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Sitapur News: कांग्रेस कार्यालय पर बेदखली का संकट, राहत अर्जी खारिज
Tue, 18 Aug 2026 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:47 PM IST
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कांग्रेस कार्यालय
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लखनऊ/सीतापुर। शहर के घंटाघर के ऊपरी हिस्से में स्थित कांग्रेस जिला कमेटी कार्यालय को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नगर पालिका परिषद सीतापुर के बेदखली आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। कांग्रेस की अंतरिम राहत की अर्जी खारिज कर दी गई। मामले की अगली सुनवाई एक अक्तूबर को होगी।
मामला तामसेनगंज स्थित प्लॉट संख्या 244/1 से जुड़ा है। नगर पालिका की जांच में यह जमीन सरकारी नजूल की पाई गई थी। कांग्रेस जिला कमेटी का दावा है कि वह 1971 से यहां कार्यालय चला रही है। पालिका ने कार्यालय के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मांगे थे। इसके जवाब में कांग्रेस की ओर से छह फरवरी 1971 की 320 रुपये की रसीद प्रस्तुत की गई।
पालिका के अनुसार जांच में सामने आया कि करीब 55 साल से इस संपत्ति का किराया नहीं दिया गया। इसके बाद पालिका ने बेदखली का आदेश जारी किया। कांग्रेस ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और अंतरिम राहत की मांग की थी। सुनवाई के दौरान नगर पालिका और राज्य सरकार की ओर से अवैध कब्जे का विरोध किया गया। अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से संपत्ति पर अधिकार साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने अंतरिम राहत की अर्जी खारिज कर दी।
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अदालत ने मामले में सरकार से जवाब भी मांगा है। अब अगली सुनवाई एक अक्तूबर को होगी।
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मामला तामसेनगंज स्थित प्लॉट संख्या 244/1 से जुड़ा है। नगर पालिका की जांच में यह जमीन सरकारी नजूल की पाई गई थी। कांग्रेस जिला कमेटी का दावा है कि वह 1971 से यहां कार्यालय चला रही है। पालिका ने कार्यालय के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मांगे थे। इसके जवाब में कांग्रेस की ओर से छह फरवरी 1971 की 320 रुपये की रसीद प्रस्तुत की गई।
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पालिका के अनुसार जांच में सामने आया कि करीब 55 साल से इस संपत्ति का किराया नहीं दिया गया। इसके बाद पालिका ने बेदखली का आदेश जारी किया। कांग्रेस ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और अंतरिम राहत की मांग की थी। सुनवाई के दौरान नगर पालिका और राज्य सरकार की ओर से अवैध कब्जे का विरोध किया गया। अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से संपत्ति पर अधिकार साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने अंतरिम राहत की अर्जी खारिज कर दी।
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अदालत ने मामले में सरकार से जवाब भी मांगा है। अब अगली सुनवाई एक अक्तूबर को होगी।