दुद्धी। महुली गांव निवासी अशोक (35) और उनकी पत्नी फूलमती (30) जन्म से मूक-बधिर हैं। दोनों बोल और सुन नहीं सकते, लेकिन इशारों में एक-दूसरे की बात समझ लेते हैं। वर्षों से सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए प्रयासरत इस दंपती का अब तक दिव्यांगता प्रमाणपत्र नहीं बन सका है। इसके चलते वे राशन, आवास, पेंशन, दिव्यांग उपकरण समेत कई सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं।अशोक के पिता छट्ठू राम (70) गंभीर रूप से बीमार होकर चारपाई पर हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। दो भाई मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। वृद्धा पेंशन भी छह महीने से बंद है। अशोक और फूलमती के दो छोटे बच्चे हैं, जो सामान्य हैं। परिवार के मुताबिक बड़े बेटे आकाश का आधार कार्ड नहीं बनने से उसका सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं हो पाया है और अलग राशन कार्ड भी नहीं बन सका।परिजनों ने बताया कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कई बार स्थानीय स्तर पर प्रयास किया गया, लेकिन जांच की सुविधा नहीं होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया गया। पिछले वर्ष किसी तरह बीएचयू वाराणसी ले जाया गया, जहां ऑडियोमेट्री जांच और लंबी प्रक्रिया के कारण तारीख दे दी गई। आर्थिक तंगी के चलते परिवार दोबारा वाराणसी नहीं जा सका।अशोक की बहन रुनझुन (32) भी मूक-बधिर हैं और उनका भी प्रमाणपत्र नहीं बन पाया है। परिवार आज भी आवास, शौचालय, सड़क समेत कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।