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Unnao News: ढाई घंटे बाद पहला और दूसरा तीन घंटे बाद पहुंचा हाईड्रा उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Mon, 13 Apr 2026 12:43 AM IST
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हसनगंज। लखनऊ-बांगरमऊ मार्ग पर रविवार शाम नेवलगंज गांव के पास गिट्टी लदा डंपर पलटने की घटना में पुलिस ने दो जेसीबी तो पहले ही मंगा ली थीं लेकिन हाइड्रा को आने में ढाई से तीन घंटे लग गए। लोगों का मानना था कि अगर समय से हाइड्रा आते तो शायद इन दोनों की भी जान बच सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हाइड्रा आने के बाद जैसे ही डंपर को सीधा किया गया, वह दो हिस्सों में बंट गया और डीजल टैंक फटने से आग लग गई। इससे मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आसपास घरों में रहने वाले लोगों में लालता, शिवराम, मनोज, महेश और गौरव आ आए। घटनास्थल पर मौजूद दमकल की एक गाड़ी ने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया और 9:30 बजे आग पूरी तरह से बुझ पाई। घटनास्थल पर करीब एक हजार लोग मौजूद रहे। पुलिस उन्हें आग के पास जाने से रोकती रही। आग लगने से डंपर नहीं उठ पाया था। राहत एवं बचाव कार्य जारी है, एहतियात के तौर पर दो एंबुलेंस भी खड़ी की गई हैं। डंपर पलटने से दो बाइक, दो साइकिल क्षतिग्रस्त हुई हैं।
पीपल के पेड़ से बची कई लोगों की जान
हसनगंज। नेवलगंज गांव के पास चौराहे पर जिस समय घटना हुई उस समय करीब 50 लोग वहां मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, डंपर का आधा हिस्सा सड़क पर और आधा पास में खड़े पीपल के पेड़ में टकराकर फंस गया। अगर पूरा डंपर पलटता तो शायद दस से अधिक लोगों की जान जा सकती थी। पीपल के पेड़ पर आधा हिस्सा रुकते ही वहां मौजूद लोगों ने इधर-उधर भागकर जान बचाई। अनुमान लगाया जा रहा है कि डंपर की स्पीड करीब 50 से 55 किमी के बीच रही होगी।
कक्षा छह का छात्र था किशोर, मां बोली अब किसे सिलाऊंगी नई यूनिफॉर्म
हसनगंज। डंपर पलटने से जान गंवाने वाले दो लोगों में एक किसान और दूसरा छात्र था। मौत के बाद परिजन काफी आक्रोशित रहे। पत्नी पति के लिए और मां बेटे के लिए बेहाल थी। मां बार-बार यही कह रही थी कि अब किसके लिए नई यूनिफॉर्म बनवाऊंगी।
हादसे का शिकार हुआ किसान अशोक खेती कर परिवार का पालन-पोषण करता था। घटना के समय वह खाद लेकर आ रहा था। भूख लगने पर वह ठेलिया किनारे साइकिल खड़ी कर चाट खाने लगा और हादसे का शिकार हो गया। पति की मौत से पत्नी रेशमा, बच्चों में पांच बेटी बेहाल हैं। वहीं दूसरा मृतक सूरज कक्षा छह का छात्र है। बेटे की मौत से मां कंचन, बहन गुड़िया और भाई राम सिंह सहित अन्य परिजन बेहाल हैं। चीखते हुए मां कह रही थी कि बेटे ने नई यूनिफॉर्म बनवाने के बाद ही स्कूल जाने की बात कही थी, अब किसे यूनिफॉर्म पहनवाऊंगी।
नहीं पहुंची एसडीएम
