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यात्रियों से वसूली : होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को जाता है नौकायन का मोटा कमीशन
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200 से 800 रुपये तक कमीशन, यात्रियों से मनमाना रेट वसूलते हैं नाविक
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। गंगा किनारे रोजाना लाखों सैलानी घूमने आते हैं, जिनमें से हजारों रोजाना नौकायन का आनंद लेते हैं। इन सैलानियों का ठहराव गंगा किनारे के होटल और गेस्ट हाउस में होता है। हालांकि, जब यात्री नौकायन के लिए घाट पर जाते हैं, तो नाविक उनसे मनमाना रेट वसूलते हैं। इसकी वजह यह है कि नाविकों को यात्रियों से वसूली किए गए पैसे का एक हिस्सा होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को कमीशन के तौर पर देना पड़ता है।
गंगा किनारे सामनेघाट से नमो घाट तक हजारों गेस्ट हाउस और होटल संचालित हैं। रिवर व्यू के कारण ये स्थान महानगरों और विदेशों से आने वाले सैलानियों की पहली पसंद हैं। नौकायान के लिए घाट पर आने पर नाविक सैलानियों को पकड़कर मनमाने रेट वसूलते हैं, जिससे अक्सर विवाद भी हो जाना है। नाविकों के अनुसार, होटल और गेस्ट हाउस संचालक सैलानियों से 200 से 800 रुपये तक रेट तय करते हैं, जिसमें से कुछ रकम उन्हें कमीशन के रूप में मिलती है।
पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल
गंगा घाट पर आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर वाराणसी में कोई खास इंतजाम नहीं है। नाविक अपने फायदे के लिए यात्रियों को पकड़ने और मारपीट करने की घटनाएं आम हैं। मारपीट की शिकायत मिलने के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं करती। कई बार मजबूरन पर्यटकों को सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठानी पड़ती है। वीडियो वायरल होने पर ही पुलिस सक्रिय होती है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती।
60 फीसदी होटल और गेस्ट हाउस अवैध
गंगा किनारे लगभग हर घर में होटल और गेस्ट हाउस चल रहे हैं, जिनमें करीब 60 फीसदी अवैध हैं और बिना लाइसेंस संचालित होते हैं। पर्यटकों की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं करता। घाट किनारे की पतली गलियों या सड़कों पर संचालित होटलों और गेस्ट हाउस में ऑनलाइन बुकिंग भी होती है और कुछ जगह नशे की सामग्री भी बेची जाती है। प्रशासन और पुलिस को इन पर अभियान चलाकर कार्रवाई करनी चाहिए।
आम सैलानियों से भी मनमानी वसूली
सिर्फ बड़े सैलानियों ही नहीं, बल्कि आम सैलानियों से भी मनमाने रेट वसूले जाते हैं। नगर निगम के अनुसार अस्सी से नमो घाट तक का तय किराया प्रति व्यक्ति 345 रुपये है, लेकिन वास्तविक में नाविक 500 रुपये तक वसूल लेते हैं। बाहरी शहरों से आए सैलानियों से तो 1000 से 2000 रुपये तक वसूले जाते हैं। नौकायान का तय किराया (प्रति व्यक्ति)
अस्सी घाट से नमो घाट तक: 345 रुपये
हरिश्चंद्र घाट से मणिकर्णिका घाट तक: 125 रुपये
गंगा द्वार (ललिता घाट) से अस्सी घाट तक: 175 रुपये
गंगा द्वार (ललिता घाट) से नमो घाट तक: 175 रुपये
मोटरबोट से आरती देखने के लिए दो घंटे का किराया: 175 रुपये
वर्जन
घाट पर आने वाले सैलानियों से कोई भी मनमानी वसूली न हो, इसका ध्यान दिया जा रहा है। किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम की ओर से कुछ घाटों पर रेट चार्ट लगाया गया था, जिसे फिर से अपडेट करना आवश्यक है। - राज किशोर पांडेय, प्रभारी निरीक्षक, जल पुलिस
