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Sultanpur News: बिजली मजदूर की मौत पर हंगामा, मुआवजे के बाद अंतिम संस्कार
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लंभुआ के कुबेर शाह पट्टी गांव में रोते-बिलखते परिजन।
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लंभुआ। शहर के तुराबखानी इलाके में 14 जुलाई की देर रात बिजली मजदूर दुर्गेश की करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना के बाद 16 जुलाई को मुआवजे को लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया और आर्थिक सहायता की मांग पर अड़े रहे। करीब तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद ठेकेदार ने चेक सौंपा, इसके बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार किया।
कुबेरशाह पट्टी निवासी दुर्गेश बिजली का कार्य करता था। 14 जुलाई रात उसे तुराबखानी इलाके में एक कार्यक्रम में बिजली का काम करने बुलाया गया था। देर रात करीब 12 बजे वह करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
15 जुलाई को पोस्टमार्टम के बाद देर शाम शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। बृहस्पतिवार की सुबह करीब 10 बजे से परिजन और ग्रामीण शव घर पर रखकर प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने ठेकेदार पर जबरन काम कराने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की भी मांग की। सूचना पर लंभुआ और चांदा थाने की पुलिस तथा क्षेत्राधिकारी ऋतिक कपूर मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। करीब तीन घंटे तक गतिरोध जारी रहा।
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मुआवजे पर बनी सहमति
लंबी वार्ता के बाद ठेकेदार ने 2.50 लाख रुपये का चेक दिया। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए। 16 जुलाई दोपहर करीब 1:30 बजे धोपाप घाट पर पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार कराया गया। घटना से परिजनों और साथी मजदूरों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
किसी भी पक्ष से नहीं मिली तहरीर लंभुआ के क्षेत्राधिकारी ऋतिक कपूर ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ठेकेदार और मृतक के परिजनों के बीच आपसी सहमति बन गई है। अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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कुबेरशाह पट्टी निवासी दुर्गेश बिजली का कार्य करता था। 14 जुलाई रात उसे तुराबखानी इलाके में एक कार्यक्रम में बिजली का काम करने बुलाया गया था। देर रात करीब 12 बजे वह करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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15 जुलाई को पोस्टमार्टम के बाद देर शाम शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। बृहस्पतिवार की सुबह करीब 10 बजे से परिजन और ग्रामीण शव घर पर रखकर प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने ठेकेदार पर जबरन काम कराने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की भी मांग की। सूचना पर लंभुआ और चांदा थाने की पुलिस तथा क्षेत्राधिकारी ऋतिक कपूर मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। करीब तीन घंटे तक गतिरोध जारी रहा।
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मुआवजे पर बनी सहमति
लंबी वार्ता के बाद ठेकेदार ने 2.50 लाख रुपये का चेक दिया। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए। 16 जुलाई दोपहर करीब 1:30 बजे धोपाप घाट पर पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार कराया गया। घटना से परिजनों और साथी मजदूरों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
किसी भी पक्ष से नहीं मिली तहरीर लंभुआ के क्षेत्राधिकारी ऋतिक कपूर ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ठेकेदार और मृतक के परिजनों के बीच आपसी सहमति बन गई है। अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।