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Sitapur News: रसुलवा से हटाकर सिसेंडी में लगाया पिंजरा, महोली में भी आ गया बाघ
Sun, 19 Jul 2026 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 19 Jul 2026 12:05 AM IST
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संदना क्षेत्र में कॉम्बिंग करती वन विभाग की टीम। संवाद
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संदना/महोली। संदना में उपरहितापुर गांव के पास शनिवार को बाघ के ताजा पगचिह्न मिले हैं। वन विभाग का सर्च ऑपरेशन लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। ड्रोन कैमरों से बाघ को तलाशने की कवायद भी फिलहाल बेनतीजा रही। वन विभाग ने रसुलवा से पिंजरा हटाकर सिसेंडी में लगाया है। वहीं, महोली में अमिरता गांव के पास भी बाघ के पगचिह्न मिले हैं। जिले में दो बाघों की चहलकदमी से दहशत बढ़ गई है।
संदना क्षेत्र में किसान कमल किशोर की बाघ के हमले में मौत के चौथे दिन भी वन विभाग का अभियान किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। वन विभाग की टीमें शनिवार को दिनभर कॉम्बिंग के बावजूद बाघ का पता लगाने में नाकाम रही। इस बीच उपरहितापुर के पास बाघ के ताजा पगचिह्न मिले। वन विभाग ने उस क्षेत्र में भी सर्च ऑपरेशन चलाया। वन विभाग ने बाघ की तलाश के लिए जिले की सभी सातों रेंज से एक-एक टीम गठित की है। इनमें से प्रतिदिन एक टीम मौके पर पहुंचकर पूरे दिन बाघ की लोकेशन ट्रैक करने में जुटी है। इसके अलावा मिश्रिख रेंज से तीन विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें प्रत्येक टीम में सात सदस्य तैनात हैं। इन तीनों टीमों की आठ-आठ घंटे की शिफ्ट निर्धारित की गई है, जिससे 24 घंटे कमांड सेंटर से बाघ की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व से आए वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. दीपक अपनी टीम के साथ ट्रेंकुलाइज करने के लिए कमांड सेंटर में डेरा डाले हैं। उनके साथ टाइगर ट्रैकर चेतन कुमार भी बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं। जिस स्थान पर किसान पर हमला हुआ था, वहां लगाए गए पिंजरे में बकरी बांधी गई है। फाॅरेस्टर अनिल यादव ने बताया कि दो दिन से बाघ के पगचिह्न कभी गेंधारिया, कभी रसूलवा तो कभी उपरहितापुर गांव के आसपास मिल रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि बाघ लगातार इसी इलाके में टहल रहा है, लेकिन उसकी सटीक लोकेशन नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि गेंधारिया गांव के पास एक और पिंजरा लगाया गया है। वहीं, मंडल स्तर से भी एक विशेष टीम गठित कर दी गई है, जो जल्द अभियान में शामिल होगी।
विद्यालय में पहुंचे सिर्फ नौ बच्चे
बाघ की दहशत का सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों के दैनिक जीवन और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शनिवार को उच्च प्राथमिक विद्यालय रसुलवा में कुल नौ छात्र ही उपस्थित हुए। बीईओ सिमी निगार ने बताया कि शिक्षक प्रतिदिन गांव-गांव जाकर अभिभावकों को बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कई बार शिक्षक स्वयं बच्चों को अपने साथ विद्यालय लाते हैं और छुट्टी के बाद सुरक्षित घर भी छोड़ते हैं। वहीं, वन विभाग की टीमें लगातार ग्रामीणों को जागरूक कर रही हैं। बचाव संबंधी पंपलेट भी वितरित किए जा रहे हैं।
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महोली में 10 माह बाद फिर बाघ की दहशत
महोली के अमिरता गांव निवासी विनीत मिश्र शुक्रवार शाम अपने खेत में मूंगफली की फसल देखने गए थे। विनीत के मुताबिक वहां उन्होंने जंगली जानवर के पगचिह्न देखे। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पगचिह्नों के आधार पर इलाके में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है। कठिना नदी के कछार में पांच वर्ष से बाघों के कुनबे की मौजूदगी से क्षेत्र के लोगों में भय व्याप्त है। अगस्त 2025 में नरनी निवासी सौरभ दीक्षित को बाघ ने निवाला बनाया था। इसके बाद वन विभाग ने सितंबर में एक मादा व एक नर तथा अक्तूबर में बाघ के एक शावक को रेस्क्यू कर पकड़ा था। करीब 10 माह बाद एक बार फिर से बाघ की आमद से किसान व ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। अभी गन्ने के खेतों में खाद डालने का समय है। बाघ की आमद से धान की रोपाई बाधित होगी। साथ ही मजदूर, किसान मवेशियों के लिए चारा लाने से कतरा रहे हैं। महोली रेंजर कल्पेश्वर नाथ भार्गव ने बताया कि अमिरता गांव में कठिना नदी से कुछ दूर बाघ के पगचिह्न मिले हैं। ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
