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Sonebhadra News: 44 साल से बस्ते में पक्का रास्ता, कीचड़ से सनकर स्कूल पहुंचे रहे बच्चे-शिक्षक
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छुट्टी के समय विद्यालय से निकलकर डाड़-मेड़ से गुजरते हुए घर के लिए रवाना होते चेरईराम कंपोजिट व
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सिटी ब्लॉक क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय चेरुईराम तक जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। 44 साल से पक्के रास्ते का प्रस्ताव बस्ते में हैं। बारिश होने पर 422 विद्यार्थी और शिक्षक कीचड़ से सनकर स्कूल पहुंचते हैं।
1982 में स्थापित प्राथमिक विद्यालय चेरुईराम को 2008 में कंपोजिट विद्यालय का दर्जा मिला था। चार दशक बीतने के बाद भी विद्यालय तक जाने के लिए कोई अधिकृत रास्ता नहीं है। सामान्य दिनों में बच्चे और शिक्षक खेत के रास्ते विद्यालय पहुंचते हैं। बारिश होने पर मेड़ पर कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
स्कूल में कक्षा एक से आठ तक कुल 422 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें कक्षा एक में 53, कक्षा दो में 46, कक्षा तीन में 52, कक्षा चार में 49, कक्षा पांच में 62, कक्षा छह में 57, कक्षा सात में 36 और कक्षा आठ में 68 विद्यार्थी शामिल हैं। स्थानीय दीनानाथ के अनुसार विद्यालय के चारों ओर किसानों की निजी जमीन है, जबकि सामने शत्रु संपत्ति भी मौजूद है। इसके बावजूद अब तक विद्यालय के लिए स्थायी संपर्क मार्ग नहीं बनाया जा सका है।
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पिछले साल कंपोजिट विद्यालय चेरुईराम जाने के लिए पक्के रास्ते की मांग को लेकर ग्रामीणों ने विद्यालय में तालाबंदी की थी। तहसील से लेकर ब्लॉक के अधिकारी दौड़ लगाए। इसके बावजूद समस्या का हल न निकल सका। ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के चारों तरफ काश्तकारों की भूमि है। विद्यालय के बगल में एक बगीचा है। जिसके कुछ हिस्सेदार पाकिस्तान में बस गए।
उसे शत्रु भूमि भी घोषित किया जा चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल भूमि की पैमाइश तक हुई। एस्टीमेट आदि भी तैयार किए गए। इसके बावजूद पक्के रास्ते का निर्माण नहीं हो सका।
कंपोजिट विद्यालय चेरुईराम में तैनात शिक्षक मुख्य सड़क पर अपना वाहन खड़ा कर पैदल विद्यालय पहुंचते हैं। जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। विद्यालय के इंचार्ज / प्रधानाध्यापक संतोष कुमार पांडेय का कहना है कि रास्ते को लेकर कई बार विभागीय लिखा-पढ़ी की गई बावजूद समस्या का हल न निकल सका। शिक्षकों को एक किलोमीटर दूर वाहन खड़ा कर स्कूल आना पड़ता है।
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1982 में स्थापित प्राथमिक विद्यालय चेरुईराम को 2008 में कंपोजिट विद्यालय का दर्जा मिला था। चार दशक बीतने के बाद भी विद्यालय तक जाने के लिए कोई अधिकृत रास्ता नहीं है। सामान्य दिनों में बच्चे और शिक्षक खेत के रास्ते विद्यालय पहुंचते हैं। बारिश होने पर मेड़ पर कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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स्कूल में कक्षा एक से आठ तक कुल 422 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें कक्षा एक में 53, कक्षा दो में 46, कक्षा तीन में 52, कक्षा चार में 49, कक्षा पांच में 62, कक्षा छह में 57, कक्षा सात में 36 और कक्षा आठ में 68 विद्यार्थी शामिल हैं। स्थानीय दीनानाथ के अनुसार विद्यालय के चारों ओर किसानों की निजी जमीन है, जबकि सामने शत्रु संपत्ति भी मौजूद है। इसके बावजूद अब तक विद्यालय के लिए स्थायी संपर्क मार्ग नहीं बनाया जा सका है।
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पिछले साल कंपोजिट विद्यालय चेरुईराम जाने के लिए पक्के रास्ते की मांग को लेकर ग्रामीणों ने विद्यालय में तालाबंदी की थी। तहसील से लेकर ब्लॉक के अधिकारी दौड़ लगाए। इसके बावजूद समस्या का हल न निकल सका। ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के चारों तरफ काश्तकारों की भूमि है। विद्यालय के बगल में एक बगीचा है। जिसके कुछ हिस्सेदार पाकिस्तान में बस गए।
उसे शत्रु भूमि भी घोषित किया जा चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल भूमि की पैमाइश तक हुई। एस्टीमेट आदि भी तैयार किए गए। इसके बावजूद पक्के रास्ते का निर्माण नहीं हो सका।
कंपोजिट विद्यालय चेरुईराम में तैनात शिक्षक मुख्य सड़क पर अपना वाहन खड़ा कर पैदल विद्यालय पहुंचते हैं। जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। विद्यालय के इंचार्ज / प्रधानाध्यापक संतोष कुमार पांडेय का कहना है कि रास्ते को लेकर कई बार विभागीय लिखा-पढ़ी की गई बावजूद समस्या का हल न निकल सका। शिक्षकों को एक किलोमीटर दूर वाहन खड़ा कर स्कूल आना पड़ता है।