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Sonebhadra News: हिंदुआरी में बनेगी 1.60 करोड़ की आत्मनिर्भर वृहद गोशाला
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जिले में निराश्रित और बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए हिंदुआरी में 1.60 करोड़ रुपये की लागत से आत्मनिर्भर वृहद गोशाला बनाई जाएगी। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड से बनने वाली इस परियोजना को डीएम ने मंजूरी दे दी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। जिले में वर्तमान में चार स्थायी सहित आठ गो-आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें करीब दो हजार गोवंश संरक्षित हैं। अधिकांश आश्रय स्थल क्षमता से अधिक भरे होने के कारण नए निराश्रित पशुओं को रखने में कठिनाई हो रही है। इससे बड़ी संख्या में छुट्टा पशु सड़कों, बाजारों और गांवों में घूमते नजर आते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए हिंदुआरी में नई वृहद गोशाला का निर्माण कराया जाएगा।
परियोजना के तहत गोवंश के सुरक्षित आवास के लिए दो आधुनिक शेड बनाए जाएंगे, जिन पर लगभग 82.88 लाख रुपये खर्च होंगे। वर्षभर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 12.67 लाख रुपये की लागत से चारा भंडारण कक्ष भी बनाया जाएगा। गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से परिसर में करीब 15 लाख रुपये की लागत से वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित की जाएगी। गोबर से तैयार जैविक खाद की बिक्री से होने वाली आय का उपयोग गोवंश के चारा, पेयजल, उपचार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर किया जाएगा। इससे गौशाला के संचालन को दीर्घकाल तक आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
वर्जन
प्रस्तावित गौशाला का उद्देश्य निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और उनके समुचित पुनर्वास की स्थायी व्यवस्था विकसित करना है। यहां स्वच्छ पेयजल, नियमित टीकाकरण, पशु चिकित्सा सुविधा और समुचित देखभाल की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह परियोजना गोवंश संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। — चर्चित गौड़, जिलाधिकारी।
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परियोजना के तहत गोवंश के सुरक्षित आवास के लिए दो आधुनिक शेड बनाए जाएंगे, जिन पर लगभग 82.88 लाख रुपये खर्च होंगे। वर्षभर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 12.67 लाख रुपये की लागत से चारा भंडारण कक्ष भी बनाया जाएगा। गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से परिसर में करीब 15 लाख रुपये की लागत से वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित की जाएगी। गोबर से तैयार जैविक खाद की बिक्री से होने वाली आय का उपयोग गोवंश के चारा, पेयजल, उपचार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर किया जाएगा। इससे गौशाला के संचालन को दीर्घकाल तक आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
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प्रस्तावित गौशाला का उद्देश्य निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और उनके समुचित पुनर्वास की स्थायी व्यवस्था विकसित करना है। यहां स्वच्छ पेयजल, नियमित टीकाकरण, पशु चिकित्सा सुविधा और समुचित देखभाल की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह परियोजना गोवंश संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। — चर्चित गौड़, जिलाधिकारी।
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