सिसेंडी लगाया गया पिंजरा, जारी है तलाश
पहले रसुलवा में पिंजरा लगाया था। कॉम्बिंग के दौरान उस स्थान से पांच किलोमीटर दूर सिसेंडी में बाघ के पगचिह्न मिले। इस वजह से अब सिसेंडी में पिंजरा लगाया गया है। ट्रैप कैमरे व दो ड्रोन की मदद से बाघ को तलाशा जा रहा है।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ
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संदना क्षेत्र में किसान कमल किशोर की बाघ के हमले में मौत के चौथे दिन भी वन विभाग का अभियान किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। वन विभाग की टीमें शनिवार को दिनभर कॉम्बिंग के बावजूद बाघ का पता लगाने में नाकाम रही। इस बीच उपरहितापुर के पास बाघ के ताजा पगचिह्न मिले। वन विभाग ने उस क्षेत्र में भी सर्च ऑपरेशन चलाया। वन विभाग ने बाघ की तलाश के लिए जिले की सभी सातों रेंज से एक-एक टीम गठित की है। इनमें से प्रतिदिन एक टीम मौके पर पहुंचकर पूरे दिन बाघ की लोकेशन ट्रैक करने में जुटी है। इसके अलावा मिश्रिख रेंज से तीन विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें प्रत्येक टीम में सात सदस्य तैनात हैं। इन तीनों टीमों की आठ-आठ घंटे की शिफ्ट निर्धारित की गई है, जिससे 24 घंटे कमांड सेंटर से बाघ की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व से आए वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. दीपक अपनी टीम के साथ ट्रेंकुलाइज करने के लिए कमांड सेंटर में डेरा डाले हैं। उनके साथ टाइगर ट्रैकर चेतन कुमार भी बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं। जिस स्थान पर किसान पर हमला हुआ था, वहां लगाए गए पिंजरे में बकरी बांधी गई है। फाॅरेस्टर अनिल यादव ने बताया कि दो दिन से बाघ के पगचिह्न कभी गेंधारिया, कभी रसूलवा तो कभी उपरहितापुर गांव के आसपास मिल रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि बाघ लगातार इसी इलाके में टहल रहा है, लेकिन उसकी सटीक लोकेशन नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि गेंधारिया गांव के पास एक और पिंजरा लगाया गया है। वहीं, मंडल स्तर से भी एक विशेष टीम गठित कर दी गई है, जो जल्द अभियान में शामिल होगी।
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विद्यालय में पहुंचे सिर्फ नौ बच्चे
बाघ की दहशत का सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों के दैनिक जीवन और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शनिवार को उच्च प्राथमिक विद्यालय रसुलवा में कुल नौ छात्र ही उपस्थित हुए। बीईओ सिमी निगार ने बताया कि शिक्षक प्रतिदिन गांव-गांव जाकर अभिभावकों को बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कई बार शिक्षक स्वयं बच्चों को अपने साथ विद्यालय लाते हैं और छुट्टी के बाद सुरक्षित घर भी छोड़ते हैं। वहीं, वन विभाग की टीमें लगातार ग्रामीणों को जागरूक कर रही हैं। बचाव संबंधी पंपलेट भी वितरित किए जा रहे हैं।
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महोली में 10 माह बाद फिर बाघ की दहशत
महोली के अमिरता गांव निवासी विनीत मिश्र शुक्रवार शाम अपने खेत में मूंगफली की फसल देखने गए थे। विनीत के मुताबिक वहां उन्होंने जंगली जानवर के पगचिह्न देखे। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पगचिह्नों के आधार पर इलाके में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है। कठिना नदी के कछार में पांच वर्ष से बाघों के कुनबे की मौजूदगी से क्षेत्र के लोगों में भय व्याप्त है। अगस्त 2025 में नरनी निवासी सौरभ दीक्षित को बाघ ने निवाला बनाया था। इसके बाद वन विभाग ने सितंबर में एक मादा व एक नर तथा अक्तूबर में बाघ के एक शावक को रेस्क्यू कर पकड़ा था। करीब 10 माह बाद एक बार फिर से बाघ की आमद से किसान व ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। अभी गन्ने के खेतों में खाद डालने का समय है। बाघ की आमद से धान की रोपाई बाधित होगी। साथ ही मजदूर, किसान मवेशियों के लिए चारा लाने से कतरा रहे हैं। महोली रेंजर कल्पेश्वर नाथ भार्गव ने बताया कि अमिरता गांव में कठिना नदी से कुछ दूर बाघ के पगचिह्न मिले हैं। ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
सिसेंडी लगाया गया पिंजरा, जारी है तलाश
पहले रसुलवा में पिंजरा लगाया था। कॉम्बिंग के दौरान उस स्थान से पांच किलोमीटर दूर सिसेंडी में बाघ के पगचिह्न मिले। इस वजह से अब सिसेंडी में पिंजरा लगाया गया है। ट्रैप कैमरे व दो ड्रोन की मदद से बाघ को तलाशा जा रहा है।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