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। गंगा किनारे रोजाना लाखों सैलानी घूमने आते हैं, जिनमें से हजारों रोजाना नौकायन का आनंद लेते हैं। इन सैलानियों का ठहराव गंगा किनारे के होटल और गेस्ट हाउस में होता है। हालांकि, जब यात्री नौकायन के लिए घाट पर जाते हैं, तो नाविक उनसे मनमाना रेट वसूलते हैं। इसकी वजह यह है कि नाविकों को यात्रियों से वसूली किए गए पैसे का एक हिस्सा होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को कमीशन के तौर पर देना पड़ता है।
गंगा किनारे सामनेघाट से नमो घाट तक हजारों गेस्ट हाउस और होटल संचालित हैं। रिवर व्यू के कारण ये स्थान महानगरों और विदेशों से आने वाले सैलानियों की पहली पसंद हैं। नौकायान के लिए घाट पर आने पर नाविक सैलानियों को पकड़कर मनमाने रेट वसूलते हैं, जिससे अक्सर विवाद भी हो जाना है। नाविकों के अनुसार, होटल और गेस्ट हाउस संचालक सैलानियों से 200 से 800 रुपये तक रेट तय करते हैं, जिसमें से कुछ रकम उन्हें कमीशन के रूप में मिलती है।
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पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल
गंगा घाट पर आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर वाराणसी में कोई खास इंतजाम नहीं है। नाविक अपने फायदे के लिए यात्रियों को पकड़ने और मारपीट करने की घटनाएं आम हैं। मारपीट की शिकायत मिलने के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं करती। कई बार मजबूरन पर्यटकों को सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठानी पड़ती है। वीडियो वायरल होने पर ही पुलिस सक्रिय होती है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती।
60 फीसदी होटल और गेस्ट हाउस अवैध
गंगा किनारे लगभग हर घर में होटल और गेस्ट हाउस चल रहे हैं, जिनमें करीब 60 फीसदी अवैध हैं और बिना लाइसेंस संचालित होते हैं। पर्यटकों की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं करता। घाट किनारे की पतली गलियों या सड़कों पर संचालित होटलों और गेस्ट हाउस में ऑनलाइन बुकिंग भी होती है और कुछ जगह नशे की सामग्री भी बेची जाती है। प्रशासन और पुलिस को इन पर अभियान चलाकर कार्रवाई करनी चाहिए।
आम सैलानियों से भी मनमानी वसूली
सिर्फ बड़े सैलानियों ही नहीं, बल्कि आम सैलानियों से भी मनमाने रेट वसूले जाते हैं। नगर निगम के अनुसार अस्सी से नमो घाट तक का तय किराया प्रति व्यक्ति 345 रुपये है, लेकिन वास्तविक में नाविक 500 रुपये तक वसूल लेते हैं। बाहरी शहरों से आए सैलानियों से तो 1000 से 2000 रुपये तक वसूले जाते हैं। नौकायान का तय किराया (प्रति व्यक्ति)
अस्सी घाट से नमो घाट तक: 345 रुपये
हरिश्चंद्र घाट से मणिकर्णिका घाट तक: 125 रुपये
गंगा द्वार (ललिता घाट) से अस्सी घाट तक: 175 रुपये
गंगा द्वार (ललिता घाट) से नमो घाट तक: 175 रुपये
मोटरबोट से आरती देखने के लिए दो घंटे का किराया: 175 रुपये
वर्जन
घाट पर आने वाले सैलानियों से कोई भी मनमानी वसूली न हो, इसका ध्यान दिया जा रहा है। किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम की ओर से कुछ घाटों पर रेट चार्ट लगाया गया था, जिसे फिर से अपडेट करना आवश्यक है। - राज किशोर पांडेय, प्रभारी निरीक्षक, जल पुलिस