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Unnao News: घायलों की जा रही जान रही जान, ट्रॉमा सेंटर पर नहीं ध्यान

Fri, 03 Jul 2026 12:26 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 12:26 AM IST
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The injured are losing their lives; the trauma center is being neglected.The injured are losing their lives; the trauma center is being neglected.
फोटो-34-जिला अस्पताल स्थित ट्रामासेंटर। संवाद
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डॉक्टर व स्टाफ न होने से औपचारिक संचालन, इमरजेंसी वार्ड से रेफर किए जा रहे मरीज



संवाद न्यूज एजेंसी



उन्नाव। राजधानी लखनऊ और महानगर कानपुर के बीच दो हाईवे और तीन एक्सप्रेसवे से घिरे उन्नाव में रोज कई सड़क हादसे होते हैं लेकिन जिले के अस्पतालों में इलाज के पर्याप्त इंतजाम न होने से वह रेफर सेंटर बने हैं।



बुधवार को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे के बाद घायलों को घटनास्थल से 15 किमी दूर बांगरमऊ पीएचसी इसके बाद 45 किमी दूर जिला अस्पताल रेफर किया गया। ट्रॉमा सेंटर पूरी तरह संचालित होता तो घायलों को समुचित इलाज मिलता। इस साल अलग-अलग मार्गों पर जिले में 242 बड़े हादसे हुए, जिनमें 123 लोगों की मौत हुई और 299 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। मृतकों में 19 की मौत कानपुर या लखनऊ ले जाते समय रास्ते में हुई।
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लखनऊ और कानपुर सहित पांच जिलों की सीमाओं से सटे उन्नाव में कानपुर-लखनऊ हाईवे, उन्नाव-लालगंज (रायबरेली) हाईवे, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे से जिला घिरा है। आने वाले दिनों में कानपुर-लखनऊ के बीच एक और एक्सप्रेसवे (एनई-6) भी शुरू होने वाला हैलेकिन जिले में गंभीर घायलों के इलाज की सुविधा न होने से कानपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। डॉक्टरों, स्टाफ की कमी और कई जरूरी उपकरण न होने से जिले की 33 लाख आबादी को ट्रामा सेंटर का लाभ नहीं मिल रहा है।
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प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री व जिले के पूर्व सांसद बृजेश पाठक ने वर्ष 2016 में 1.17 करोड़ रुपये की लागत से ट्रॉमा सेंटर की बिल्डिंग का निर्माण कराया था। सीटी स्कैन के साथ 22 वेंटिलेटर, आठ इन्फ्यूजन पंप व चार बाइपेप मशीनें, एक पोर्टेबल एक्सरे मशीन व चिकित्सा उपकरण लगाने पर 2.07 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें सीटी स्कैन का ही मरीजों का लाभ मिल रहा है। लेकिन अन्य मशीनों का संचालन न होने से गंभीर घायलों को इमरजेंसी से ही कानपुर हैलट रेफर किया जा रहा है।



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ट्रॉमा सेंटर में ये सुविधाएं

पर्याप्त दवाएं, सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, आर्थोपेडिक्स, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया, विशेषज्ञ डॉक्टर, वर्किंग ऑपरेशन थिएटर, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट, ट्रांसपोर्टेबल वेंटिलेटर, सीटी स्कैन, ब्लड स्टोरेज यूनिट, पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन, सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन, पैथोलॉजी, ईको कार्डियोग्राफी, ईसीजी और स्पाइन बोर्ड जैसी सुविधाएं होना जरूरी हैं।
22 में छह वेंटिलेटर चालू
ट्रामा सेंटर में तीन साल पहले 22 वेंटिलेटर लगाए गए थे। उन्हें आईसीयू में रखवाया गया था, ताकि गंभीर मरीजों का इलाज किया जा सके लेकिन डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ न होने से इनका संचालन नहीं हो पा रहा है। केवल छह ही ऐसे हैं जिनका कभी-कभी जिला अस्पताल के ही स्टाफ के सहारे चलाया जाता है।
हाईवे और एक्सप्रेसवे सहित चार ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव ठप बस्ते में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर दो साल पहले 11 जुलाई 2024 को बेहटामुजावर थाना क्षेत्र में दूध टैंकर और स्लीपर बस की टक्कर में दोनों वाहनों के चालक सहित 18 लोगों की मौत हुई थी और 23 लोग घायल हुए थे। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी गौरांग राठी ने सफीपुर और बांगरमऊ में ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए शासन को मांगपत्र भेजने की बात कही थी। विभाग ने भी आनन-फानन बांगरमऊ, नवाबगंज और मौरावां व बीघापुर के 100 बेड के अस्पताल में ट्रामा सेंटर बनाने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन वह भी फाइलों में दब गया है।

वर्जन
ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए निदेशालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी। बांगरमऊ, नवाबगंज और मौरावां व बीघापुर के 100 बेड अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर के लिए प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया था, अभी स्वीकृति नहीं हुई है।-डॉ. अजय कुमार शर्मा, सीएमओ
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