{"_id":"6ade5577b830ea71b500b2e4","slug":"new-impetus-for-rug-traders-path-to-exports-opens-up-sitapur-news-c-102-1-stp1002-166468-2026-10-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: दरी कारोबारियों को मिली नई ऊर्जा, निर्यात की खुली राह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: दरी कारोबारियों को मिली नई ऊर्जा, निर्यात की खुली राह
Mon, 26 Oct 2026 12:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 26 Oct 2026 12:46 AM IST
विज्ञापन
सीतापुर। जिले में आयोजित दो दिवसीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन से दरी कारोबारियों को नई ऊर्जा मिली है। इसके माध्यम से स्थानीय कारोबारियों को सीधे बड़े खरीदारों से जुड़ने का मौका मिला। इनमें जापान व जर्मनी समेत नौ देशों के उद्यमी शामिल रहे। देश के आठ राज्यों से आए कारोबारियों ने भी इसमें हिस्सेदारी कर सकारात्मक रुख दिखाया है।
बिसवां के दरी कारोबारी रईसुल हसन ने बताया कि सम्मेलन के पहले दिन ही काउंटरों पर उम्मीद से बढ़कर ग्राहक आए। जिससे मौजूद करीब 50 फीसदी स्टॉक बिक गया। विदेशियों को भी सैंपल पसंद आए हैं। इस आयोजन के जरिए बड़े खरीदारों से सीधे संवाद का अवसर मिला। लहरपुर के जियाउल अंसारी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि नौ देशों से आए उद्यमियों ने कई तरह की दरियों में रुचि दिखाई है। भारतीय कारोबारियों को भी हस्तनिर्मित दरियों ने खूब लुभाया है। खैराबाद के स्टॉलियन होम फैशन के शिवम मिश्रा ने बताया कि सीतापुर में पहली बार इस तरह का आयोजन हुआ है। दरी उद्योग के लिए यह अच्छी पहल है।
सम्मेलन में दूसरे दिन मिश्रिख सांसद अशोक रावत, नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु व भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल ने पहुंचकर स्टॉलों का निरीक्षण किया। डीएम डॉ. राजा गणपति आर व सीडीओ डॉ. दीक्षा जोशी ने स्टॉलों पर क्रमवार पहुंचकर दरी कारोबारियों से आयोजन के संबंध में फीडबैक लिया।
विज्ञापन
बच्चों ने समझी दरी बुनाई की बारीकी
सम्मेलन में दरी बनाए जाने का लाइव डेमो दिखाने के लिए दो विशेष स्टॉल भी लगाए गए। रविवार को कई विद्यालयों के बच्चों ने इस विशेष स्टॉल पर दरी बुनने की बारीकियों को देखा व समझा। दरी बुनाई का काम करीब से देखकर बच्चे उत्साहित दिखाई दिए। अंजलि शर्मा ने बताया कि इस तरह के सम्मेलन से सीतापुर की पहचान देश-विदेश तक बनती है। जिला प्रशासन की बेहतर पहल है। हमने यहां एक हैंडबैग खरीदा है। वहीं, पूजा तिवारी ने बताया कि यहां हस्तनिर्मित वस्तुएं काफी आकर्षक हैं। सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को विभिन्न स्टॉलों पर स्थानीय लोगों की खासी भीड़ नजर आई। सभी ने अपनी पसंद के मुताबिक जमकर खरीदारी भी की। कोई अपनी पसंद के हैंडबैग, कुशन तो कोई दरी खरीदता दिखाई दिया।
साधो बैंड की प्रस्तुति ने किया मंत्रमुग्ध
सम्मेलन में शनिवार शाम साधो बैंड की संगीतमय प्रस्तुति से विदेशी मेहमान मंत्रमुग्ध नजर आए। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति और संगीत की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को उत्साह एवं उमंग से भर दिया। समापन पर जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने साधो बैंड के सभी कलाकारों एवं सदस्यों को सम्मानित किया।
दरी पर उकेरा अशोक लाट व सत्यमेव जयते
सीतापुर। दरी पर बेहद बारीकी से उकेरा गया राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ''सत्यमेव जयते'' और उसके नीचे बना अशोक स्तंभ देख क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में पहुंचे उद्यमियों ने कारीगर के हुनर को खुलकर सराहा। इस खास डिजाइन की दरी ने खूब सुर्खियां बटोरी। कई विदेशी मेहमानों व स्थानीय नागरिकों ने इसे खरीदने की जिज्ञासा भी दिखाई, लेकिन इसे बनाने वाले बुनकर ने दरी को बेचने से इंकार कर दिया। दरी को बनाने वाले बुनकर जलील अंसारी ने बताया कि यह खास दरी नेशनल अवॉर्ड के लिए भेजने को बनाई गई है। इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती। इसमें खर्च की गई मेहनत की खुशी सम्मान पाने पर ही मिलेगी। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में अपने हुनर को प्रदर्शित करने आए जलील ने बताया कि कॉटन के धागे से इस दरी को बुना है। दूर से देखने पर वह प्रिंट जैसा लगता है, लेकिन पास आने पर हाथ की कारीगरी का पता चलता है। जलील को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उसके इस हुनर को वास्तविक सम्मान दिलाने का प्रयास जरूर करेगा। (संवाद)
