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Sultanpur News: मुहर्रम का आगाज, गूंजीं या हुसैन की सदाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:53 PM IST
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शहर में मंगलवार रात मुहर्रम का चांद दिखने पर जुलूस निकालते शिया समुदाय के लोग। स्रोत-सोशल मीडि
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सुल्तानपुर। मुहर्रम का चांद नजर आते ही जिले में गम और अकीदत का माहौल छा गया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इमामबाड़ों को सजाया गया और मजलिस-मातम का सिलसिला शुरू हो गया। मंगलवार रात शहर के खैराबाद में नसीम हुसैन के इमामबाड़े से आगाज-ए-मुहर्रम का जुलूस निकाला गया।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना बबर अली खां ने कहा कि इमाम हुसैन किसी एक धर्म के नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के इमाम हैं। उन्होंने कर्बला के शहीदों के आदर्शों पर चलने और हर हाल में हक का साथ देने का संदेश दिया। जुलूस में अंजुमन गुनचए मजलूमिया ने नौहा मातम किया। इस मौके पर अनवर हैदर, रज्जब अली, रफअत हुसैन, डॉ. जफर, अली जाफरी, शाकिर अब्बास सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
अच्छाई की जीत और बुराई की हार का प्रतीक है कर्बला : मौलाना
फोटो-15
गोसाईगंज। वक्फ इमामबाड़ा हयातनगर में मुहर्रम की पहली मजलिस मंगलवार रात डॉ. हसन मेहंदी के आवास पर हुई। प्रयागराज से आए मौलाना सैयद अली अब्बास ने कहा कि कर्बला अच्छाई और बुराई के संघर्ष का प्रतीक है। इमाम हुसैन ने इंसानियत और मानवता की रक्षा के लिए कुर्बानी दी। मसायब सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। बाद में अंजुमन असगरिया ने नौहा और मातम पेश किया। मजलिस में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। यह जानकारी कमेटी तमन्ना-ए-मूसा के अध्यक्ष कायम मेहंदी चांद ने दी। संवाद
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मजलिस-मातम का दौर शुरू
कुड़वार। मंगलवार रात मुहर्रम का चांद दिखते ही मनियारपुर, हसनपुर और जुड़ूपुर में जुलूस-ए-अलम निकाले गए। छोटे इमामबाड़े से निकला जुलूस कदीमी मार्गों से होकर बड़े इमामबाड़े पर समाप्त हुआ। इमामबाड़ों में अलम, ताबूत और ताजिए सजाए गए। हुसैनी आर्मी के अध्यक्ष फजल रिजवी फैज ने बताया कि कर्बला के 72 शहीदों की याद में दो माह आठ दिन तक मजलिसों और मातम का सिलसिला जारी रहेगा। संवाद
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना बबर अली खां ने कहा कि इमाम हुसैन किसी एक धर्म के नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के इमाम हैं। उन्होंने कर्बला के शहीदों के आदर्शों पर चलने और हर हाल में हक का साथ देने का संदेश दिया। जुलूस में अंजुमन गुनचए मजलूमिया ने नौहा मातम किया। इस मौके पर अनवर हैदर, रज्जब अली, रफअत हुसैन, डॉ. जफर, अली जाफरी, शाकिर अब्बास सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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अच्छाई की जीत और बुराई की हार का प्रतीक है कर्बला : मौलाना
फोटो-15
गोसाईगंज। वक्फ इमामबाड़ा हयातनगर में मुहर्रम की पहली मजलिस मंगलवार रात डॉ. हसन मेहंदी के आवास पर हुई। प्रयागराज से आए मौलाना सैयद अली अब्बास ने कहा कि कर्बला अच्छाई और बुराई के संघर्ष का प्रतीक है। इमाम हुसैन ने इंसानियत और मानवता की रक्षा के लिए कुर्बानी दी। मसायब सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। बाद में अंजुमन असगरिया ने नौहा और मातम पेश किया। मजलिस में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। यह जानकारी कमेटी तमन्ना-ए-मूसा के अध्यक्ष कायम मेहंदी चांद ने दी। संवाद
मजलिस-मातम का दौर शुरू
कुड़वार। मंगलवार रात मुहर्रम का चांद दिखते ही मनियारपुर, हसनपुर और जुड़ूपुर में जुलूस-ए-अलम निकाले गए। छोटे इमामबाड़े से निकला जुलूस कदीमी मार्गों से होकर बड़े इमामबाड़े पर समाप्त हुआ। इमामबाड़ों में अलम, ताबूत और ताजिए सजाए गए। हुसैनी आर्मी के अध्यक्ष फजल रिजवी फैज ने बताया कि कर्बला के 72 शहीदों की याद में दो माह आठ दिन तक मजलिसों और मातम का सिलसिला जारी रहेगा। संवाद