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Emergency Test: सुल्तानपुर में आज वायुसेना दिखाएगी दमखम, एक्सप्रेसवे बनेगा रनवे; उतरेंगे सुखोई और मिराज
अमर उजाला नेटवर्क, सुल्तानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 22 Apr 2026 06:15 AM IST
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सार
यह अभ्यास नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय में किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आपात स्थितियों में वैकल्पिक रनवे के रूप में सड़कों के उपयोग की तैयारी परखना है।
सुखोई- 30 एमकेआई फाइटर जेट
- फोटो : ANI
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विस्तार
वायुसेना आज दोपहर 2 बजे सुल्तानपुर के पास इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड एक्टिवेशन एक्सरसाइज का आयोजन कर रही है। यह अभ्यास नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय में किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आपात स्थितियों में वैकल्पिक रनवे के रूप में सड़कों के उपयोग की तैयारी परखना है।
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अभ्यास के दौरान वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और मालवाहक जहाज सड़क पर उतरकर अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। अभ्यास में वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई, जगुआर और मिराज-2000 जैसे अग्रिम लड़ाकू विमान टच-एंड-गो ड्रिल करेंगे। साथ ही सी-295 और एएन-32 जैसे भारी परिवहन विमान भी यहां उतरने का अभ्यास करेंगे।
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इसके अलावा एमआई-17 हेलीकॉप्टर से वायुसेना के योद्धा स्लिदरिंग ऑपेरशन (हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे उतरना) का प्रदर्शन भी करेंगे। यह अभ्यास पूरी तरह से नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय में आयोजित किया जा रहा है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सड़क के इस हिस्से से यातायात भी डायवर्ट किया जाएगा। अभ्यास के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जा सके और आम जनता को असुविधा न हो।
क्यों अहम है अभ्यास?
युद्ध की स्थिति में यदि पारंपरिक एयरबेस क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो ऐसे वैकल्पिक रनवे वायुसेना की क्षमता बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह अभ्यास त्वरित तैनाती, आपूर्ति और बचाव कार्य सुनिश्चित करने की क्षमता भी मजबूत करते हैं। साथ ही नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर आपातकालीन प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय समन्वय की दक्षता भी परखी जाती है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं के समय भारी परिवहन विमानों को प्रभावित क्षेत्रों के करीब उतारने में मदद मिलती है।
हालिया अभ्यास
हाल के महीनों में वायुसेना ने देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह की गतिविधियों में बढ़ोतरी की है। हाल ही में पूर्वोत्तर में भी एलएसी के करीब इसी तरह का अभ्यास किया गया था। वायुसेना का लक्ष्य देश भर में ऐसे लगभग 28 स्थानों को विकसित करना है जहां राष्ट्रीय राजमार्गों को जरूरत पड़ने पर युद्धकालीन रनवे में बदला जा सके।

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