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Siddharthnagar News: सोशल मीडिया स्टेटस बना अलर्ट, आत्महत्या करने वाले शिक्षक को पुलिस ने बचाया
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 18 May 2026 02:34 AM IST
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सिद्धार्थनगर। सोशल मीडिया पर खेसरहा थाना क्षेत्र के पर्रोई गांव निवासी शिक्षक रमेश उपाध्याय की आत्महत्या करने के स्टेटस ने एक परिवार की सांसें रोक दीं, लेकिन वहीं डिजिटल अलर्ट शिक्षक की जान बचाने की वजह भी बन गई। सोशल मीडिया का सकारात्मक पहलू, जिंदगी से मुंह मोड़ने वाले शिक्षक को दोबारा जीवन देने के लिए पुलिस को दूत बनाकर भेजा।
वहीं, उम्मीद छोड़ चुके परिवार के लोगों के जान में जान तब आई, जब पुलिस ने स्टेटस को पढ़ा और लोकेशन ट्रेस करके अचेत हाल में पड़े शिक्षक को अस्पताल पहुंचाया। इससे पहले भी पुलिस ने सोशल मीडिया पर विवाद का स्टेटस और मेटा से मिले लोकेशन के जरिये एक युवती को आत्महत्या करने से पहले ही बचा लिया। सोशल मीडिया के जानकारों का कहना है कि यह एक सकारात्मक पहलु है जिसे बड़ी अनहोनी से बचा लिया गया।
साइबर एक्सपर्ट और मानसिक रोग विशेषज्ञ लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर डाले गए भावनात्मक या निराशा भरे पोस्ट को मजाक या सामान्य प्रतिक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार व्यक्ति सीधे मदद नहीं मांग पाता, लेकिन उसके डिजिटल व्यवहार से मानसिक स्थिति का संकेत मिल जाता है।
तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण के साथ ही हर हाथ में स्मार्टफोन है। हर कोई ऑनलाइन खरीदारी और पेमेंट के साथ ही सोशल मीडिया का घंटों-घंटों लोग प्रयोग कर रहे हैं। इस प्रयोग को घातक भी बताया जा रहा है। क्योंकि, एक पोस्ट देखते ही देखते ही आग की तरफ से फैल जा रहा है। इसका सकारात्मक कम नाकारात्मक प्रभाव अधिक पड़ रहा है। लेकिन, सोशल मीडिया के हर पोस्ट पर न सिर्फ पुलिस की नजर है और जांच एजेंसी की नजर है।
बल्कि, इन एप को संचालित करने वाली एजेंसी की भी नजर रहती है। जरुरत पड़ने पर जिसका डाटा सीधे पुलिस मुख्यालय इसके बाद संबंधित जनपद और उसके संबंधित थाने को पहुंचा जाता है। कुछ ऐसा ही एक मामला जनपद में सामने आया। सोशल मीडिया के स्टेटस ही एक व्यक्ति की जिंदगी को बचा दिया है। आत्महत्या करने के लिए घातक कदम उठा चुके व्यक्ति ने पहले ही माफी मांगते हुए स्टेटस डाला, उसमें कई बार लिखा कि ‘हमें माफ कर दो’ जैसे हिला देने वाले शब्द ने परिवार को झकझोर दिया।
उम्मीद छोड़ चुके परिवार ने आत्महत्या संबंधी स्टेटस को पहले परिचितों ने देखा, फिर इसकी सूचना परिवार और पुलिस तक पहुंची। मामला गंभीर होने पर पुलिस ने तत्काल मोबाइल लोकेशन, सोशल मीडिया एक्टिविटी और डिजिटल ट्रेसिंग के जरिये शिक्षक की तलाश शुरू की। तय लोकेशल पर पहुंची और अचेत हाल में पड़े निजी विद्यालय के पीड़ित इस शिक्षक को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां इलाज के बाद जान बची।
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पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर ढूढ़ निकाला
खेसरहा थाना क्षेत्र के पर्रोई गांव निवासी रमेश उपाध्याय राम प्यारी देवी इंटर कॉलेज कलनाखोर में शिक्षक हैं। शनिवार सुबह उन्होंने मोबाइल स्टेटस पर आत्महत्या से संबंधित एक पोस्ट साझा किया, जिसे देखकर परिजन व परिचित सदमे में आ गए। काफी देर तक संपर्क न होने पर परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन पता नहीं चल सका। इसके बाद मामले की सूचना खेसरहा पुलिस को दी गई। पुलिस ने तत्काल सर्विलांस और अन्य टेक्निकल की मदद से खोजबीन शुरू की। काफी प्रयास के बाद रमेश उपाध्याय कलनाखोर और बिशुनपरवा गांव के बीच एक नाले के किनारे झाड़ियों में बेहोशी की हालत में मिले। पुलिस ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला मेडिकल कॉलेज भिजवाया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
