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Sultanpur News: ग्राम पंचायत स्तर पर बने शीतगृह तो किसानों को मिले फायदा
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:30 PM IST
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11. संवाद न्यूज एजेंसी कार्यालय में सोमवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में शामिल किसान और कृषि व
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सुल्तानपुर। किसानों की समृद्धि के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर मिनी शीतगृह की स्थापना हो, जिससे किसान अपनी सब्जियां व फल उसमें संरक्षित कर सकें। सही दाम आने पर बेचकर लाभान्वित हो सकें। यह बातें संवाद न्यूज एजेंसी कार्यालय में सोमवार को आयोजित अमर उजाला संवाद में किसानों ने कहीं। कृषि वैज्ञानिकों ने भी किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों से अवगत कराया।
सहकारी गन्ना विकास समिति के अध्यक्ष शिवपाल सिंह गांधी ने कहा कि वनरोज व छुट्टा जानवर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जो किसान फल या सब्जी उत्पादित कर रहे हैं, उसका सही दाम नहीं मिल पा रहा है। यदि ग्राम पंचायत स्तर पर मिनी शीतगृह की स्थापना हो तो इसका लाभ किसानों को मिल सकता है। स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले खालिसपुर दुर्गा निवासी विमलेश वर्मा ने कहा कि फल और सब्जियों की भी एमएसपी सरकार को निर्धारित करनी चाहिए। केले की खेती करने वाले ऐंजर निवासी अवधेश पांडेय ने कहा कि पिछले साल केले का दाम नहीं मिलने से भारी नुकसान हुआ।
गया प्रसाद सिंह मुरारी ने कहा कि फसलों के अवशेष से खाद बनाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। कटका निवासी किसान अनूप वर्मा ने भी फलों एवं सब्जियों के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने की बात कही। जमील अहमद ने नकदी खेती के बारे में चर्चा की। रामकीरत मिश्र ने बायोगैस एवं वर्मी कंपोस्ट के बारे में जानकारी दी। बैजापुर निवासी किसान अनिल यादव ने छुट्टा जानवर की समस्या को उठाया। फुलौना निवासी पंकज सिंह ने फसलों के उचित दाम का मुद्दा रखा। बांसी निवासी कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को अपनी भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए फसलों के अवशेष जलाने से बचना चाहिए।
कृषि वैज्ञानिकों ने रखी राय
कृषि विज्ञान केंद्र बरासिन के वैज्ञानिक डॉ. शशांक शेखर सिंह ने कहा कि सही दाम मिलने के लिए मंडी एक्ट में संशोधन किया जाना चाहिए। किसान अपना उत्पादन कहीं भी बेच सके। यह व्यवस्था केरल और बिहार में लागू है। कमला नेहरू कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एसपी मिश्र ने कहा कि किसानों को अपनी सुविधानुसार फल, फूल व सब्जियों की खेती पर जोर देना चाहिए। ये फसलें किसानों की आर्थिक समृद्धि में मददगार साबित होंगी।
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सहकारी गन्ना विकास समिति के अध्यक्ष शिवपाल सिंह गांधी ने कहा कि वनरोज व छुट्टा जानवर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जो किसान फल या सब्जी उत्पादित कर रहे हैं, उसका सही दाम नहीं मिल पा रहा है। यदि ग्राम पंचायत स्तर पर मिनी शीतगृह की स्थापना हो तो इसका लाभ किसानों को मिल सकता है। स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले खालिसपुर दुर्गा निवासी विमलेश वर्मा ने कहा कि फल और सब्जियों की भी एमएसपी सरकार को निर्धारित करनी चाहिए। केले की खेती करने वाले ऐंजर निवासी अवधेश पांडेय ने कहा कि पिछले साल केले का दाम नहीं मिलने से भारी नुकसान हुआ।
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गया प्रसाद सिंह मुरारी ने कहा कि फसलों के अवशेष से खाद बनाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। कटका निवासी किसान अनूप वर्मा ने भी फलों एवं सब्जियों के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने की बात कही। जमील अहमद ने नकदी खेती के बारे में चर्चा की। रामकीरत मिश्र ने बायोगैस एवं वर्मी कंपोस्ट के बारे में जानकारी दी। बैजापुर निवासी किसान अनिल यादव ने छुट्टा जानवर की समस्या को उठाया। फुलौना निवासी पंकज सिंह ने फसलों के उचित दाम का मुद्दा रखा। बांसी निवासी कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को अपनी भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए फसलों के अवशेष जलाने से बचना चाहिए।
कृषि वैज्ञानिकों ने रखी राय
कृषि विज्ञान केंद्र बरासिन के वैज्ञानिक डॉ. शशांक शेखर सिंह ने कहा कि सही दाम मिलने के लिए मंडी एक्ट में संशोधन किया जाना चाहिए। किसान अपना उत्पादन कहीं भी बेच सके। यह व्यवस्था केरल और बिहार में लागू है। कमला नेहरू कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एसपी मिश्र ने कहा कि किसानों को अपनी सुविधानुसार फल, फूल व सब्जियों की खेती पर जोर देना चाहिए। ये फसलें किसानों की आर्थिक समृद्धि में मददगार साबित होंगी।