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Sultanpur News: नदी में छलांग, तीन जिंदगियां बचाईं...चौथे का मलाल
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 06 May 2026 11:54 PM IST
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दादी, मां व बहनों के साथ तीन बच्चों की जान बचाने वाले राजकुमार। संवाद
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मोतिगरपुर गोसाईंगंज। अर्जुनपुर गांव में बुधवार दोपहर कुलदीप की मौत के बाद रह-रहकर रोने की आवाज सुनाई दे रही थी। मंगलवार को कुलदीप की गोमती में डूबने से मौत हो गई थी। वहीं, तीन किशोरों को बचाने वाले राजकुमार से मिलकर लोग गर्व से फूले नहीं समा रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शी राम कुमार बताते हैं कि मंगलवार दोपहर नदी के किनारे टहल रहे थे। तभी चीख-पुकार गूंजी और कुछ ही पलों में माहौल दहशत में बदल गया। नदी में नहा रहे चार लोग गहरे पानी में समाने लगे। लोग घबराकर सिर्फ देख रहे थे, तभी पास में भैंस चरा रहा 14 वर्षीय राजकुमार निषाद बिना एक पल गंवाए नदी में कूद पड़ा। राजकुमार ने पहले मनजीत को पकड़ा और बाहर धकेला, फिर दोबारा डुबकी लगाकर कल्लू को खींच लाया।
तीसरी बार उसने ओमलाल को सुरक्षित किनारे पहुंचाया। हर बार उसकी सांसें तेज हो रही थीं, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ। चौथी बार जब वह कुलदीप को बचाने के लिए नदी में उतरा, तब तक हालात बिगड़ चुके थे। काफी जद्दोजहद के बाद वह खाली हाथ बाहर आया। तीन लोगों की जान बचाने वाले राजकुमार ने बताया कि उसे तीन जिंदगियां बचाने की संतुष्टि तो है लेकिन एक को न बचा पाने का गहरा मलाल भी है। वह कहते हैं कि यदि भीड़ में से कोई एक भी उसका साथ देता तो कुलदीप को बचाया जा सकता था। घटना के बाद गांव में मातम पसरा है। जिन तीन किशोरों की जान बची, उनके परिवार राजकुमार को ‘मसीहा’ कह रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि अगर वह वक्त पर न कूदता, तो चारों की जान जा सकती थी। साधारण परिवार से आने वाला राजकुमार आज पूरे गांव के लिए साहस का प्रतीक बन गया है।
गांव में गम, घरों में सन्नाटा
घटना के दूसरे दिन भी अर्जुनपुर गांव में सन्नाटा पसरा रहा। कुलदीप का अंतिम संस्कार मंगलवार शाम को ही कर दिया गया था। कुलदीप के घर लोगों का तांता लगा है, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं जिन परिवारों के बच्चे सुरक्षित लौटे, वहां राहत के साथ भावुक माहौल है। गांव के लोग एक ओर इस हादसे से दुखी हैं, तो दूसरी ओर राजकुमार की बहादुरी पर गर्व भी जता रहे हैं। कई लोग प्रशासन से उसे सम्मानित करने की मांग कर रहे हैं।
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प्रत्यक्षदर्शी राम कुमार बताते हैं कि मंगलवार दोपहर नदी के किनारे टहल रहे थे। तभी चीख-पुकार गूंजी और कुछ ही पलों में माहौल दहशत में बदल गया। नदी में नहा रहे चार लोग गहरे पानी में समाने लगे। लोग घबराकर सिर्फ देख रहे थे, तभी पास में भैंस चरा रहा 14 वर्षीय राजकुमार निषाद बिना एक पल गंवाए नदी में कूद पड़ा। राजकुमार ने पहले मनजीत को पकड़ा और बाहर धकेला, फिर दोबारा डुबकी लगाकर कल्लू को खींच लाया।
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तीसरी बार उसने ओमलाल को सुरक्षित किनारे पहुंचाया। हर बार उसकी सांसें तेज हो रही थीं, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ। चौथी बार जब वह कुलदीप को बचाने के लिए नदी में उतरा, तब तक हालात बिगड़ चुके थे। काफी जद्दोजहद के बाद वह खाली हाथ बाहर आया। तीन लोगों की जान बचाने वाले राजकुमार ने बताया कि उसे तीन जिंदगियां बचाने की संतुष्टि तो है लेकिन एक को न बचा पाने का गहरा मलाल भी है। वह कहते हैं कि यदि भीड़ में से कोई एक भी उसका साथ देता तो कुलदीप को बचाया जा सकता था। घटना के बाद गांव में मातम पसरा है। जिन तीन किशोरों की जान बची, उनके परिवार राजकुमार को ‘मसीहा’ कह रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि अगर वह वक्त पर न कूदता, तो चारों की जान जा सकती थी। साधारण परिवार से आने वाला राजकुमार आज पूरे गांव के लिए साहस का प्रतीक बन गया है।
गांव में गम, घरों में सन्नाटा
घटना के दूसरे दिन भी अर्जुनपुर गांव में सन्नाटा पसरा रहा। कुलदीप का अंतिम संस्कार मंगलवार शाम को ही कर दिया गया था। कुलदीप के घर लोगों का तांता लगा है, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं जिन परिवारों के बच्चे सुरक्षित लौटे, वहां राहत के साथ भावुक माहौल है। गांव के लोग एक ओर इस हादसे से दुखी हैं, तो दूसरी ओर राजकुमार की बहादुरी पर गर्व भी जता रहे हैं। कई लोग प्रशासन से उसे सम्मानित करने की मांग कर रहे हैं।