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Sonebhadra News: दुष्कर्म के बाद युवती का जबरन गर्भपात कराने वाले को 10 साल की सजा
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अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्लू अर्चना रानी की अदालत ने मंगलवार को नौ वर्ष पूर्व युवती से दुष्कर्म करने और दवा खिलाकर गर्भपात कराने के दोषी को 10 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषी पर 60 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है। प्रकरण राॅबर्ट्सगंज कोतवाली से जुड़ा हुआ है। कोर्ट के फैसले के अनुसार, अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जुर्माने की धनराशि जमा होने के बाद उसमें से 50 हजार की धनराशि पीड़िता को प्रदान की जाएगी।
अभियोजन के मुताबिक नौ सितंबर 2016 को राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र की एक युवती को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच की तो मामला गर्भपात का सामने आया। पीड़िता के पिता ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि चंदौली जिले के चकरघट्टा थाना अंतर्गत बोझ गांव निवासी संतोष ने उनकी पुत्री के साथ दुष्कर्म किया था। किसी को बताने पर जाने से मारने की धमकी दी थी। गर्भ ठहरने की बात जब उसे मालूम हुई तो उसने उसकी बेटी को जबरन गर्भपात की दवा खिला दी। हालत बिगड़ने पर पीड़िता ने परिजनों को घटना की जानकारी दी थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि जिस वक्त पीड़िता को दवा खिलाई गई, उस समय उसे पांच माह का गर्भ था। काफी गंभीर हालत में वह जिला अस्पताल पहुंची थी। वहां पहुंचने से पहले दवा खिलाने के साथ ही उसका गर्भपात कराया गया था। सुनवाई के दौरान तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कमलेश्वर सिंह, विनोद सिंह सहित अन्य के बयान दर्ज किए गए। बचाव पक्ष साजिश के तहत फंसाए जाने का आरोप लगाता रहा। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर संतोष को दोषी पाया। कोर्ट ने 10 वर्ष सश्रम कारावास और 25-25 अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं जान से खत्म कर देने की धमकी के लिए दोषी को पांच वर्ष कारावास और 10 हजार के जुर्माने से दंडित किया गया।
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इनसेट -
चौकी इंचार्ज सहित चार पुलिसकर्मियों को राहत, किए गए बरी
रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के सुकृत पुलिस चौकी में फरियाद लगाने पहुंची राजकुमारी और उसके बेटे के साथ मारपीट, पति को प्रताड़ित करने के मामले में तत्कालीन चौकी इंचार्ज सहित तीन पुलिसकर्मियों को राहत मिल गई है। सुनवाई के दौरान पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर एसआई संजय कुमार सिंह, कांस्टेबल कमलेश कुमार सिंह, धीरज मिश्र और शिवमणि को बरी कर दिया गया है। वहीं समर बहादुर सिंह को जमीन बिक्री की बिचौलियागिरी करने और उसका पैसा न मिलने पर धमकी देने का दोषी पाया है और उसे छह माह के परिवीक्षा की सजा सुनाई है।
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अभियोजन के मुताबिक नौ सितंबर 2016 को राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र की एक युवती को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच की तो मामला गर्भपात का सामने आया। पीड़िता के पिता ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि चंदौली जिले के चकरघट्टा थाना अंतर्गत बोझ गांव निवासी संतोष ने उनकी पुत्री के साथ दुष्कर्म किया था। किसी को बताने पर जाने से मारने की धमकी दी थी। गर्भ ठहरने की बात जब उसे मालूम हुई तो उसने उसकी बेटी को जबरन गर्भपात की दवा खिला दी। हालत बिगड़ने पर पीड़िता ने परिजनों को घटना की जानकारी दी थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि जिस वक्त पीड़िता को दवा खिलाई गई, उस समय उसे पांच माह का गर्भ था। काफी गंभीर हालत में वह जिला अस्पताल पहुंची थी। वहां पहुंचने से पहले दवा खिलाने के साथ ही उसका गर्भपात कराया गया था। सुनवाई के दौरान तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कमलेश्वर सिंह, विनोद सिंह सहित अन्य के बयान दर्ज किए गए। बचाव पक्ष साजिश के तहत फंसाए जाने का आरोप लगाता रहा। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर संतोष को दोषी पाया। कोर्ट ने 10 वर्ष सश्रम कारावास और 25-25 अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं जान से खत्म कर देने की धमकी के लिए दोषी को पांच वर्ष कारावास और 10 हजार के जुर्माने से दंडित किया गया।
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चौकी इंचार्ज सहित चार पुलिसकर्मियों को राहत, किए गए बरी
रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के सुकृत पुलिस चौकी में फरियाद लगाने पहुंची राजकुमारी और उसके बेटे के साथ मारपीट, पति को प्रताड़ित करने के मामले में तत्कालीन चौकी इंचार्ज सहित तीन पुलिसकर्मियों को राहत मिल गई है। सुनवाई के दौरान पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर एसआई संजय कुमार सिंह, कांस्टेबल कमलेश कुमार सिंह, धीरज मिश्र और शिवमणि को बरी कर दिया गया है। वहीं समर बहादुर सिंह को जमीन बिक्री की बिचौलियागिरी करने और उसका पैसा न मिलने पर धमकी देने का दोषी पाया है और उसे छह माह के परिवीक्षा की सजा सुनाई है।
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