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Sitapur News: प्लाईवुड फैक्टरी के ब्रिटिश मालिकों की तलाश शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:57 AM IST
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सीतापुर। शहर के पुराने प्लाईवुड फैक्टरी के ब्रिटिश मालिकों के उत्तराधिकारियों की तलाश की पहल शुरू हो गई है। इसके लिए पूर्व पालिकाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने भारत स्थित ब्रिटिश उच्चायोग को पत्र भेजकर इस ऐतिहासिक संपत्ति के मूल स्वामियों के वारिसों का पता लगाने का अनुरोध किया है।
शहर के हुसैनगंज मोहल्ले में स्थित हेनरी थॉमसन प्लाईवुड उत्पाद कारखाने के मामले में यह नया घटनाक्रम सामने आया है। दरअसल, 11 फरवरी को जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने सार्वजनिक सूचना जारी कर इस भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की थी और आपत्ति या दावा प्रस्तुत करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था।
करीब 150 बीघा में फैली इस फैक्टरी की जमीन को राजस्व अभिलेखों में राज्य सरकार के नाम दर्ज करने की प्रशासनिक कवायद के बीच आशीष मिश्रा ने ब्रिटिश उच्चायोग से अपने अभिलेखों के आधार पर हेनरी थॉमसन के वैध उत्तराधिकारियों की खोज कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि जब तक मूल ब्रिटिश स्वामियों के वारिसों की पहचान नहीं हो जाती, तब तक राज्य सरकार की किसी भी कार्रवाई को रोका जाना चाहिए।
आशीष मिश्रा के अनुसार इस संपत्ति पर कानपुर के कुछ लोगों ने भी दावा किया है, जबकि कारखाने का मूल स्वामित्व ब्रिटिश नागरिकों का रहा है। उन्होंने पत्र में उन हजारों भारतीय कर्मचारियों के हितों का भी उल्लेख किया है जो कभी इस कारखाने से जुड़े रहे थे।
उनका कहना है कि यदि उचित स्वामित्व स्पष्ट होने के बाद कारखाने का पुनरुद्धार होता है तो सीतापुर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और शहर की औद्योगिक पहचान को फिर से मजबूती मिल सकती है। बताया जाता है कि 1939 में स्थापित यह कारखाना करीब 25 वर्षों से बंद पड़ा है। (संवाद)
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शहर के हुसैनगंज मोहल्ले में स्थित हेनरी थॉमसन प्लाईवुड उत्पाद कारखाने के मामले में यह नया घटनाक्रम सामने आया है। दरअसल, 11 फरवरी को जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने सार्वजनिक सूचना जारी कर इस भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की थी और आपत्ति या दावा प्रस्तुत करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था।
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करीब 150 बीघा में फैली इस फैक्टरी की जमीन को राजस्व अभिलेखों में राज्य सरकार के नाम दर्ज करने की प्रशासनिक कवायद के बीच आशीष मिश्रा ने ब्रिटिश उच्चायोग से अपने अभिलेखों के आधार पर हेनरी थॉमसन के वैध उत्तराधिकारियों की खोज कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि जब तक मूल ब्रिटिश स्वामियों के वारिसों की पहचान नहीं हो जाती, तब तक राज्य सरकार की किसी भी कार्रवाई को रोका जाना चाहिए।
आशीष मिश्रा के अनुसार इस संपत्ति पर कानपुर के कुछ लोगों ने भी दावा किया है, जबकि कारखाने का मूल स्वामित्व ब्रिटिश नागरिकों का रहा है। उन्होंने पत्र में उन हजारों भारतीय कर्मचारियों के हितों का भी उल्लेख किया है जो कभी इस कारखाने से जुड़े रहे थे।
उनका कहना है कि यदि उचित स्वामित्व स्पष्ट होने के बाद कारखाने का पुनरुद्धार होता है तो सीतापुर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और शहर की औद्योगिक पहचान को फिर से मजबूती मिल सकती है। बताया जाता है कि 1939 में स्थापित यह कारखाना करीब 25 वर्षों से बंद पड़ा है। (संवाद)