शीतलाष्टमी: देवी मंदिरों में बसियउरा पूजा, मां से की निरोग रहने की कामना; मंदिर में भोर से ही पहुंचीं महिलाएं
Sheetalashtami: काशी नगरी में सुबह से करीब नौ बजे तक पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा। बड़ी शीतला मंदिर में दर्शन के लिए काफी भीड़ उमड़ी और महिलाओं ने कतार में लगकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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वैशाख मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर शुक्रवार को शहर भर के शीतला माता मंदिरों में श्रद्धा और आस्था के साथ बसियउरा पूजा और विशेष शृंगार किया गया। बड़ी शीतला माता मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लगी रही। महिलाओं ने पूरी रात पकवान तैयार कर भोर में माता को भोग अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि व निरोग जीवन की कामना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ऋतु परिवर्तन के दौरान होने वाले रोगों से बचाव के लिए माता शीतला की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इसी क्रम में चैत्र के बाद वैशाख अष्टमी पर भी बसियउरा पूजा का आयोजन हुआ। गुरुवार रात महिलाओं ने घरों और रसोई की साफ-सफाई कर गुलगुला, लपसी, पूड़ी, सब्जी सहित विभिन्न पकवान बनाए। शुक्रवार भोर में इन पकवानों को माता को अर्पित कर विधि-विधान से पूजा की गई।
देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़
पूजन के दौरान श्रद्धालु थाली में पकवानों के साथ मौसमी फल, मिष्ठान, दही, ककड़ी, बताशा, नारियल, चुनरी, सिंदूर, रोरी, धूप और दीप लेकर मंदिर पहुंचे। शाम को मंदिर में विशेष शृंगार और आरती का आयोजन हुआ। पुजारी अभिनाश पांडेय ‘सुट्टू महाराज’ ने माता का पंचामृत स्नान कराकर नए वस्त्र और आभूषण धारण कराए। इसके बाद सुगंधित फूलों से भव्य शृंगार कर आरती उतारी गई। शयन आरती तक भक्तों की भीड़ बनी रही।
वहीं, अष्टमी के अवसर पर कालभैरव मंदिर सहित अन्य भैरव मंदिरों में भी दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। टेढ़ीनीम, दुर्गाकुंड, संकटमोचन, राजमंदिर और औसानगंज स्थित शीतला मंदिरों में भी दिनभर पूजन-अर्चन का सिलसिला जारी रहा। शहर में आस्था और भक्ति का माहौल देखने को मिला, जहां श्रद्धालुओं ने माता शीतला से परिवार की खुशहाली और स्वास्थ्य की कामना की।