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Unnao News: पुराने की नहीं ले रहे सुध, 90 स्वास्थ्य उपकेंद्र खोलने की तैयारी
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उन्नाव। ग्रामीणों को गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले में 406 स्वास्थ्य उपकेंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) खोले गए थे लेकिन ज्यादातर उपकेंद्रों पर या तो ताला लटक रहे हैं या फिर बदहाल हैं। अब स्वास्थ्य विभाग 90 नए उपकेंद्र खोलने की तैयारी कर रहा है।
जिले में 406 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इनमें ब्लड प्रेशर, मधुमेह और कैंसर के मरीजों की स्क्रीनिंग करने का दावा किया गया था लेकिन जिन सुविधाओं का दावा किया जा रहा था वह हवा-हवाई साबित हो रही हैं। हाल यह है कि अधिकांश स्वास्थ्य उपकेंद्रों के ताले ही नहीं खुलते। कई सेंटरों पर तो स्टाफ की तैनाती तक नहीं की गई। इंतजाम के नाम पर भी कुछ नहीं है। उधर, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए पांच हजार आबादी वाले ग्राम पंचायतों के लिए 90 उपस्वास्थ्य केंद्र और खोलने की तैयारी की जा रही है।
140 एएनएम की होगी जरूरत
मौजूदा समय 406 उपकेंद्र के सापेक्ष 356 एएनएम की ही तैनाती है। नए उपकेंद्र खुलने पर 140 एएनएम की और जरूरत होगी जबकि पहले से ही स्वास्थ्य विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। आंकड़ों के अनुसार 31 लाख की आबादी पर जिले में महज 129 एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती है। जबकि मानक के अनुसार पांच हजार आबादी पर एक डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए।
इन सुविधाओं का किया गया था दावा
हीमोग्लोबिन, टीएलसी, डीएलसी, ब्लड ग्रुप, पेशाब द्वारा गर्भ की जांच, ग्लूकोज की जांच, मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, हेपेटाइटिस, बलगम, टाइफाइड आदि की जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा गर्भावस्था व शिशु जन्म देखभाल, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, बाल व किशोर स्वास्थ्य देखभाल, संक्रामक रोगों का प्रबंधन, साधारण बीमारियों का उपचार, परिवार नियोजन व प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था मिलने का दावा किया गया था।
सभी उपकेंद्रों का निरीक्षण किया गया था। जिस भी सेंटर पर जो कमी है, उसकी सूची तैयार कराई गई है। जल्द ही जिले के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर स्टॉफ की तैनाती होगी। इसके अलावा जो भी कमियां हैं, उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। -डॉ. एचएन प्रसाद, प्रभारी सीएमओ।
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जिले में 406 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इनमें ब्लड प्रेशर, मधुमेह और कैंसर के मरीजों की स्क्रीनिंग करने का दावा किया गया था लेकिन जिन सुविधाओं का दावा किया जा रहा था वह हवा-हवाई साबित हो रही हैं। हाल यह है कि अधिकांश स्वास्थ्य उपकेंद्रों के ताले ही नहीं खुलते। कई सेंटरों पर तो स्टाफ की तैनाती तक नहीं की गई। इंतजाम के नाम पर भी कुछ नहीं है। उधर, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए पांच हजार आबादी वाले ग्राम पंचायतों के लिए 90 उपस्वास्थ्य केंद्र और खोलने की तैयारी की जा रही है।
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140 एएनएम की होगी जरूरत
मौजूदा समय 406 उपकेंद्र के सापेक्ष 356 एएनएम की ही तैनाती है। नए उपकेंद्र खुलने पर 140 एएनएम की और जरूरत होगी जबकि पहले से ही स्वास्थ्य विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। आंकड़ों के अनुसार 31 लाख की आबादी पर जिले में महज 129 एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती है। जबकि मानक के अनुसार पांच हजार आबादी पर एक डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए।
इन सुविधाओं का किया गया था दावा
हीमोग्लोबिन, टीएलसी, डीएलसी, ब्लड ग्रुप, पेशाब द्वारा गर्भ की जांच, ग्लूकोज की जांच, मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, हेपेटाइटिस, बलगम, टाइफाइड आदि की जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा गर्भावस्था व शिशु जन्म देखभाल, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, बाल व किशोर स्वास्थ्य देखभाल, संक्रामक रोगों का प्रबंधन, साधारण बीमारियों का उपचार, परिवार नियोजन व प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था मिलने का दावा किया गया था।
सभी उपकेंद्रों का निरीक्षण किया गया था। जिस भी सेंटर पर जो कमी है, उसकी सूची तैयार कराई गई है। जल्द ही जिले के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर स्टॉफ की तैनाती होगी। इसके अलावा जो भी कमियां हैं, उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। -डॉ. एचएन प्रसाद, प्रभारी सीएमओ।
