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Sitapur News: सिलिंडर की किल्लत से छूटा रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 30 Mar 2026 12:51 AM IST
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सिलिंडर लेने पहुंचे लोग।
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सकरन। रसोई गैस की किल्लत से मजदूर दूसरे शहर से रोजगार छोड़कर घर लाैटने को मजबूर हैं। मजदूरों का कहना है कि काम होने के बावजूद गैस की कमी ने मुश्किलें खड़ी कर दीं थी। खाना बनाने के लिए गैस न मिलने से भूखे रहने की नौबत आ गई थी। बड़े शहरों में गैस की कीमत 350 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।
सकरन के दुबियनपुरवा निवासी संजय गौतम लखनऊ में राजगीर (मकान बनाने वाला मिस्त्री) थे। किराये के कमरे में रहकर खुद खाना बनाते थे। संजय ने बताया कि पहले उन्हें गैस 100 रुपये किलो में आसानी से मिल जाती थी, जिससे कम खर्चे में खाना बन जाता था। मगर 10 मार्च से गैस मिलना बंद हो गई।
चोरी छिपे कुछ जगहों पर अगर मिलती भी तो 350 रुपये किलो से ज्यादा कीमती देनी पड़ती थीं। आधे से अधिक मजदूरी खाने में ही चली जाती थी, इसलिए काम छोड़कर घर आ गए हैं। यहां कम पैसे में मजदूरी कर किसी तरह परिवार का खर्च चला लेंगे।
सकरन के रोज अली अमेठी में ईंट-भट्ठे पर परिवार सहित रहकर मजदूरी करते थे। गैस न मिलने से वह भी अपने घर वापस आ गए। ताजपुर सलोली निवासी कांशीराम, तीरथ राम, प्रमोद समेत करीब 10 लोग लखनऊ में बाउंड्रीवाॅल बनाते थे। सभी किराये के कमरे में रहकर खुद खाना बनाते थे। गैस संकट की वजह से घर आ गए हैं।
पुताई करने वाले जानकीनगर निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि पहले आसानी से गैस मिल जाती थी तो हम लोग कमरे में ही खाना बना लेते थे।
गैस की दिक्कत के चलते खाना बनाने में परेशानी होती थी। मकान मालिक हीटर या इंडक्शन पर खाना बनाने नहीं देते थे इसलिए काम छोड़कर आना पड़ा। इसके अलावा लखनऊ, दिल्ली, हरियाणा आदि जगहों पर काम कर रहे मजदूर घर आने लगे हैं।
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सकरन के दुबियनपुरवा निवासी संजय गौतम लखनऊ में राजगीर (मकान बनाने वाला मिस्त्री) थे। किराये के कमरे में रहकर खुद खाना बनाते थे। संजय ने बताया कि पहले उन्हें गैस 100 रुपये किलो में आसानी से मिल जाती थी, जिससे कम खर्चे में खाना बन जाता था। मगर 10 मार्च से गैस मिलना बंद हो गई।
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चोरी छिपे कुछ जगहों पर अगर मिलती भी तो 350 रुपये किलो से ज्यादा कीमती देनी पड़ती थीं। आधे से अधिक मजदूरी खाने में ही चली जाती थी, इसलिए काम छोड़कर घर आ गए हैं। यहां कम पैसे में मजदूरी कर किसी तरह परिवार का खर्च चला लेंगे।
सकरन के रोज अली अमेठी में ईंट-भट्ठे पर परिवार सहित रहकर मजदूरी करते थे। गैस न मिलने से वह भी अपने घर वापस आ गए। ताजपुर सलोली निवासी कांशीराम, तीरथ राम, प्रमोद समेत करीब 10 लोग लखनऊ में बाउंड्रीवाॅल बनाते थे। सभी किराये के कमरे में रहकर खुद खाना बनाते थे। गैस संकट की वजह से घर आ गए हैं।
पुताई करने वाले जानकीनगर निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि पहले आसानी से गैस मिल जाती थी तो हम लोग कमरे में ही खाना बना लेते थे।
गैस की दिक्कत के चलते खाना बनाने में परेशानी होती थी। मकान मालिक हीटर या इंडक्शन पर खाना बनाने नहीं देते थे इसलिए काम छोड़कर आना पड़ा। इसके अलावा लखनऊ, दिल्ली, हरियाणा आदि जगहों पर काम कर रहे मजदूर घर आने लगे हैं।