सोनभद्र। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मंगलवार को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन विषयक विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013, स्थायी लोक अदालत और अन्य महत्वपूर्ण कानूनों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीडी) राहुल ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना कानून और समाज दोनों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का मानसिक, मौखिक या शारीरिक उत्पीड़न दंडनीय अपराध है। प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है, जहां पीड़ित महिला बिना किसी भय के अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। उन्होंने बालिकाओं को तृतीय लिंग के अधिकार, उपभोक्ता संरक्षण, नशा एवं धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभाव, तेजाब हमला, पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम-1994, घरेलू हिंसा अधिनियम-2005, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम तथा बालिकाओं के शिक्षा और समानता के अधिकार से संबंधित कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा-12 के तहत महिलाओं को उपलब्ध निशुल्क विधिक सहायता के अधिकार पर भी प्रकाश डाला गया। स्थायी लोक अदालत एवं मध्यस्थता केंद्र के माध्यम से विभिन्न प्रकार के विवादों के सरल और त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई। इस अवसर पर डिप्टी चीफ एलएडीसी सत्यारमण त्रिपाठी, स्थायी लोक अदालत के सदस्य नीरज सिंह, प्रधानाचार्य वंदना सिंह, शिक्षिका अर्चना सिंह, निशा सिंह, पराविधिक स्वयंसेवक दीपन कुमार आदि उपस्थित रहे।