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देश के इतिहास में वीरों के शौर्य को अपेक्षित स्थान नहीं मिला : अंबरीश
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स्थानीय गांधी मैदान में रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने इतिहास, राष्ट्रबोध और सामाजिक एकता पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीश ने कहा कि देश के इतिहास को जिस तरह पढ़ाया गया, उसमें बार-बार पराजय का भाव दिखाया गया।
हमारे वीर राजाओं और योद्धाओं के शौर्य, त्याग और बलिदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, बंदा बैरागी जैसे महान योद्धाओं के संघर्ष और विजय गाथाएं नई पीढ़ी तक पहुंचना आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास को समझने के लिए हिंदू समाज के योगदान और उसके मूल्यों को जानना जरूरी है। कहा कि केवल गणनाएं करने वाले इतिहास नहीं बनाते, बल्कि स्थापित धारणाओं के विपरीत चलने वाले ही इतिहास रचते हैं।
भारत की प्रत्येक जाति और समाज में योद्धा पैदा हुए हैं, जिन्होंने देश की रक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने विभाजन का संदर्भ देते हुए कहा कि पाकिस्तान उन लोगों के लिए बना था, जिन्होंने वंदे मातरम् कहने से इन्कार किया था। भारत में रहकर बाबर और राम को एक ही तराजू पर तौलने की मानसिकता स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद संत मनीषानंद शनि महाराज, विभाग संघचालक पुनीत लाल, गोपाल सिंह, राम मंदिर पाटी के पुजारी द्वारिका प्रसाद, जिला प्रचारक योगेश सहित अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
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सम्मेलन में वक्ताओं ने इतिहास, राष्ट्रबोध और सामाजिक एकता पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीश ने कहा कि देश के इतिहास को जिस तरह पढ़ाया गया, उसमें बार-बार पराजय का भाव दिखाया गया।
हमारे वीर राजाओं और योद्धाओं के शौर्य, त्याग और बलिदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, बंदा बैरागी जैसे महान योद्धाओं के संघर्ष और विजय गाथाएं नई पीढ़ी तक पहुंचना आवश्यक हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास को समझने के लिए हिंदू समाज के योगदान और उसके मूल्यों को जानना जरूरी है। कहा कि केवल गणनाएं करने वाले इतिहास नहीं बनाते, बल्कि स्थापित धारणाओं के विपरीत चलने वाले ही इतिहास रचते हैं।
भारत की प्रत्येक जाति और समाज में योद्धा पैदा हुए हैं, जिन्होंने देश की रक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने विभाजन का संदर्भ देते हुए कहा कि पाकिस्तान उन लोगों के लिए बना था, जिन्होंने वंदे मातरम् कहने से इन्कार किया था। भारत में रहकर बाबर और राम को एक ही तराजू पर तौलने की मानसिकता स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद संत मनीषानंद शनि महाराज, विभाग संघचालक पुनीत लाल, गोपाल सिंह, राम मंदिर पाटी के पुजारी द्वारिका प्रसाद, जिला प्रचारक योगेश सहित अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।