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Sultanpur News: डॉक्टर कम, लाइन लंबी, दवा की चाह में दर्द से गुजरे
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मेडिकल कॉलेेज में दवा काउंटर पर कतार में खड़ेे मरीज व तीमारदार।
- फोटो : मेडिकल कॉलेेज में दवा काउंटर पर कतार में खड़ेे मरीज व तीमारदार।
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सुल्तानपुर। कुर्सी तो दूर, खड़े होने की जगह नहीं...। दो घंटे से इंतजार कर रहे हैं बाबू...। पता नहीं कब नंबर आएगा...। बुजुर्ग राम कलप ने कांपती जुबान से हालात बयां करने की कोशिश की तो चेहरे पर दर्द झलक आया। मेडिकल कॉलेज में सोमवार को उमड़ी भीड़ के बीच सैकड़ों लोगों की यही व्यथा रही। छुट्टी के बाद खुली ओपीडी में मरीजों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि अस्पताल की व्यवस्था चरमराती नजर आई। हालात ये रहे कि मरीजों को अपनी बारी का इंतजार फर्श पर बैठकर करना पड़ा।
पुरुष अस्पताल में 1985 नए मरीजों ने पंजीकरण कराया, जबकि 1000 से अधिक पुराने मरीज भी इलाज के लिए पहुंचे। कुल मिलाकर तीन हजार के पार पहुंची भीड़ ने अस्पताल प्रबंधन के लिए चुनौती खड़ी कर दी। सुबह से शुरू हुई भीड़ दोपहर बाद तक कम नहीं हुई। ओपीडी कक्ष, गलियारे और दवा काउंटर...हर जगह लंबी कतारें दिखीं। अस्पताल में कई फिजिशियन के रिलीव होने के बाद इलाज का जिम्मा जूनियर रेजिडेंट (जेआर) पर आ गया है। इससे ओपीडी में धक्का-मुक्की और विवाद जैसी स्थिति भी बनती दिखी।
फिजिशियन पर सबसे ज्यादा दबाव
सबसे ज्यादा दबाव फिजिशियन कक्ष के सामने देखने को मिला, जहां मरीजों की कतार कमरे से निकलकर गलियारे तक पहुंच गई। कई मरीज थककर जमीन पर ही बैठ गए। बुजुर्ग और महिलाएं भीड़ में सबसे ज्यादा परेशान दिखीं। मीना देवी ने बताया कि सुबह 10 बजे से लाइन में हूं, अभी तक नंबर नहीं आया। वहीं, राम नेवाज बोले- बुखार-खांसी के इलाज के लिए आए थे, लेकिन यहां लग रहा है कि और बीमार पड़ जाएंगे।
दवा काउंटर की व्यवस्था बदहाल
दवा काउंटर पर भी हालात बदतर रहे। पूरे अस्पताल की दवाएं एक ही स्थान से मिलने के कारण यहां सबसे लंबी लाइन लगी रही। मरीजों को दवा लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। अनुज ने बताया कि मां का इलाज कराने आए हैं, सुबह से तीन जगह लाइन लगाकर अब यहां खड़े हैं, लेकिन दवा अभी तक नहीं मिली। रमेश ने कहा, पुराने परचे पर दवा लेने आया था, डेढ़ घंटा लग गया।
छुट्टी के बाद सोमवार को मरीजों की संख्या अधिक हो जाती है, जिससे कुछ परेशानी होती है। सभी चिकित्सकों को निर्देशित किया गया है कि सारे मरीज देखने के बाद ही कक्ष से जाएं। सभी मरीजों का इलाज किया गया है।
- डॉ. एसी गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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पुरुष अस्पताल में 1985 नए मरीजों ने पंजीकरण कराया, जबकि 1000 से अधिक पुराने मरीज भी इलाज के लिए पहुंचे। कुल मिलाकर तीन हजार के पार पहुंची भीड़ ने अस्पताल प्रबंधन के लिए चुनौती खड़ी कर दी। सुबह से शुरू हुई भीड़ दोपहर बाद तक कम नहीं हुई। ओपीडी कक्ष, गलियारे और दवा काउंटर...हर जगह लंबी कतारें दिखीं। अस्पताल में कई फिजिशियन के रिलीव होने के बाद इलाज का जिम्मा जूनियर रेजिडेंट (जेआर) पर आ गया है। इससे ओपीडी में धक्का-मुक्की और विवाद जैसी स्थिति भी बनती दिखी।
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फिजिशियन पर सबसे ज्यादा दबाव
सबसे ज्यादा दबाव फिजिशियन कक्ष के सामने देखने को मिला, जहां मरीजों की कतार कमरे से निकलकर गलियारे तक पहुंच गई। कई मरीज थककर जमीन पर ही बैठ गए। बुजुर्ग और महिलाएं भीड़ में सबसे ज्यादा परेशान दिखीं। मीना देवी ने बताया कि सुबह 10 बजे से लाइन में हूं, अभी तक नंबर नहीं आया। वहीं, राम नेवाज बोले- बुखार-खांसी के इलाज के लिए आए थे, लेकिन यहां लग रहा है कि और बीमार पड़ जाएंगे।
दवा काउंटर की व्यवस्था बदहाल
दवा काउंटर पर भी हालात बदतर रहे। पूरे अस्पताल की दवाएं एक ही स्थान से मिलने के कारण यहां सबसे लंबी लाइन लगी रही। मरीजों को दवा लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। अनुज ने बताया कि मां का इलाज कराने आए हैं, सुबह से तीन जगह लाइन लगाकर अब यहां खड़े हैं, लेकिन दवा अभी तक नहीं मिली। रमेश ने कहा, पुराने परचे पर दवा लेने आया था, डेढ़ घंटा लग गया।
छुट्टी के बाद सोमवार को मरीजों की संख्या अधिक हो जाती है, जिससे कुछ परेशानी होती है। सभी चिकित्सकों को निर्देशित किया गया है कि सारे मरीज देखने के बाद ही कक्ष से जाएं। सभी मरीजों का इलाज किया गया है।
- डॉ. एसी गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक