्कर, घबराहट या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत छांव में आराम करें
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ऐसा दिखा सफर का हाल
- बसों की छत और सीटें दोपहर में तवे जैसी गर्म महसूस हुईं।
- खिड़कियों से आने वाली हवा भी गर्म थपेड़ों में बदल गई।
- ऑटो और ई-रिक्शा में सीधे लू लगने से यात्री बेहाल दिखे।
- बस स्टैंडों पर छांव और ठंडे पानी के पास सबसे अधिक भीड़ रही।
- यात्रियों के हाथ में पानी की बोतल और गमछा आम दृश्य रहा।
सिद्धार्थनगर। भीषण गर्मी और बढ़ी उमस ने लोगों का सफर मुश्किल कर दिया है। सुबह से ही तेज धूप और चिपचिपी गर्मी के बीच बसों और ऑटो में यात्रा करना यात्रियों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है। बसों की सीटें और छतें गर्म होकर तपने लगी हैं जबकि ऑटो और ई-रिक्शा में चल रही गर्म हवाएं यात्रियों को झुलसा रही हैं। घर से गंतव्य तक पहुंचने के दौरान लोगों का पसीना थमने का नाम नहीं ले रहा है।
जिले के नौगढ़, डुमरियागंज, बांसी, इटवा और शोहरतगढ़ मार्गों पर चलने वाली रोडवेज और निजी बसों में दोपहर के समय सबसे अधिक परेशानी देखने को मिल रही है। बसों के अंदर उमस के कारण यात्रियों का बैठना मुश्किल हो रहा है। कई बसों में पंखे नाममात्र की राहत दे पा रहे हैं, जबकि खिड़कियों से आने वाली हवा भी गर्म थपेड़ों जैसी महसूस हो रही है।
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डुमरियागंज बस स्टेशन पर गोरखपुर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे यात्री रमेश यादव ने बताया कि बस में बैठते ही शरीर पसीने से भीग जाता है। रास्ते भर न तो ठंडी हवा मिलती है और न ही उमस से राहत। वहीं बांसी की सीमा देवी ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए सफर और भी कठिन हो गया है। थोड़ी देर में ही बेचैनी बढ़ने लगती है।
ऑटो और ई-रिक्शा में सफर कर रहे यात्रियों की हालत भी कुछ अलग नहीं है। सड़क की गर्म सतह से उठ रही तपिश और सामने से आ रही लू के थपेड़े सफर को और कठिन बना रहे हैं। नौगढ़ के ऑटो चालक मुन्ना ने बताया कि दोपहर में सवारी तो मिलती है लेकिन गर्मी के कारण लोग परेशान रहते हैं। कई यात्री बीच रास्ते में पानी पीने या छांव में रुकने को मजबूर हो जाते हैं।
जैसे-तैसे पूरी कर रहे पानी की कमी
- उमस और गर्मी का असर बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। बस स्टैंडों और प्रमुख बाजारों में ठंडे पानी, शिकंजी, जूस, ग्लूकोज और ओआरएस की बिक्री बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ठंडे पेय पदार्थों की मांग में काफी इजाफा हुआ है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. गौरव दुबे का कहना है कि अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीना, सिर को ढककर रखना और आवश्यक होने पर ही दोपहर में बाहर निकलना चाहिए।
ऐसे दिखा गर्मी का असर
- बसों की सीटें और छत दोपहर में तपने लगीं
- ऑटो और ई-रिक्शा में लू के थपेड़ों से बढ़ी परेशानी
- यात्रियों के हाथों में दिखीं पानी की बोतलें और गमछे
- बस स्टैंडों पर छांव और ठंडे पानी के स्थानों पर भीड़
- बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत
गर्मी में सफर के दौरान बरतें सावधानी
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें
- ओआरएस या ग्लूकोज का सेवन करें
- सिर पर गमछा, टोपी या छाता रखें
- खाली पेट यात्रा करने से बचें
- चक्कर, घबराहट या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत छांव में आराम करें
ऐसा दिखा सफर का हाल
- बसों की छत और सीटें दोपहर में तवे जैसी गर्म महसूस हुईं।
- खिड़कियों से आने वाली हवा भी गर्म थपेड़ों में बदल गई।
- ऑटो और ई-रिक्शा में सीधे लू लगने से यात्री बेहाल दिखे।
- बस स्टैंडों पर छांव और ठंडे पानी के पास सबसे अधिक भीड़ रही।
- यात्रियों के हाथ में पानी की बोतल और गमछा आम दृश्य रहा।