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Sultanpur News: भाजपा के फ्रंटल मोर्चों में ‘सत्ता संग्राम’, संयोजक फार्मूले से चलेगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 30 Mar 2026 10:14 PM IST
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31-भाजपा का जिला कार्यालय। स्रोत शोशल मीडिया
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राकेश तिवारी
सुल्तानपुर। जिला कार्यकारिणी गठन के बाद भाजपा के फ्रंटल संगठनों में अंदरखाने की सियासी जंग तेज हो गई है। युवा, महिला और किसान मोर्चा के अध्यक्ष पद खाली होते ही दावेदारों की लंबी कतार लग गई है। संगठन के गलियारों में इन पदों को लेकर न सिर्फ पैरवी, बल्कि समीकरण साधने की राजनीति भी चरम पर है। पार्टी फिलहाल अभी सीधे अध्यक्ष घोषित करने के बजाय 'संयोजक फार्मूला' अपनाने जा रही है। इसके तहत अस्थायी तौर पर संयोजकों को जिम्मेदारी देकर संगठन की कमान संभाली जाएगी। प्रदेश कार्यसमिति के गठन के बाद ही स्थायी नियुक्तियों पर मुहर लगेगी।
दरअसल, युवा मोर्चा के अध्यक्ष चंदन नारायण सिंह को जिला उपाध्यक्ष, महिला मोर्चा की अध्यक्ष रेखा निषाद और किसान मोर्चा के अध्यक्ष अरुण जायसवाल को जिला मंत्री बनाए जाने के बाद तीनों मोर्चों के शीर्ष पद खाली हो गए हैं। यही कारण है कि इन पदों के लिए सियासी हलचल अचानक तेज हो गई है। जानकारों के मुताबिक इस बार चयन सिर्फ संगठनात्मक सक्रियता के आधार पर न होकर जातीय संतुलन, क्षेत्रीय पकड़ और 2027 के चुनावी समीकरण को ध्यान में रखकर नाम तय किए जाएंगे। यही वजह है कि सामान्य, पिछड़ा और अन्य वर्गों के दावेदार अपने-अपने स्तर पर लॉबिंग में जुटे हैं। ऐसे में संयोजक मॉडल सिर्फ अंतरिम व्यवस्था ही नहीं, संभावित चेहरों की ‘टेस्टिंग ग्राउंड’ भी माना जा रहा है।
युवा मोर्चा
सबसे ‘हॉट सीट’ युवा मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान है। सामान्य वर्ग में महामंत्री अभिनव सिंह, सुधांशु सिंह, उपाध्यक्ष सचींद्र शुक्ला और अंश द्विवेदी सक्रिय हैं। वहीं, अगर संगठन पिछड़ा कार्ड खेलता है तो गौरव मौर्य मजबूत दावेदार बनकर सामने आए हैं।
दो धड़ों में मुकाबला
महिला मोर्चा में महामंत्री जया सिंह और रागिनी मिश्रा के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। उपाध्यक्ष रेनू तिवारी भी रेस में हैं। पिछड़ा वर्ग से पूजा निषाद का नाम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।
किसान मोर्चा में समीकरणों का खेल
किसान मोर्चा में महामंत्री सतीश सिंह और उपाध्यक्ष संदीप मिश्रा सामान्य वर्ग से प्रमुख चेहरे हैं। वहीं, पिछड़े वर्ग के समीकरण बने तो गौरव मौर्य यहां भी दावेदारी मजबूत कर सकते हैं।
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सुल्तानपुर। जिला कार्यकारिणी गठन के बाद भाजपा के फ्रंटल संगठनों में अंदरखाने की सियासी जंग तेज हो गई है। युवा, महिला और किसान मोर्चा के अध्यक्ष पद खाली होते ही दावेदारों की लंबी कतार लग गई है। संगठन के गलियारों में इन पदों को लेकर न सिर्फ पैरवी, बल्कि समीकरण साधने की राजनीति भी चरम पर है। पार्टी फिलहाल अभी सीधे अध्यक्ष घोषित करने के बजाय 'संयोजक फार्मूला' अपनाने जा रही है। इसके तहत अस्थायी तौर पर संयोजकों को जिम्मेदारी देकर संगठन की कमान संभाली जाएगी। प्रदेश कार्यसमिति के गठन के बाद ही स्थायी नियुक्तियों पर मुहर लगेगी।
दरअसल, युवा मोर्चा के अध्यक्ष चंदन नारायण सिंह को जिला उपाध्यक्ष, महिला मोर्चा की अध्यक्ष रेखा निषाद और किसान मोर्चा के अध्यक्ष अरुण जायसवाल को जिला मंत्री बनाए जाने के बाद तीनों मोर्चों के शीर्ष पद खाली हो गए हैं। यही कारण है कि इन पदों के लिए सियासी हलचल अचानक तेज हो गई है। जानकारों के मुताबिक इस बार चयन सिर्फ संगठनात्मक सक्रियता के आधार पर न होकर जातीय संतुलन, क्षेत्रीय पकड़ और 2027 के चुनावी समीकरण को ध्यान में रखकर नाम तय किए जाएंगे। यही वजह है कि सामान्य, पिछड़ा और अन्य वर्गों के दावेदार अपने-अपने स्तर पर लॉबिंग में जुटे हैं। ऐसे में संयोजक मॉडल सिर्फ अंतरिम व्यवस्था ही नहीं, संभावित चेहरों की ‘टेस्टिंग ग्राउंड’ भी माना जा रहा है।
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युवा मोर्चा
सबसे ‘हॉट सीट’ युवा मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान है। सामान्य वर्ग में महामंत्री अभिनव सिंह, सुधांशु सिंह, उपाध्यक्ष सचींद्र शुक्ला और अंश द्विवेदी सक्रिय हैं। वहीं, अगर संगठन पिछड़ा कार्ड खेलता है तो गौरव मौर्य मजबूत दावेदार बनकर सामने आए हैं।
दो धड़ों में मुकाबला
महिला मोर्चा में महामंत्री जया सिंह और रागिनी मिश्रा के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। उपाध्यक्ष रेनू तिवारी भी रेस में हैं। पिछड़ा वर्ग से पूजा निषाद का नाम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।
किसान मोर्चा में समीकरणों का खेल
किसान मोर्चा में महामंत्री सतीश सिंह और उपाध्यक्ष संदीप मिश्रा सामान्य वर्ग से प्रमुख चेहरे हैं। वहीं, पिछड़े वर्ग के समीकरण बने तो गौरव मौर्य यहां भी दावेदारी मजबूत कर सकते हैं।