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दो साल पहले युवती ने की थी आत्महत्या की कोशिश
कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के अलीगढ़वा बॉर्डर के पास लगभग दो साल पहले एक मामला सामने आया था। उसने फेसबुक पेज पर आत्महत्या करने की धमकी भरा पोस्ट शेयर कर दिया। पहले जानने वाले और परिवार को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस सक्रिय हुई और ट्रेस करते हुए एक बाग तक पहुंची। इसके बाद उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने कोई वजह तो नहीं बताया, लेकिन कहां कि पेड़ की डाल से लटकने की तैयारी में थी। पुलिस ने समझा-बुझाकर परिवार को सौंप दिया था।
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बोले विशेषज्ञ
लगातार तनाव, अकेलापन, आर्थिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं का बोझ लोगों को मानसिक रूप से तोड़ रहा है। ऐसे समय में परिवार, दोस्त और सहकर्मियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। यदि कोई व्यक्ति अचानक निराशाजनक बातें करने लगे, खुद को अकेला करने लगे या सोशल मीडिया पर नकारात्मक पोस्ट डालने लगे तो तुरंत संवाद स्थापित करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। - अनीता, मनोविज्ञानी
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सोशल मीडिया पर कोई भी पोस्ट पूरी तरह निजी नहीं होती। गलत, भ्रामक या आपत्तिजनक पोस्ट पर पुलिस नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी करती है। वहीं, संवेदनशील मामलों में यही डिजिटल नेटवर्क लोगों की जिंदगी बचाने का जरिया भी बन सकता है। मेटा ऐसी पोस्ट पर नजर रखता है। तत्काल पुलिस मुख्यालय और फिर संबंधित थाने को अलर्ट भेजता है। जिससे होने वाली घटनाओं को समय रहते पुलिस रोक लेती है।
- दिलीप कुमार द्विवेदी, साइबर एक्सपर्ट, साइबर थाना सिद्धार्थनगर
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वहीं, उम्मीद छोड़ चुके परिवार के लोगों के जान में जान तब आई, जब पुलिस ने स्टेटस को पढ़ा और लोकेशन ट्रेस करके अचेत हाल में पड़े शिक्षक को अस्पताल पहुंचाया। इससे पहले भी पुलिस ने सोशल मीडिया पर विवाद का स्टेटस और मेटा से मिले लोकेशन के जरिये एक युवती को आत्महत्या करने से पहले ही बचा लिया। सोशल मीडिया के जानकारों का कहना है कि यह एक सकारात्मक पहलु है जिसे बड़ी अनहोनी से बचा लिया गया।
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साइबर एक्सपर्ट और मानसिक रोग विशेषज्ञ लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर डाले गए भावनात्मक या निराशा भरे पोस्ट को मजाक या सामान्य प्रतिक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार व्यक्ति सीधे मदद नहीं मांग पाता, लेकिन उसके डिजिटल व्यवहार से मानसिक स्थिति का संकेत मिल जाता है।
तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण के साथ ही हर हाथ में स्मार्टफोन है। हर कोई ऑनलाइन खरीदारी और पेमेंट के साथ ही सोशल मीडिया का घंटों-घंटों लोग प्रयोग कर रहे हैं। इस प्रयोग को घातक भी बताया जा रहा है। क्योंकि, एक पोस्ट देखते ही देखते ही आग की तरफ से फैल जा रहा है। इसका सकारात्मक कम नाकारात्मक प्रभाव अधिक पड़ रहा है। लेकिन, सोशल मीडिया के हर पोस्ट पर न सिर्फ पुलिस की नजर है और जांच एजेंसी की नजर है।
