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कफ सिरप: मास्टर माइंड अरेस्ट, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का खुलासा; बंगाल-बिहार के रास्ते बांग्लादेश पहुंचाता था माल

अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 19 Mar 2026 05:35 PM IST
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सार

UP News: एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि पश्चिम बंगाल में किनके जरिए इस गिरोह के पास मदद के लिए रुपये पहुंचते थे, इसके बारे में भी जानकारी मिली है। आरोपी से पूछताछ में इससे जुड़े वहां के कई नाम सामने आए हैं। सभी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

Transport Network Smuggling Cough Syrup to Bangladesh via Bengal and Bihar Busted Mastermind Arrested
मास्टर माइंड जुबेर हुसैन शेख को गिरफ्तार किया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Cough Syrup Case: कफ सिरप तस्करी में शामिल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (परिवहन के लिए वाहन उपलब्ध कराने वाले) का सोनभद्र एसआईटी ने खुलासा किया है। बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल पहुंची टीम ने पांच दिन की मेहनत के बाद जिले से 736 किमी दूर हावड़ा में छिपकर बैठे मास्टर माइंड जुबेर हुसैन शेख को गिरफ्तार किया। 

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बुधवार को उसे वहां की अदालत में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर उसे लेकर टीम बृहस्पतिवार को सोनभद्र पहुंची। यहां उससे पूछताछ में कई बड़ी जानकारियां मिली। इस नेटवर्क को मदद पहुंचाने वाले पश्चिम बंगाल के कई और नाम सामने आए हैं। एसआईटी उन सभी के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई है। 

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पुलिस ने की कार्रवाई

एसपी अभिषेक वर्मा ने बृहस्पतिवार की दोपहर पुलिस लाइन सभागार में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में फर्जी फर्म बनाकर कागज पर सिरप आपूर्ति मामले में जांच के दौरान सरगना शुभम जायसवाल का नाम सामने आया था। 

उससे जुड़े लोगों को तलाशने और तस्करी में मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के बाद एसआईटी को पता चला कि बिहार के पूर्णिया से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी व कूंचबिहार बॉर्डर तक ट्रकों से कफ सिरप पहुंचाया जाता था जिसे स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर बांग्लादेश भेज दिया जाता था। 

Transport Network Smuggling Cough Syrup to Bangladesh via Bengal and Bihar Busted Mastermind Arrested
शुभम जायसवाल, दिवेश जायसवाल, अमित जायसवाल और आकाश पाठक। - फोटो : अमर उजाला

जांच आगे बढ़ी तो मालूम हुआ कि मूलत: पटेल नगर चिकल थाना चिकल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र) का रहने वाला 42 वर्षीय जुबेर हुसैन पश्चिम बंगाल में रहकर इससे जुड़े ट्रांसपोर्टिंग के नेटवर्क को संभाल रहा था। तस्करी के खुलासे के बाद से उसे हावड़ा, कोलकाता में छिपे होने की जानकारी मिली। 

एसआईटी ने एसपी से इन जानकारियों को साझा किया। इसके बाद प्रभारी निरीक्षक ओबरा सदानंद राय, सुकृत चौकी प्रभारी मानवेंद्र सिंह, सर्विलांस सेल के हेड कांस्टेबल प्रकाश सिंह, एसओजी के हेड कांस्टेबल मनीष सिंह की एक टीम गठित कर हावड़ा के लिए रवाना कर दी। करीब पांच दिन की मेहनत के बाद टीम ने उसे वहां से खोज निकाला। पकड़े जाने के बाद उसे वहां की अदालत में पेश किया। बुधवार को ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद टीम उसे लेकर सोनभद्र पहुंच गई।

तस्करी से जुड़े ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में अधिकांश बांग्लादेशी, ताकि किसी को न होने पाए शक
आरोपी से पूछताछ में जहां शैली ट्रेडर्स के जरिए शुभम जायसवाल की तरफ से रांची से बांग्लादेश तक फेंसाडील कफ सिरप की तस्करी कराए जाने की पुष्टि हुई है। वहीं आरोपी अपनी टीम के चालकों के जरिए कफ सिरप को बिहार के पूर्णिया और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी व कूंचबिहार बॉर्डर तक पहुंचवाता। वहां से उन ट्रकों को बांग्लाभाषी चालक बांग्लादेश तक ले जाते थे। ट्रांसपोर्टिंग नेटवर्क के गैंग में अधिकतर लोग बांग्लाभाषी शामिल किए गए थे ताकि किसी को शक न हो और तस्करी का काम बेरोकटोक आसानी से चलता रहे। 

गिरोह के चार सदस्य पूर्णिया, एक झारखंड में हो चुका है गिरफ्तार
आरोपी से पूछताछ में यह भी पता चला है कि पूर्णिया (बिहार) के थाना मारंगा, वायसी व सरसी क्षेत्र में कार्यरत गैंग के ड्राइवर अमीन, फिरोज, सुमेर शेख निवासी औरंगाबाद, महाराष्ट्र और मेरठ इलाके के रहने वाले आदिल को पूर्णिया पुलिस और मेरठ निवासी वसीम को झारखंड की रांची पुलिस पिछले दिनों कफ सिरप तस्करी के दौरान ट्रक सहित गिरफ्तार कर चुकी है। जुबेर के जरिए उन सभी की जमानत के लिए रुपये भेजवाए गए थे। तस्करी से जुड़े नेटवर्क ने सुमेर की जमानत हासिल कर ली है। शेष के लिए प्रयास किया जा रहा है।

व्हाट्सएप पर करते थे बातचीत, कोड वर्ड था एक-दूसरे से संपर्क का माध्यम
पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि कफ सिरप तस्करी की ट्रांसपोर्टिंग के लिए यह गैंग काफी सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल करता था। गैंग में शामिल किसी भी ड्राइवर को एक दूसरे से बात की इजाजत नहीं थी। सिर्फ कोडवर्ड ही संपर्क का माध्यम था। कभी बातचीत की जरूरत भी पड़ती तो फोन कॉल की जगह व्हाट्सएप का सहारा लिया जाता था। 

कफ सिरप का परिवहन करने वाले ड्राइवरों को इस बात की कड़ी हिदायत थी कि अगर कोई पकड़ा जाए तो वह गिरोह के किसी दूसरे सदस्य के बारे में कोई भी जानकारी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराएगा। इसके बदले उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक व कानूनी मदद का भरोसा दिया जाता था। मुनाफे के तौर पर प्रति ट्रक 30 हजार उपलब्ध कराए जाते थे। प्रति माह एक टीम दो से तीन ट्रक सिरप बांग्लादेश बार्डर तक पहुंचा देती थी, जहां से बांग्लाभाषी चालक बड़े ही आसानी से उसे लेकर बांग्लादेश पहुंच जाते थे। 

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