{"_id":"69dbd6928afa5cedf80af2f3","slug":"the-post-mortem-was-not-conducted-and-the-secret-of-the-death-of-two-innocent-children-was-buried-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1035-156489-2026-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: पोस्टमार्टम हुआ नहीं, दफन हो गया दो मासूमों की मौत का राज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: पोस्टमार्टम हुआ नहीं, दफन हो गया दो मासूमों की मौत का राज
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 12 Apr 2026 10:59 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। मोहाना थाना क्षेत्र के बगही में खाने के बाद मां के साथ तीन बच्चों का बीमार होना और फिर दो मासूमों की मौत एक दर्दनाक पहेली बन गई है। मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
घर में बनी केले की सब्जी, दाल-चावल और रोटी, सच में जहर बन गई या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है, इसे लेकर गांव में कई तरह की बातें की जा रही हैं। परिवार के लोग भी सदमे में हैं, मगर बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार कराए जाने से वजह से पर्दा नहीं उठ पाया है।
बगही गांव का यह परिवार अब गहरे सदमे में है। दरवाजे पर बैठे मासूमों के बाबा सविता नंदन पांडेय के पास सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। सबसे वह यही कहकर रोने लगते हैं कि वही खाना पूरा परिवार खाया था। घर का आंगन जो बच्चों के शोर से गुलजार रहता था, वहां अब सन्नाटा पसरा है। सऊदी अरब में काम करने वाले आलोक पांडेय के परिवार पर आई आपदा से परिवार टूट गया है। घर पर रहने वाले उनके पिता बताते हैं कि बहू रंजना पांडेय ने सुबह सामान्य दिनों की तरह ही खाना बनाया। केले की सब्जी, चावल-दाल और रोटी बनी थी। सुबह बच्चों को वही खाना खिलाकर स्कूल भेजा गया। उस समय किसी को अंदेशा नहीं था कि यही खाना शाम तक इस तरह जानलेवा बन जाएगा।
शाम करीब चार बजे बच्चे स्कूल से लौटे और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ फिर से वही भोजन किया। खाना खाने के कुछ ही देर बाद अचानक घर का माहौल बदल गया। पहले प्राची (8) और श्रद्धा (4) को उल्टी-दस्त शुरू हुए, फिर दो वर्षीय ओम और मां रंजना भी उसी हालत में आ गए।
घबराए परिजन उन्हें दूल्हा चौराहा के एक निजी चिकित्सक के पास ले गए, लेकिन हालत बिगड़ता देख उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था। रास्ते में ही प्राची और ओम ने दम तोड़ दिया।
यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर श्रद्धा और रंजना का इलाज हुआ और उनकी हालत सुधरने पर उन्हें घर भेज दिया गया।
एसओ जितेंद्र सिंह के अनुसार परिवार के लोगों से पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया। किसी तरह का प्रार्थनापत्र भी नहीं दिया गया है। बावजूद इसके पुलिस जानकारी जुटा रही है।
Trending Videos
घर में बनी केले की सब्जी, दाल-चावल और रोटी, सच में जहर बन गई या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है, इसे लेकर गांव में कई तरह की बातें की जा रही हैं। परिवार के लोग भी सदमे में हैं, मगर बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार कराए जाने से वजह से पर्दा नहीं उठ पाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बगही गांव का यह परिवार अब गहरे सदमे में है। दरवाजे पर बैठे मासूमों के बाबा सविता नंदन पांडेय के पास सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। सबसे वह यही कहकर रोने लगते हैं कि वही खाना पूरा परिवार खाया था। घर का आंगन जो बच्चों के शोर से गुलजार रहता था, वहां अब सन्नाटा पसरा है। सऊदी अरब में काम करने वाले आलोक पांडेय के परिवार पर आई आपदा से परिवार टूट गया है। घर पर रहने वाले उनके पिता बताते हैं कि बहू रंजना पांडेय ने सुबह सामान्य दिनों की तरह ही खाना बनाया। केले की सब्जी, चावल-दाल और रोटी बनी थी। सुबह बच्चों को वही खाना खिलाकर स्कूल भेजा गया। उस समय किसी को अंदेशा नहीं था कि यही खाना शाम तक इस तरह जानलेवा बन जाएगा।
शाम करीब चार बजे बच्चे स्कूल से लौटे और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ फिर से वही भोजन किया। खाना खाने के कुछ ही देर बाद अचानक घर का माहौल बदल गया। पहले प्राची (8) और श्रद्धा (4) को उल्टी-दस्त शुरू हुए, फिर दो वर्षीय ओम और मां रंजना भी उसी हालत में आ गए।
घबराए परिजन उन्हें दूल्हा चौराहा के एक निजी चिकित्सक के पास ले गए, लेकिन हालत बिगड़ता देख उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था। रास्ते में ही प्राची और ओम ने दम तोड़ दिया।
यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर श्रद्धा और रंजना का इलाज हुआ और उनकी हालत सुधरने पर उन्हें घर भेज दिया गया।
एसओ जितेंद्र सिंह के अनुसार परिवार के लोगों से पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया। किसी तरह का प्रार्थनापत्र भी नहीं दिया गया है। बावजूद इसके पुलिस जानकारी जुटा रही है।