बल्कि, इन एप को संचालित करने वाली एजेंसी की भी नजर रहती है। जरुरत पड़ने पर जिसका डाटा सीधे पुलिस मुख्यालय इसके बाद संबंधित जनपद और उसके संबंधित थाने को पहुंचा जाता है। कुछ ऐसा ही एक मामला जनपद में सामने आया। सोशल मीडिया के स्टेटस ही एक व्यक्ति की जिंदगी को बचा दिया है। आत्महत्या करने के लिए घातक कदम उठा चुके व्यक्ति ने पहले ही माफी मांगते हुए स्टेटस डाला, उसमें कई बार लिखा कि ‘हमें माफ कर दो’ जैसे हिला देने वाले शब्द ने परिवार को झकझोर दिया।
उम्मीद छोड़ चुके परिवार ने आत्महत्या संबंधी स्टेटस को पहले परिचितों ने देखा, फिर इसकी सूचना परिवार और पुलिस तक पहुंची। मामला गंभीर होने पर पुलिस ने तत्काल मोबाइल लोकेशन, सोशल मीडिया एक्टिविटी और डिजिटल ट्रेसिंग के जरिये शिक्षक की तलाश शुरू की। तय लोकेशल पर पहुंची और अचेत हाल में पड़े निजी विद्यालय के पीड़ित इस शिक्षक को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां इलाज के बाद जान बची।
पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर ढूढ़ निकाला
खेसरहा थाना क्षेत्र के पर्रोई गांव निवासी रमेश उपाध्याय राम प्यारी देवी इंटर कॉलेज कलनाखोर में शिक्षक हैं। शनिवार सुबह उन्होंने मोबाइल स्टेटस पर आत्महत्या से संबंधित एक पोस्ट साझा किया, जिसे देखकर परिजन व परिचित सदमे में आ गए। काफी देर तक संपर्क न होने पर परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन पता नहीं चल सका। इसके बाद मामले की सूचना खेसरहा पुलिस को दी गई। पुलिस ने तत्काल सर्विलांस और अन्य टेक्निकल की मदद से खोजबीन शुरू की। काफी प्रयास के बाद रमेश उपाध्याय कलनाखोर और बिशुनपरवा गांव के बीच एक नाले के किनारे झाड़ियों में बेहोशी की हालत में मिले। पुलिस ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला मेडिकल कॉलेज भिजवाया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
दो साल पहले युवती ने की थी आत्महत्या की कोशिश
कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के अलीगढ़वा बॉर्डर के पास लगभग दो साल पहले एक मामला सामने आया था। उसने फेसबुक पेज पर आत्महत्या करने की धमकी भरा पोस्ट शेयर कर दिया। पहले जानने वाले और परिवार को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस सक्रिय हुई और ट्रेस करते हुए एक बाग तक पहुंची। इसके बाद उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने कोई वजह तो नहीं बताया, लेकिन कहां कि पेड़ की डाल से लटकने की तैयारी में थी। पुलिस ने समझा-बुझाकर परिवार को सौंप दिया था।
बोले विशेषज्ञ
लगातार तनाव, अकेलापन, आर्थिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं का बोझ लोगों को मानसिक रूप से तोड़ रहा है। ऐसे समय में परिवार, दोस्त और सहकर्मियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। यदि कोई व्यक्ति अचानक निराशाजनक बातें करने लगे, खुद को अकेला करने लगे या सोशल मीडिया पर नकारात्मक पोस्ट डालने लगे तो तुरंत संवाद स्थापित करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। - अनीता, मनोविज्ञानी
सोशल मीडिया पर कोई भी पोस्ट पूरी तरह निजी नहीं होती। गलत, भ्रामक या आपत्तिजनक पोस्ट पर पुलिस नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी करती है। वहीं, संवेदनशील मामलों में यही डिजिटल नेटवर्क लोगों की जिंदगी बचाने का जरिया भी बन सकता है। मेटा ऐसी पोस्ट पर नजर रखता है। तत्काल पुलिस मुख्यालय और फिर संबंधित थाने को अलर्ट भेजता है। जिससे होने वाली घटनाओं को समय रहते पुलिस रोक लेती है।
- दिलीप कुमार द्विवेदी, साइबर एक्सपर्ट, साइबर थाना सिद्धार्थनगर