घटना के बाद रात साढ़े नौ बजे तक एसडीएम प्रज्ञा पांडेय मौके पर नहीं पहुंच सकीं। जबकि घटनास्थल से तहसील की दूसरी मात्र पांच किमी के आसपास है। प्रशासनिक अधिकारियों में मात्र एक नायब तहसीलदार ही पहुंचे। इसको लेकर परिजनों में खासा आक्रोश रहा। पहली बार तो पुलिस ने किसी तरह से शव उठवाकर पोस्टमॉर्टम हाउस भेजने का प्रयास किया लेकिन परिजन घटनास्थल से सौ मीटर दूर फिर शव छीनकर सड़क पर रखकर प्रशासनिक के बड़े अधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए। हालांकि बाद में सीओ पुरवा व हसनगंज सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को मुआवजा दिलाने व अन्य सारी मांगे पूरी कराने का आश्वासन दिया तब कहीं जाकर दस मिनट बाद फिर परिजन शांत हुए और पुलिस ने 9.35 बजे शव लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।
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पीपल के पेड़ से बची कई लोगों की जान
हसनगंज। नेवलगंज गांव के पास चौराहे पर जिस समय घटना हुई उस समय करीब 50 लोग वहां मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, डंपर का आधा हिस्सा सड़क पर और आधा पास में खड़े पीपल के पेड़ में टकराकर फंस गया। अगर पूरा डंपर पलटता तो शायद दस से अधिक लोगों की जान जा सकती थी। पीपल के पेड़ पर आधा हिस्सा रुकते ही वहां मौजूद लोगों ने इधर-उधर भागकर जान बचाई। अनुमान लगाया जा रहा है कि डंपर की स्पीड करीब 50 से 55 किमी के बीच रही होगी।
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कक्षा छह का छात्र था किशोर, मां बोली अब किसे सिलाऊंगी नई यूनिफॉर्म
हसनगंज। डंपर पलटने से जान गंवाने वाले दो लोगों में एक किसान और दूसरा छात्र था। मौत के बाद परिजन काफी आक्रोशित रहे। पत्नी पति के लिए और मां बेटे के लिए बेहाल थी। मां बार-बार यही कह रही थी कि अब किसके लिए नई यूनिफॉर्म बनवाऊंगी।
हादसे का शिकार हुआ किसान अशोक खेती कर परिवार का पालन-पोषण करता था। घटना के समय वह खाद लेकर आ रहा था। भूख लगने पर वह ठेलिया किनारे साइकिल खड़ी कर चाट खाने लगा और हादसे का शिकार हो गया। पति की मौत से पत्नी रेशमा, बच्चों में पांच बेटी बेहाल हैं। वहीं दूसरा मृतक सूरज कक्षा छह का छात्र है। बेटे की मौत से मां कंचन, बहन गुड़िया और भाई राम सिंह सहित अन्य परिजन बेहाल हैं। चीखते हुए मां कह रही थी कि बेटे ने नई यूनिफॉर्म बनवाने के बाद ही स्कूल जाने की बात कही थी, अब किसे यूनिफॉर्म पहनवाऊंगी।
नहीं पहुंची एसडीएम
घटना के बाद रात साढ़े नौ बजे तक एसडीएम प्रज्ञा पांडेय मौके पर नहीं पहुंच सकीं। जबकि घटनास्थल से तहसील की दूसरी मात्र पांच किमी के आसपास है। प्रशासनिक अधिकारियों में मात्र एक नायब तहसीलदार ही पहुंचे। इसको लेकर परिजनों में खासा आक्रोश रहा। पहली बार तो पुलिस ने किसी तरह से शव उठवाकर पोस्टमॉर्टम हाउस भेजने का प्रयास किया लेकिन परिजन घटनास्थल से सौ मीटर दूर फिर शव छीनकर सड़क पर रखकर प्रशासनिक के बड़े अधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए। हालांकि बाद में सीओ पुरवा व हसनगंज सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को मुआवजा दिलाने व अन्य सारी मांगे पूरी कराने का आश्वासन दिया तब कहीं जाकर दस मिनट बाद फिर परिजन शांत हुए और पुलिस ने 9.35 बजे शव लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।