{"_id":"6a5156ddfc558381830bcec2","slug":"there-will-be-thorough-checks-of-school-vehicles-and-drivers-conductors-should-get-police-verification-done-sonbhadra-news-c-194-1-son1033-149497-2026-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: मेडिकल कॉलेज में खुलेगा ओएसटी सेंटर, सुविधा होगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: मेडिकल कॉलेज में खुलेगा ओएसटी सेंटर, सुविधा होगी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नशीली दवाओं, विशेषकर ओपिओइड और इंजेक्शन के माध्यम से किए जाने वाले नशे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए मेडिकल कॉलेज में ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) सेंटर शुरू किया जा रहा है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (यूपीएसएसीएस) के सहयोग से संचालित होने वाले इस केंद्र का शुभारंभ शनिवार को होगा।
मनोरोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जितेश गुप्ता ने बताया कि यह केंद्र मार्फिन, कोडीन और हेरोइन जैसे ओपिओइड मादक पदार्थों की लत से पीड़ित लोगों को वैज्ञानिक, सुरक्षित और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराएगा।
उपचार के माध्यम से नशे की तीव्र इच्छा और नशा छोड़ने के दौरान होने वाले लक्षणों को नियंत्रित कर मरीजों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि मरीजों को दवा के साथ नियमित परामर्श, मनोसामाजिक सहयोग और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल भी उपलब्ध कराई जाएगी। इंजेक्शन के जरिए नशा करने वालों में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों का खतरा अधिक रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मनोरोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जितेश गुप्ता ने बताया कि यह केंद्र मार्फिन, कोडीन और हेरोइन जैसे ओपिओइड मादक पदार्थों की लत से पीड़ित लोगों को वैज्ञानिक, सुरक्षित और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराएगा।
विज्ञापन
उपचार के माध्यम से नशे की तीव्र इच्छा और नशा छोड़ने के दौरान होने वाले लक्षणों को नियंत्रित कर मरीजों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि मरीजों को दवा के साथ नियमित परामर्श, मनोसामाजिक सहयोग और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल भी उपलब्ध कराई जाएगी। इंजेक्शन के जरिए नशा करने वालों में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों का खतरा अधिक रहता है।
विज्ञापन