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Sitapur News: गलत रिपोर्ट देने पर डायग्नोस्टिक सेंटर पर 67 हजार का जुर्माना
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सीतापुर। शहर में तैनात रहे उपजिलाधिकारी कुमार चंद्रबाबू ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर गलत रिपोर्ट तैयार करने के मामले में उपभोक्ता आयोग में परिवाद दर्ज कराया। इस मामले में आयोग ने फैसला सुनाते हुए डायग्नोस्टिक सेंटर पर 67 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कुछ इसी तरीके से कलेक्ट्रेट स्थित न्यायालय उपभोक्ता परिवाद प्रतितोष आयोग पीड़ितों के दर्द पर मरहम लगा रहा है।
विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर हम आपको ऐसे ही कुछ उपभोक्ताओं की कहानी से रूबरू करा रहे हैं, जिनके साथ सेवा प्रदाता ने धोखाधड़ी की। इस पर उपभोक्ताओं ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कर न्याय की मांग की। उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई करते हुए फैसले सुनाकर पीड़ित उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाई। आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव ने बताया कि आयोग में कुल 925 परिवादों की सुनवाई जारी है। शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर पंद्रह वादों का समाधान कराया गया। वहीं, कुछ अहम फैसले भी लिए गए हैं।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव ने बताया कि एसडीएम कुमार चंद्रबाबू के परिवाद का फैसला आम जनमानस में उपभोक्ता आयोग के प्रति आस्था को मजबूत करेगा। इस केस में एसडीएम कुमार चंद्रबाबू ने 15 जून 2024 को परिवाद संख्या 94/ 2024 दायर किया था। पीड़ित एसडीएम के अनुसार उन्होंने एक गंभीर ऑपरेशन कराया था। उसका घाव सही नही हो रहा था। उन्होंने चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने टीबी गोल्ड की जांच कराने को कहा। इस पर सीतापुर के सीआरएल डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच के लिए संपर्क किया। सेंटर से आए शिवम पांडेय नामक शख्स ने 9 दिसंबर 2023 को उनका ब्लड सैंपल लिया। इसके एवज में उनसे तीन हजार रुपये लिये गये। 11 दिसंबर 2023 को उन्हें डायग्नोस्टिक सेंटर की चिकित्सक डॉ चारू अरोड़ा द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट मिली।
यह रिपोर्ट उन्होंने अपने चिकित्सक को दिखाई तो उन्होंने रिपोर्ट के आधार पर दवाइयां दे दीं। इन दवाइयों के सेवन से पीड़ित एसडीएम के शरीर को नुकसान होने लगा। यह बात अपने चिकित्सक को बताई तो उन्होंने किसी अन्य डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच कराने की सलाह दी। दूसरे डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच कराने पर आई रिपोर्ट पूर्व की जांच रिपोर्ट से काफी अलग निकली। बाद में कई अन्य पैथोलॉजी से जांच करवाई तो पता चला कि उन्हें टीबी गोल्ड की बीमारी ही नहीं है। इसके बाद पीड़ित एसडीएम ने सीआरएल सेंटर में पूरे मामले की शिकायत की। इस पर सीआरएल सेंटर में उनकी दोबारा जांच हुई। इस बार रिपोर्ट पॉजिटिव दे दी। इसके बाद पीड़ित एसडीएम ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनके परिवाद को आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव, सदस्य विभा तिवारी और देवकांत त्रिपाठी ने सुना। इसके बाद आयोग ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर शारीरिक व मानसिक क्षति के लिए पचास हजार रुपये वाद दाखिल करने की तिथि से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दो माह में अदा करने का निर्णय सुनाया। (संवाद)
क्षतिग्रस्त वाहन का क्लेम देने में की आनाकानी, लगा जुर्माना
सिधौली निवासी हिमांशु जैन ने अपनी कार का इंश्योरेंस चोला मंडलम कंपनी से कराया था। वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर कंपनी ने क्लेम रिक्वेस्ट को रिजेक्ट कर दिया था। इस पर पीड़ित हिमांशु जैन ने उपभोक्ता आयोग में 26 जुलाई 2024 को परिवाद दर्ज कराया था। इसकी सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के जनरल मैनेजर और मुख्य प्रबंधक पर जुर्माना लगाया। आयोग ने कंपनी को पीड़त पक्ष को सर्वेयर द्वारा तय धनराशि एक लाख बीस हजार दो रुपये का भुगतान वाद दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दो महीने में अदा करने का आदेश दिया। साथ ही परिवादी की शारीरिक व मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय दस हजार रुपये भी अदा करने का निर्णय सुनाया।
ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं वाद, मिलेगा न्याय
पीड़ित उपभोक्ता अपने अधिकारों के उल्लंघन पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के उपभोक्ता आयोग में अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। वह दोषपूर्ण उत्पाद, सेवा के खिलाफ मरम्मत, प्रतिस्थापन, धनवापसी या मुआवजे की मांग कर सकते हैं। उन्हें ई जागृति पोर्टल पर जाकर साक्ष्य सहित अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करानी होगी। आयोग इस मामले में प्रतिवादी को नोटिस भेजेगा। इससे आगे की कार्यवाही के लिए पीड़ित को आयोग के कार्यालय में आकर दस्तावेज दाखिल करने होंगे। हर हाल में न्याय मिलेगा।
- अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव, अध्यक्ष, न्यायालय उपभोक्ता परिवाद प्रतितोष आयोग
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विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर हम आपको ऐसे ही कुछ उपभोक्ताओं की कहानी से रूबरू करा रहे हैं, जिनके साथ सेवा प्रदाता ने धोखाधड़ी की। इस पर उपभोक्ताओं ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कर न्याय की मांग की। उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई करते हुए फैसले सुनाकर पीड़ित उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाई। आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव ने बताया कि आयोग में कुल 925 परिवादों की सुनवाई जारी है। शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौते के आधार पर पंद्रह वादों का समाधान कराया गया। वहीं, कुछ अहम फैसले भी लिए गए हैं।
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उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव ने बताया कि एसडीएम कुमार चंद्रबाबू के परिवाद का फैसला आम जनमानस में उपभोक्ता आयोग के प्रति आस्था को मजबूत करेगा। इस केस में एसडीएम कुमार चंद्रबाबू ने 15 जून 2024 को परिवाद संख्या 94/ 2024 दायर किया था। पीड़ित एसडीएम के अनुसार उन्होंने एक गंभीर ऑपरेशन कराया था। उसका घाव सही नही हो रहा था। उन्होंने चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने टीबी गोल्ड की जांच कराने को कहा। इस पर सीतापुर के सीआरएल डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच के लिए संपर्क किया। सेंटर से आए शिवम पांडेय नामक शख्स ने 9 दिसंबर 2023 को उनका ब्लड सैंपल लिया। इसके एवज में उनसे तीन हजार रुपये लिये गये। 11 दिसंबर 2023 को उन्हें डायग्नोस्टिक सेंटर की चिकित्सक डॉ चारू अरोड़ा द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट मिली।
यह रिपोर्ट उन्होंने अपने चिकित्सक को दिखाई तो उन्होंने रिपोर्ट के आधार पर दवाइयां दे दीं। इन दवाइयों के सेवन से पीड़ित एसडीएम के शरीर को नुकसान होने लगा। यह बात अपने चिकित्सक को बताई तो उन्होंने किसी अन्य डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच कराने की सलाह दी। दूसरे डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच कराने पर आई रिपोर्ट पूर्व की जांच रिपोर्ट से काफी अलग निकली। बाद में कई अन्य पैथोलॉजी से जांच करवाई तो पता चला कि उन्हें टीबी गोल्ड की बीमारी ही नहीं है। इसके बाद पीड़ित एसडीएम ने सीआरएल सेंटर में पूरे मामले की शिकायत की। इस पर सीआरएल सेंटर में उनकी दोबारा जांच हुई। इस बार रिपोर्ट पॉजिटिव दे दी। इसके बाद पीड़ित एसडीएम ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनके परिवाद को आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव, सदस्य विभा तिवारी और देवकांत त्रिपाठी ने सुना। इसके बाद आयोग ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर शारीरिक व मानसिक क्षति के लिए पचास हजार रुपये वाद दाखिल करने की तिथि से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दो माह में अदा करने का निर्णय सुनाया। (संवाद)
क्षतिग्रस्त वाहन का क्लेम देने में की आनाकानी, लगा जुर्माना
सिधौली निवासी हिमांशु जैन ने अपनी कार का इंश्योरेंस चोला मंडलम कंपनी से कराया था। वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर कंपनी ने क्लेम रिक्वेस्ट को रिजेक्ट कर दिया था। इस पर पीड़ित हिमांशु जैन ने उपभोक्ता आयोग में 26 जुलाई 2024 को परिवाद दर्ज कराया था। इसकी सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के जनरल मैनेजर और मुख्य प्रबंधक पर जुर्माना लगाया। आयोग ने कंपनी को पीड़त पक्ष को सर्वेयर द्वारा तय धनराशि एक लाख बीस हजार दो रुपये का भुगतान वाद दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दो महीने में अदा करने का आदेश दिया। साथ ही परिवादी की शारीरिक व मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय दस हजार रुपये भी अदा करने का निर्णय सुनाया।
ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं वाद, मिलेगा न्याय
पीड़ित उपभोक्ता अपने अधिकारों के उल्लंघन पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के उपभोक्ता आयोग में अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। वह दोषपूर्ण उत्पाद, सेवा के खिलाफ मरम्मत, प्रतिस्थापन, धनवापसी या मुआवजे की मांग कर सकते हैं। उन्हें ई जागृति पोर्टल पर जाकर साक्ष्य सहित अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करानी होगी। आयोग इस मामले में प्रतिवादी को नोटिस भेजेगा। इससे आगे की कार्यवाही के लिए पीड़ित को आयोग के कार्यालय में आकर दस्तावेज दाखिल करने होंगे। हर हाल में न्याय मिलेगा।
- अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव, अध्यक्ष, न्यायालय उपभोक्ता परिवाद प्रतितोष आयोग