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Sitapur Ground Report: जिले में किसान और बुनकरों की कैसे बदली किस्मत, अब तक कितना हुआ विकास; देखें रिपोर्ट

अमर उजाला नेटवर्क, सीतापुर Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 13 Jun 2026 05:22 PM IST
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सार

Sitapur Ground Report: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अमर उजाला की टीम सीतापुर पहुंची। जहां जिले में विकास के कार्यों की जमीनी हकीकत को जाना। टीम ने स्थानीय निवासियों और अन्य लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि बीते वर्षों में सीतापुर जिले की तस्वीर कितनी बदली है। जिले में हुए इन बदलावों से लोगों का जीवन कितना बदला है। 

Sitapur Ground Report FPO farmers report on development achieved in district
सीतापुर ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Sitapur Ground Report: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अमर उजाला की टीम सक्षम यूपी कार्यक्रम के तहत पूरे प्रदेश के दौरे पर है। हमारी टीम सीतापुर जिले में पहुंची। टीम ने यहां रोजगार, कृषि खेती, बंजारा समुदाय को आवास, सरकार की एफपीओ, ओडीओपी योजना से स्थानीय लोगों को कितना लाभ मिला। क्षेत्रों के विकास और अन्य बदलावों को भी देखा गया। लोगों से बातचीत कर जिले की वास्तविक स्थिति समझी। इस दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि सरकारी योजनाओं का आम लोगों के जीवन पर कितना असर पड़ा है। आखिर वास्तव में जिले की वर्तमान स्थिति क्या है। 


एफपीओ से बदली किसानों की किस्मत
एफपीओ ऑर्गनाइजर विकास सिंह तोमर ने बताया कि हम लोगों ने 2015 में अपना एक एफपीओ बनाया था। जिसमें किसानों की जो समस्या है, उसमें काम करने का प्लान बनाया था। पहली जो समस्या है किसानों की उनको इनपुट या कृषि की तकनीक नहीं मिल पाती। उनको साथ ही कृषि की गतिविधियां या चीजों की जानकारी नहीं मिल पाती थी। किसानों को जो समस्याएं आईं। उनके ऊपर काम किया गया। किसानों के खेतों पर वैज्ञानिकों को लेकर गए। किसानों को ट्रेनिंग दी। नाबार्ड के जरिए कई विश्वविद्यालयों में और अलग-अलग एक्टिविटी के लिए उनको एक्सपोजर किया। इसके बाद जब किसानों ने खेतों में उन चीजों का प्रयोग किया तो उनके उत्पाद को हम लोगों ने प्रोसेस किया। मार्किट भी हम लोग करते हैं। 1500 किसान मेंबर हैं हमारे। उन सभी के साथ हम काम कर रहे हैं। सीड प्रोडक्शन का काम है। उसमें हम मास्टर हैं। 
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यहां देखें पूरी बातचीत- 
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सीतापुर जिले में बंजारा समाज के जीवन में कैसे आया बदलाव
सीतापुर जिले के लहरपुर इलाके में अमर उजाला की टीम पहुंची। जहां बंजारा समुदाय से खुशीराम ने बताया कि यहां पर 133 आवास बन रहे हैं। सरकार ने यह सभी आवास बनाए हैं। उससे पहले ठठेरी डोला पर रहते थे। पहले हमारे घर झुग्गी के थे। वहां 290 घर थे। आगे कहा कि सरकार बहुत कुछ कर रही है। बदलाव आ रहा है। योगी सरकार अच्छा काम कर रही है। बंजारा समुदाय से ज्ञानवती ने बताया कि जो आवास मिला है। उसमें कमरा है, किचन है, एक बाथरूम है। कम से कम एक से दो महीने में सरकार घर दे रही है। पहले कुछ नहीं मिला। तंबू में पूर्वज रहे। लेकिन अब घर कॉलोनी और मकान के साथ खेत भी मिलेंगे। साल दो साल में सरकार सारी व्यवस्था कर देगे। 

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ODOP से बुनकरों को कैसे मिला लाभ?
ओडीओपी सीएफसी सचिव हयात कौसर ने बताया कि जो मैटरियल यूज नहीं होता है हम उस मैटरियल को रिसाइकल करके रिडिजाइन करते हैं। जो सामान रिजेक्ट हो चुका है। उसे रियूज करते हैं। इंटरनेशनल देशों में कई जगहों पर ठंड होती है। उन लोगों को नीचे हिट करने के लिए बेस पर कुछ बिछाना होता है। लोग दरियों की डिमांड करते हैं। क्योंकि कार्पेट बहुत महंगा होता है। दरी की डिमांग हमेशा बढ़ती रहती है। ओडीओपी के तहत बने कॉमन फैसिलिटी सेंटर को लेकर कहा कि हमारे यहां जो फर्म हैं, ज्यादातर रजिस्टर्ड हैं। जो 150 से ज्यादा हैं। सभी के पास इतना बेस नहीं होता है। जो अच्छी मार्किट को कैप्चर कर सके। तो सरकार ने एक फैसिलिटी शुरू की। 15 से 20 लोग एक ग्रुप बना लें और एसपीवी बना लें। इसके बाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर के लिए अप्लाई कर दें। हमारे यहां डिजाइनिंग एंड सैंपलिंग सेंटर बना हुआ है। लोग आए और एक मिनिमम चार्ज देकर अपने डिजाइन से डेवलप कर सकते हैं। जिनके पास अपने प्रोडेक्शन के लिए यूनिट नहीं है। तो हमारे यहां आकर मिनिमम चार्ज देकर अपना प्रोडेक्शन कर सकता है। 

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जानें क्या बोले ओडीओपी सीएफसी अध्यक्ष
ओडीओपी सीएफसी अध्यक्ष हाजी रफीक अहमद ने बताया कि  पहले जो चीजें हम लोगों को पानीपत से खरीदनी पड़ती थी। मालूम हुआ या तो इतना हमारे पास पैसा होता कि हम उसको स्टॉक बना के रखते और या तो हमें जितनी जरूरत होती। आर्डर में हमेशा एक टाइम मुस्तकिल होता है कि हमें इस वक्त में हमको इतना माल आप बना के दीजिए। तो जाहिर बात है कि हमें सबसे पहले तो यही एक बेनिफिट मिला। अगर हमको 500 केजी की धागे की जरूरत लगी तो हम ओडीओपी से फौरन लिए और सुबह में प्रोडक्शन चालू कर दिए। एक ये छोटा बेनिफिट नहीं है। ये बहुत बड़ा बेनिफिट है। हम हफ्तों में नहीं कर पाते थे। अब हमारा एक दिन में काम हो जाता है। अब सरकार का सबसे बड़ा तो यह बेनिफिट यही है कि हम 10 रुपये वाले थे और 10 लाख हमें दे दे। 90% सब्सिडी के साथ में हमको इतना अमाउंट दे दे कि हम एक लूम लगाने के काबिल थे। हमारी इतनी बड़ी-बड़ी मशीनें लगवा दी। जिससे हम इतना अच्छा बेनिफिट ले रहे हैं। जो धागा पानीपत से बनवा के यहां मंगवाते थे। आज हम अपनी फैक्टरी में बना ले रहे हैं।

यहां देखें पूरी बातचीत- 

 
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