विज्ञापन
बिसवां के दरी कारोबारी रईसुल हसन ने बताया कि सम्मेलन के पहले दिन ही काउंटरों पर उम्मीद से बढ़कर ग्राहक आए। जिससे मौजूद करीब 50 फीसदी स्टॉक बिक गया। विदेशियों को भी सैंपल पसंद आए हैं। इस आयोजन के जरिए बड़े खरीदारों से सीधे संवाद का अवसर मिला। लहरपुर के जियाउल अंसारी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि नौ देशों से आए उद्यमियों ने कई तरह की दरियों में रुचि दिखाई है। भारतीय कारोबारियों को भी हस्तनिर्मित दरियों ने खूब लुभाया है। खैराबाद के स्टॉलियन होम फैशन के शिवम मिश्रा ने बताया कि सीतापुर में पहली बार इस तरह का आयोजन हुआ है। दरी उद्योग के लिए यह अच्छी पहल है।
विज्ञापन
सम्मेलन में दूसरे दिन मिश्रिख सांसद अशोक रावत, नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु व भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल ने पहुंचकर स्टॉलों का निरीक्षण किया। डीएम डॉ. राजा गणपति आर व सीडीओ डॉ. दीक्षा जोशी ने स्टॉलों पर क्रमवार पहुंचकर दरी कारोबारियों से आयोजन के संबंध में फीडबैक लिया।
विज्ञापन
बच्चों ने समझी दरी बुनाई की बारीकी
सम्मेलन में दरी बनाए जाने का लाइव डेमो दिखाने के लिए दो विशेष स्टॉल भी लगाए गए। रविवार को कई विद्यालयों के बच्चों ने इस विशेष स्टॉल पर दरी बुनने की बारीकियों को देखा व समझा। दरी बुनाई का काम करीब से देखकर बच्चे उत्साहित दिखाई दिए। अंजलि शर्मा ने बताया कि इस तरह के सम्मेलन से सीतापुर की पहचान देश-विदेश तक बनती है। जिला प्रशासन की बेहतर पहल है। हमने यहां एक हैंडबैग खरीदा है। वहीं, पूजा तिवारी ने बताया कि यहां हस्तनिर्मित वस्तुएं काफी आकर्षक हैं। सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को विभिन्न स्टॉलों पर स्थानीय लोगों की खासी भीड़ नजर आई। सभी ने अपनी पसंद के मुताबिक जमकर खरीदारी भी की। कोई अपनी पसंद के हैंडबैग, कुशन तो कोई दरी खरीदता दिखाई दिया।
साधो बैंड की प्रस्तुति ने किया मंत्रमुग्ध
सम्मेलन में शनिवार शाम साधो बैंड की संगीतमय प्रस्तुति से विदेशी मेहमान मंत्रमुग्ध नजर आए। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति और संगीत की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को उत्साह एवं उमंग से भर दिया। समापन पर जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने साधो बैंड के सभी कलाकारों एवं सदस्यों को सम्मानित किया।
दरी पर उकेरा अशोक लाट व सत्यमेव जयते
सीतापुर। दरी पर बेहद बारीकी से उकेरा गया राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ''सत्यमेव जयते'' और उसके नीचे बना अशोक स्तंभ देख क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में पहुंचे उद्यमियों ने कारीगर के हुनर को खुलकर सराहा। इस खास डिजाइन की दरी ने खूब सुर्खियां बटोरी। कई विदेशी मेहमानों व स्थानीय नागरिकों ने इसे खरीदने की जिज्ञासा भी दिखाई, लेकिन इसे बनाने वाले बुनकर ने दरी को बेचने से इंकार कर दिया। दरी को बनाने वाले बुनकर जलील अंसारी ने बताया कि यह खास दरी नेशनल अवॉर्ड के लिए भेजने को बनाई गई है। इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती। इसमें खर्च की गई मेहनत की खुशी सम्मान पाने पर ही मिलेगी। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में अपने हुनर को प्रदर्शित करने आए जलील ने बताया कि कॉटन के धागे से इस दरी को बुना है। दूर से देखने पर वह प्रिंट जैसा लगता है, लेकिन पास आने पर हाथ की कारीगरी का पता चलता है। जलील को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उसके इस हुनर को वास्तविक सम्मान दिलाने का प्रयास जरूर करेगा। (संवाद)